चन्द्रयान 2 की सफल लांचिंग, इसरो बधाई की पात्र है…!


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शख्सियत


‘मिस्टर यूनिवर्स’ भरत सिंह वालिया

चंडीगढ़ के बॉडी बिल्डर भरत सिंह वालिया ने मियामी अमेरिका में प्रतिष्ठित बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता ‘मसल मेनिया’ में मिस्टर यूनिवर्स का टाइटल जीतकर भारत का नाम रोशन

किया। इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। आइये जानते हैं उनके जीवन के कुछ पहलू :
चंडीगढ़ से पासआउट और एक २३ वर्षीय पेशेवर बॉडीबिल्डर, भरत सिंह वालिया ने हाल ही में मियामी (यूएसए) में आयोजित एक प्रतिष्ठित बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता ‘मसल मैनिया’ में ‘मिस्टर यूनिवर्स’ का खिताब जीता है।

इससे पहले सिंगापुर में वह ‘मिस्टर इंडिया’ खिताब जीत चुके हैं। अब नवंबर माह में, भरत सिंह अमेरिका के लास वेगास में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
भरत सिंह वालिया रायपुर-रानी, हरियाणा के निवासी हैं, और उनके पिता चंडीगढ़ पुलिस में काम करते हैं। जिम शुरू करते ही भरत सिंह को एहसास हो गया था कि उनका शरीर बहुत अच्छे से रेस्पोंस कर रहा है और जल्दी ही अच्छी शेप में आ गया। भरत सिंह कहते हैं, ‘जिम’ हमेशा से मेरा स्ट्रेस बस्टर रहा है। यही मेरा मेडिटेशन है, और वर्कआउट करने से मैं तरोताजा हो जाता हूं।’ खाली समय में वह ऑनलाइन वर्कआउट कोचिंग भी देते हैं। भरत ने बताया, ‘शुरू में मेरे माता-पिता ने बॉडी बिल्डिंग के मेरे जुनून को हल्के में ले लिया था। मैं जिम के लिए अपनी ट्यूशन क्लास बंक कर देता था, क्योंकि परिवार को मेरा जिम जाना

पसंद नहीं था। हालांकि मैं अन्य किसी को ऐसा करने की राय नहीं दूंगा। जब मैंने हैल्थ
सप्लीमेंट लेने की सोची, लेकिन प्राइस ज्यादा होने की वजह से उसे खरीदने के लिए मेरे मेरे पास पर्याप्त पैसे ही नहीं थे। पैसे कमाने के लिए, मैंने एक महीने तक एक जिम में काम किया। लेकिन मेरे लिए ख़ुशी की बात थी, कि जल्द ही, माता-पिता ने मुझ पर भरोसा करना शुरू कर दिया, और अब तो वे पूरी तरह से मुझे सपोर्ट करते हैं।
अपने आहार के बारे में बात करते हुए, भरत सिंह ने कहा कि मैं आर्टिफिशियल फूड की बजाय नेचुरल फूड को प्राथमिकता देता हूँ। बॉडी बिल्डिंग के पहले दो वर्षों तक उन्होंने कोई सप्लीमेंट नहीं लिया। अब भी वह इसके बजाय, विटामिन एवं प्रोटीन से भरपूर प्राकृतिक भोजन लेते हैं। वह कहते हैं कि हर किसी के शरीर का मेटाबॉलिज्म अलग होता है, इसलिए किसी अन्य की सलाह को आंख मूंदकर नहीं मानना चाहिए।
भरत सिंह ने 15 साल की उम्र में शुरू की ट्रेनिंग, और 8 साल की ट्रेनिंग के बाद जीता कैरियर का सबसे बड़ा टाइटल भरत सिंह ने कंपीटिशन लड़ने की शुरुआत २०१६ में डीएवी कॉलेज में की थी। पेरेंट्स और दोस्तों ने कंपीटिशन करने के लिए हौसला बढ़ाया। डीएवी कॉलेज की ओर से खेलते हुए सिल्वर मेडल जीता। भरत सिंह ने इससे पहले ‘मिस्टर इंडिया’ का टाइटल भी जीता था। बतौर भरत सिंह मेरे लिए ये करियर की शुरुआत है, और अभी काफी दूर जाना है। मैंने सप्लीमेंट्स लेने पर कभी जोर नहीं दिया। मैं ज्यादा विटामिन लेता हूं और अपनी डाइट में प्रोटीन लेना पसंद करता हूं। भरत सिंह का कहना है कि सभी इसे फॉलो न करें, क्योंकि हर किसी की बॉडी अलग तरह की होती है।

कुछ लम्हे …


जाने से पहले मुड़कर न देखेंगे
गलियां …. फिर से, वही
क्यों अक्स, नफरत वहीं देखें


बेशुमार थी, मोहब्बत ….जिसमें
गुम – ए – परछाई, रहे … मशगूल
आँखें चार ….. गेसुओं में
शोले, अंगारे झुलसे से
हुए जिनमें … थे तार – तार
बता देती, कि नहीं तन्हा अब
गुजार लेते तन्हाई, मधुशाला
भूल जाते, गिले …. शिकवे
हम, जैसे भी, बेगार …..
पर शिकवा, छपाक न मारते …
पत्थर, पानी …. में ठहरे
जाने होगा शांत ….. कब और कैसे ?

कैल्शियम से शारीरिक मजबूती बढ़ाएं …..


यूँ तो कैल्शियम सभी के लिए जरूरी है। इससे हमारे शरीर में हड्डियों व दांतों का विकास होता है। और यह मजबूत होती हैं। लेकिन जब बात महिलाओं के बारे में हो, तो उनके लिए

कैल्शियम कितना जरूरी है, आइये जानते हैं।
अक्सर देखा गया है कि महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा ही लापरवाह हो जाती हैं, और इसका परिणाम शरीर में कैल्शियम की कमी जैसी समस्या।

प्रकृति के अनुसार महिलाओं के शरीर की बनावट पुरुषों के बजाय ज्यादा संवेदनशील होती है। जिसका कारण महिलाओं को कई प्राकृतिक प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। जैसेकि मासिक धर्म, गर्भधारण, शिशु को स्तनपान और मेनोपॉज आदि। ऐसे में महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले अधिक कैल्शियम की जरूरत होती है। डाक्टरों के अनुसार एक महिला को लगभग १००० मिली ग्राम प्रतिदिन कैल्शियम की आवश्यकता होती है।आमतौर
पर अनबैलेंस्ड डाइट और पर्याप्त खान – पान की कमी के कारण इसकी पूर्ति नहीं हो पाती। और इसका परिणाम शरीर में कैल्शियम की कमी और उससे उपजी बिमारियों का सामना करना पड़ता है।
आखिर कैल्शियम जरूरी क्यों है ?
शरीर में हड्डियों का निर्माण कैल्शियम, प्रोटीन और खनिज तत्वों से मिलकर होता है। शरीर

Cottage cheese paneer firm or soft mass home or dairy product

के स्वस्थ और संतुलित विकास के लिए हर उम्र में कैल्शियम की जरूरत होती है। इसका अलावा शरीर में हड्डियों और दांतों की मजबूती और ब्लड सर्क्युलेशन यानी रक्त संचरण में भी कैल्शियम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शरीर में तंत्रिका तंत्र के संदेश को मस्तिष्क तक पहुंचाने के कार्य में भी कैल्शियम भूमिका होती है।


इसके अतिरिक्त शरीर में चोट, घाव आदि को जल्दी ठीक करने में सहायक होता है।
गर्भवती महिलाओं को हमेशा कैल्शियमयुक्त भोजन आदि खाने की सलाह दी जाती है। कैल्शियम की कमी माँ एवं
शिशु दोनों के लिए आवश्यक है। माँ के दूध में कैल्शियम की कमी से नवजात शिशु की हड्डियों के निर्माण में कमी आ जाती है। और तो और दूध का निर्माण पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पाता। इस कमी के कारण नवजात शिशु के दांत और हड्डियों में कमजोरी आने की आशंका बढ़ जाती है।
इसके अलावा कैल्शियम की कमी से और भी रोग होने लगते हैं। मांसपेशियों के कार्य के लिए कैल्शियम बहुत जरूरी है। इसकी कमी से मासिक धर्म में दर्द असहनीय रूप हे बढ़ जाता है।
इसकी कमी से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है।
हड्डियों में कमजोरी आने के कारण हल्की चोट से ही फ्रैक्चर है। इस रोग को

ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं।
दांत पीले और कमजोर हो जाते हैं। और समय से पहले टूटने लगते हैं।
पाचन क्रिया प्रभावित हो जाती है, जिसकी वजह से शरीर को सुचारु मात्रा में पोषण नहीं मिल पाता।
नाखून कमजोर होने लगते हैं, व नाखूनों पर सफेद निशान पड़ने लगते हैं।
कैल्शियम शरीर में ब्लड सर्कुलेशन में मदद करता है, इसकी कमी से धड़कन बढ़ना व बेचैनी होने लगती है।
कैल्शियम की पूर्ति के लिए क्या लिया जाये –
सब्जियों में पालक, मेथी, फूलगोभी, अरबी, टमाटर, ब्रोकली, कद्दू, गाजर, शलजम आदि में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है।
कैल्शियम का सबसे अच्छा सोर्स दूध को माना जाता है। इसलिए कहा भी जाता है कि नियमित रूप से दूध का सेवन करना चाहिए। एक गिलास दूध में करीब 300 ग्राम कैल्शियम होता है। अगर दूध स्किप हुआ तो समझ सकते हैं कि
शरीर में कितने कैल्शियम की कमी हो जाएगी। दांतों के टूटने या गिरने, हड्डियों के कमजोर होने का कारण कैल्शियम की कमी ही है।
दूध से बने उत्पाद जैसे कि पनीर और दही में भी खूब कैल्शियम पाया जाता है इसलिए नियमित रूप से इन्हें भी अपने खाने में शामिल करें। दही से ना सिर्फ कैल्शियम मिलता है बल्कि यह हमारे शरीर को इन्फेक्शन से भी बचाती है।
पनीर में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है।
चीज (cheese) भी कैल्शियम से भरपूर होती है, इसलिए इसे रोजाना खाएं, लेकिन ध्यान रहे इसकी मात्रा सीमित रखें वरना चर्बी बढ़ सकती है।
अंजीर को भी कैल्शियम का अच्छा सोर्स माना जाता है। इसके नियमित सेवन से हड्डियों से संबंधित बीमारियां तो दूर भागती ही हैं साथ ही यह हड्डियों का विकास भी करता है। दरअसल अंजीर में Phosphorus भी होता है और यही तत्व हड्डियों का विकास करता है।
शायद ही लोग जानते हों लेकिन तिल में काफी अच्छी मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है। कैल्शियम में प्रोटीन भी होता है।
गेहूं, बाजरा, मून, मोठ, सोयाबीन, राजमा और काला चना में इसकी मात्रा पायी जाती है।
बादाम कैल्शियम काअच्छा सोर्स है। बादाम सिर्फ दिमाग को ही तेज नहीं करता बल्कि हड्डियों और दांतों को भी मजबूत बनाता है और मांसपेशियों को भी तंदरुस्त रखता है।
कीवी, नारियल, आम, जायफल, अनानास और सीताफल में खूब कैल्शियम होता है।
इसके अतिरिक्त मुनक्का, तरबूज के बीच, पिस्ता और अखरोट कैल्शियम से भरपूर ड्राय फ्रूट हैं।
सोयाबीन को भला कैसे भूला जा सकता है। सोयाबीन में दूध के बराबर ही कैल्शियम होता है इसलिए इसे दूध के विकल्प के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है यानि जो लोग दूध नहीं पीते अगर वो रोजाना सोयाबीन का सेवन करें तो उनकी हड्डियां कमजोर नहीं होंगी।
फलों में पाइन एप्पल, कीवी, पपीता, ऑरेंज, लीची और चेरी में इसकी मात्रा पाई जाती है।
संतरा और आंवला भी calcium rich foods हैं। इनमें मौजूद तत्व ना सिर्फ हड्डियों को मजबूत बनाते हैं बल्कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।
यहां ध्यान रखने वाली बात है कि बाजार से कैल्शियम की गोलियां डॉक्टर की सलाह की बिना न लें, क्योंकि इसकी ज्यादा मात्रा से स्वास्थ्य को हानि पहुंच सकती है। हाँ प्राकृतिक रूप से खाद्य पदार्थ लेने से मिलने वाला कैल्शियम शरीर को नुकसान नहीं होता।

चेहरे की रौनक रहेगी बरकरार …..


बारिश का मौसम है, ऐसे में जाहिर है बदलते मौसम में त्वचा की देखभाल भी जरूरी है।
इसके लिए आप घर की किचन में ही उपलब्ध चीजों से कुछ फेस पैक और मास्क लगाकर


चेहरे के निखार को बरकरार रख सकते हैं।
मानसून के मौसम में कभी रिमझिम फुहार तो कभी धूप बारिश के बदलते मिजाज का सबसे
ज्यादा असर हमारी त्वचा पर पड़ता है। ये तैलीय या चिपचिपी सी होने लगती है। ऐसे में फेस पैक और फेस मास्क त्वचा को सुरक्षित और पहले से भी ज्यादा चमकदार बना सकते हैं। लेकिन इसे आजमाने से पहले इनमें फर्क समझना जरूरी है। अपने चेहरे की जरूरत व फायदे को देखते हुए चुनें।
फेस पैक और मास्क में अंतर् :
अपने चेहरे की अशुद्धियों को निकलने के लिए फेस पैक लगाएं, ये नॉन सेटिंग मास्क की श्रेणी में आता है। नॉन सेटिंग मास्क को लम्बे समय तक लगाने की जरूरत नहीं होती है। यदि तुरंत रिजल्ट देखना चाहते हैं, तो फेस पैक लगाएं। फेस पैक को १५ – २० मिनट तक लगाकर धो लिया जाता है। फेस पैक त्वचा पर उभरे निशान और दागों पर अच्छा काम करता है, जिससे रक्त- परवाह रूप से सुचारु होता है। यूँ इसे रोज भी लगा सकते हैं।
डेड स्किन निकालने के लिए फेस मास्क लगाएं। फेस मास्क सेटिंग मास्क की श्रेणी में आता

है। सेटिंग मास्क का मतलब है, जिसे जिसे त्वचा पर सेट होने में समय लगता है। हाँ यदि समय की कमी नहीं है तो फेस मास्क लगाएं, जिसको चेहरे पर सेट होने के बाद पील यानि धीमे – धीमे खींचकर निकला जाता है। फेस मास्क त्वचा में खिंचाव लाता है। झुर्रियों को कम करता है।
फेस पैक और मास्क बनाने की विधि :
गुलाब जल और मलाई पैक – मलाई में गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बनाकर तैयार कर लें। अब इसे चेहरे पर लगाकर मसाज करें, और ५ मिनट के बाद पानी से धो लें।
दूध और हल्दी पैक – तीन चम्मच कच्चे दूध में थोड़ा सा आटे का चोकर और चुटकीभर मिलाकर पेस्ट बना लें, और चेहरे पर लगाने के बाद २० मिनट के लिए छोड़ दें, उसके उपरांत ठंडे पानी से धो लें।
बनाना मास्क – आधे पके हुए केले को मसल लें। अब इसमें एक चम्मच दूध, एक बड़ा चम्मच चंदन -पाउडर और एक बड़ा चम्मच शहद मिला लें। अब इसको चेहरे पर लगाने के २५ मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें।
दही पपीता मास्क -पपीते और खीरे के गूदे में दही मिला लें, और इसमें जौं का आटा और कुछ बूंदें निम्बू के रस की मिला लें। अब इस मिश्रण को चेहरे पर आधे घंटे तक लगाने के बाद धो लें।
इन उपरोक्त कार्यों के करने के बाद आपकी त्वचा स्वस्थ व चमकदार बनेगी।

गुरु पूर्णिमा पर्व पर विशेष


गुरु पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – 01:48 बजे (16 जुलाई 2019) से
गुरु पूर्णिमा तिथि समाप्त – 03:07 बजे (17 जुलाई 2019) तक

आज 16 जुलाई आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। कहते है कि इसी पूर्णिमा पर महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। यही वजह है कि इनकी जयंती के कारण ही गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। वेद व्यास जी को वेदों का ज्ञान था। इसलिए उनका नाम वेदव्यास पड़ा। महाभारत जैसे श्रेष्ठ ग्रंथ की रचना भी उन्होंने ही की थी। इस दिन लोग अपने गुरू की पूजा करते है, गुरु शब्द का अभिप्राय है अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने वाला। आज के दिन गुरु की बड़ी महत्ता है, और उन्हें आदर-सम्मान के साथ कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। दरअसल गुरू के लिए कहा गया है, कि गुरु ब्रह्मा है, गुरु विष्णु है, गुरु ही शंकर है व गुरु ही साक्षात परब्रह्म है और उन्हीं सद्गुरु को हम प्रणाम करते हैं।
आपको बता दें कि पुराणों की कुल संख्या 18 है और उन सभी 18 पुराणों के रचयिता महर्षि वेदव्यास को माना जाता है। इन्होंने वेदों को विभाजित किया है, जिसके कारण इनका नाम वेदव्यास पड़ा था। वेदव्यास जी को आदिगुरु भी कहा जाता है इसलिए गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।