श्रावण मास


श्रावण मास चल रहा है। शिवजी का महीना है। लगभग कई भक्तगण अपने नजदीकी मंदिर में शिवलिंग पर श्रद्धापूर्वक दूध, जल, बेल पत्र आदि चढ़ाने जाते हैं। ये हमारी परम्परा है, हमारी संस्कृति है। मैं भी मानता हूँ। मुझे एक सज्जन शिव मंदिर में मिलते थे, वह

सज्जन शिव मंदिर में सुबह – सुबह लगभग साढ़े चार बजे मंदिर में शिवलिंग पर दूध, जल, बेल पत्र और सफेद चंदन का तिलक लगाया करते थे। मैं उनकी श्रद्धा के आगे नतमस्तक हो गया। फिर श्रावण मास की शिव रात्रि पर वो सज्जन पूरा चालीस लीटर का दूध का केन लेकर शिवलिंग पर चढ़ाते थे। हम मंदिर की परिक्रमा करते हुए पीछे बगीचे में देखा करते थे, शिवलिंग पर चढ़ाया गया दूध, जल आदि नालियों के जरिये आगे बड़े नाले में गिरता था। हम अपनी परिक्रमा करने के बाद वापस अपने घर जाने को निकलते थे, मंदिर के बाहर रोड पर भूख से बिलखते छोटे – छोटे बच्चों को गोद में लेकर माएं हाथ पसार कर भीख मांगते हुए मिलते थे। और दूसरी तरफ जिस दूध को शिवलिंग पर इस तरह बड़ी मात्रा में शिवलिंग के जरिये नालियों व नालों में बहाया जा रहा है। क्या हम दूध की थोड़ी मात्रा जल में मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाने की कोशिश करें …? कई मंदिरों में आमतौर पर शिवलिंग के ठीक ऊपर एक क्लश टंगा होता है, जिसके द्वारा शिवलिंग के ठीक ऊपर जलधारा बूंद – बूंद डलती रहती है। उसमें भी कुछ दूध, जल डाल सकते हैं। और बाकी बचे दूध को गरीब बच्चों के लिए भण्डारा, लंगर लगा दें। इससे दूध नालियों में भी नहीं जायेगा। गरीब बच्चों की दुआएं और पुण्य अलग मिलेगा। क्षमा करना, मेरा मकसद किसी की भी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। कुछ शुरुआत करें, दूसरों को भी प्रेरित करें। शिवजी की कृपा आप पर बनी रहेगी।

Advertisements

बॉलीवुड स्टार्स के अफेयर्स के चर्चे …


यूँ बॉलीवुड के एक्टर एक्ट्रेस के अफेयर्स, ब्रेकअप व शादी के चर्चे मीडिया में हमेशा से चर्चा का विषय रहें हैं, फेहरिस्त लम्बी है …
चौथी सीरीज :

बात जब अफेयर्स और उनके चर्चे की हो, तो बॉलीवुड के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना

जिनकी इमेज ही रोमांटिक हीरो की थी, उनकी उस समय की खबरें मीडिया में हमेशा सुर्ख़ियों में रही। उनको कैसे भूल सकते हैं ?
बॉलीवुड में 70 के दशक में जो पापुलैरिटी राजेश खन्ना को मिली, वो किसी को नहीं मिली।

राजेश खन्ना अंजू महेन्द्रू एक पार्टी में

वो बॉलीवुड के क्षितिज पर धूमकेतु की तरह चमकते हुए, चढ़ते समय सबको पीछे छोड़ गए थे। बॉलीवुड में अपने शुरुआत के दिनों में भी राजेश खन्ना सबसे महंगी कार में घूमा करते थे। उस जमाने के बड़े हीरो के पास भी वैसी कार नहीं थी। लड़कियों के बीच राजेश खन्ना

काफी पापुलर थे। राजेश खन्ना के बारे में ये कहा जाता है कि लड़कियां उन्हें खून
से खत लिखा करती थी, यही नहीं लड़कियां उनकी तस्वीर को अपने तकिये के नीचे रखकर सोती थी। जब किसी स्टूडियो या किसी निर्माता के दफ्तर के बाहर राजेश खन्ना की सफेद रंग की कार रुकती तो लड़कियां उस कार को ही चूम लेती थी। कहा जाता है कि लिपिस्टिक के निशान से उनकी सफेद रंग की कार गुलाबी हो जाया करती थी। राजेश खन्ना अपने फैंस

राजेश खन्ना, शर्मीला टैगोर और राखी

के बीच काका के नाम से मशहूर थे। उनके फैंस कहते थे ” ऊपर आका नीचे काका “।
उनके द्वारा पहने गए कुर्ते भी काफी फेमस हुए और कई लोगों ने तो उनके जैसे कुर्ते सिलवाने शुरू कर दिए। राजेश खन्ना की पापुलैरिटी का यह आलम था, कि वह जहां भी जाते

थे उनसे पहले उनके फैंस वहां पहुच जाते थे। उनके बारे में बात करते हुए शबाना आजमी ने कहा भी था, कि मैंने काका के साथ काम किया है, जो प्यार उन्हें अपने फैन्स से मिला, वैसा किसी को शायद ही मिला हो। उन्हें तो तीन पीढ़ियों का प्यार एक साथ मिला, उनके

फैन्स में छोटे बच्चे, युवा और बुजुर्ग माएं उनसे लिपट जाते थे।
राजेश खन्ना ने 1969 से 1975 के बीच आराधना, सच्चा झूठा, आनंद, कटी पतंग, सफर जैसी दर्जनों हिट फिल्मे दी। राजेश खन्ना की लगातार 17 फिल्में सुपरहिट हुई थी जो आज भी एक रिकॉर्ड है। फिल्म इंडस्ट्री के जितने भी सुपर हिट गाने हैं,वो राजेश खन्ना ने ही दिए। अपने ऊपर फिल्माए जाने वाले गानों की रिकॉर्डिंग के समय वो खुद रिकॉर्डिंग रूम में मौजूद होते थे। “आनंद ” राजेश खन्ना के करियर की बेस्ट फिल्म थी। मुमताज और शर्मिला टैगोर के साथ राजेश खन्ना की जोड़ी को काफी पसंद किया गया। मुमताज़ के साथ उन्होंने 8 सुपरहिट
फ़िल्में दी।
आइए जानते है राजेश खन्ना के अफेयर्स के बारे में :
अंजू महेन्द्रू से उनका अफेयर स्ट्रगल के समय से था, जो पूरे सात साल तक रहा। लेकिन इनमे कुछ कारणों से अनबन होने की वजह से दूर हो गए। राजेश खन्ना का कैरियर उस समय तेजी से आगे बढ़ रहा था। अचानक उस दौर के सुपरस्टार राजेश ने कमसिन डिम्पल के आगे शादी का प्रस्ताव रख दिया, उन दिनों डिम्पल राज कपूर की फिल्म बॉबी की शूटिंग कर रही थी। एक सुपर स्टार का शादी का प्रस्ताव डिम्पल ठुकरा नहीं पाईं। अचानक हुई शादी के वक्त डिम्पल की उम्र राजेश से लगभग आधी थी। डिम्पल कपाड़िया से शादी की खबरे सारे मीडिया में हैड लाइन की सुर्खियां बने हुए थे। और तो और राजेश की बारात भी उनकी पूर्व गर्ल फ्रैंड अंजू महेन्द्रू के घर के सामने से निकली। उसके बाद डिम्पल ने ‘बॉबी’ फ़िल्म से सनसनी फैला दी थी। डिम्पल से शादी के बाद मुमताज़ ने भी लंदन के कारोबारी मयूर माधवानी ने शादी करके फिल्मों से सन्यास ले लिया। इस तरह हिंदी फिल्मों की सुपर

राजेश खन्ना टीना मुनीम

जोड़ी टूट गयी। राजेश खन्ना डिम्पल के दो लड़कियां टविंकल और रिंकी हुई। लेकिन रोमांटिक तबियत के काका और डिम्पल के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। और कुछ सालों के बाद डिम्पल उनसे अलग रहने चली गयी। काका अकेले रहने लगे थे। इस बीच
सावन कुमार ने काका के साथ टीना मुनीम को लेकर सौतन फिल्म बनाने की घोषणा की। मारीशस में फिल्म की शूटिंग के दौरान काका और टीना मुनीम रोमांस करते – करते एक दूसरे के प्यार में खो गए। सौतन फिल्म रिलीज होने के बाद सुपर हिट साबित हुई। काका और टीना मुनीम ने इस फिल्म के बाद दस से ज्यादा फ़िल्में साथ में करी। टीना मुनीम काका के बंगले आशीर्वाद में रहने लगी। काका के अनुसार टीना और काका एक ही टूथ ब्रश इस्तेमाल करते थे। और बाद में टीना ने काका के ऊपर शादी का दबाव बनाना शुरू कर दिया, लेकिन काका ने डिम्पल से तलाक न होने की वजह से शादी करने से मना कर दिया। आखिर काका के प्यार में डूबी हुई टीना ने बेमन से काका से अलग होने का फैसला किया। हालाँकि काका ने टीना को रुकने के लिए मनाने की कोशिश भी करी। लेकिन इन दोनों के बीच शादी बड़ा इश्यू बन चुकी थी। इसके बाद टीना मुनीम ओर संजय दत्त रॉकी मेरा नाम फिल्म से नजदीक आये। लेकिन संजय दत्त ड्रग्स के आदी हो चुके थे। टीना फिर से कॉलेज

राजेश खन्ना अनीता आडवाणी

जाने के लिए कुछ समय के लिए कैलिफोर्निया चली गई। 1992 में उन्होंने अनिल अंबानी से

शादी की। राजेश ने फिल्मों में काम करना जारी रखा, लेकिन वो पुराना रुतबा हासिल नहीं कर पाए। और बाद के वर्षों में कुछ महिलाओं से भी जुड़ा। उनमें से एक अनीता आडवाणी थी। वह काका के साथ आशीर्वाद में रहती थी। लेकिन काका की तबियत धीरे – धीरे खराब होने लगी थी। और जीवन के अंतिम चरण में वो कैंसर से जूझते हुए १८ जुलाई १९१२ में दुनिया को अलविदा कह गए।

उनके आनंद फिल्म के बोले गए डायलॉग ” आनंद कभी मरते नहीं, अमर हो जाते हैं। ” बाबू मोशाय जिंदगी बड़ी होनी चहिये लम्बी नहीं ” … इनके पॉपुलर डायलॉगस में से एक है।

बॉलीवुड स्टार्स के अफेयर्स के चर्चे …


यूँ बॉलीवुड के एक्टर एक्ट्रेस के अफेयर्स, ब्रेकअप व शादी के चर्चे मीडिया में हमेशा से चर्चा का विषय रहें हैं, फेहरिस्त लम्बी है …
तीसरी सीरीज —

बात जब प्यार की हो, उसके चर्चे की हो, तो मीना कुमारी जैसी खूबसूरत अदाकारा के बिना

मीना कुमारी

अधूरी ही मानी जाएगी। वो हमेशा चर्चा का केंद्र बिंदु रही। उनका जीवन किसी पहेली से कम नहीं था। संघर्ष उनके जीवन का पर्याय बन गया था। मीना कुमारी के अनुसार त्रासदी उनके जन्म लेने के समय से ही शुरू हो चुकी थी। उनके जन्म के समय उनके पिता के
पास डॉक्टर को देने के लिए पैसे तक नहीं थे। उसके पिता उनको लगभग हॉस्पिटल ही छोड़ आये थे, लेकिन कुछ घंटों बाद उसे घर ले आये।
एक मुस्लिम परिवार में जन्मी मीना कुमारी बचपन में बहुत शरारती थी। संगीतकार नौशाद तब उनके पड़ोसी हुआ करते थे। वह भी मीना कुमारी की शरारतों के गवाह रहे थे। मीना कुमारी को बचपन से फिल्मों में एक्टिंग करने का शोक था। पिता कठोर स्वभाव के थे। घर में वह पिता द्वारा प्रताड़ित भी रही। पिता अक्सर उसके साथ मारपीट करते थे। बाहर
कम ही ज्यादा जाने देते थे, वो भी जब जरूरी हुआ। कह सकते हैं घरेलू हिंसा की वो शिकार बनी थी। एक बार दादा मुनि अशोक कुमार ने कमाल अमरोही से उनकी मुलाकात

करवाई। वो इनकी सुंदरता के कायल हो गए। उन दिनों प्रसिद्ध फिल्म निर्माता निर्देशक कमाल अमरोही अपनी फिल्म के लिए लड़की की तलाश कर रहे थे। कमाल अमरोही ने मीना कुमारी को अपनी फिल्म के लिए साइन किया। फिल्म फ्लौर पर जाने लगी, तभी मीना कुमारी को एक भयानक कार एक्सीडेंट के कारण हॉस्पिटल में एडमिट होना पड़ा। बात 21 मई, 1951 की थी। मीना कुमारी को चार महीने तक अस्पताल में रहना पड़ा और कमाल नियमित रूप से हॉस्पिटल उनसे मिलने जाते, और उनके लिए मार्गदर्शक बने रहे। मीना कुमारी भी घर में अपने पिता से आजाद होना चाहती थी। वह कमाल से शादी करने
करना चाहती थी, ताकि पिता से छुटकारा मिल सके। मीना की हॉस्पिटल से छुट्टी होने के तुरंत बाद, दोनों के बीच रात-भर के फोन आने लगे। अनारकली के लिए मीना को साइन करने वाले कमाल की शुरुआत होने वाली थी, लेकिन फिल्म के निर्माता को एक बड़ा आर्थिक समस्या के कारण फिल्म बंद हो गई। लेकिन इस बीच मीना कुमारी (जो तब केवल 18 वर्ष की थी) ने 14 फरवरी, 1952 को कमाल अमरोही (34) से शादी की, जो मीना की बहन महालिया की मौजूदगी में एक गुप्त निकाह समारोह में हुई थी। कि कमाल पहले से ही एक विवाहित थे। और उनके पहले विवाह से तीन बच्चे थे। लेकिन जिस बंदिश, पाबंदियों से छुटकारा पाने के लिए मीना ने कमाल से निकाह किया था, लेकिन बाद में ऐसा नहीं हुआ। मीना कुमारी के अनुसार कमाल इतना कठोर था, कि वह मीना को शाम 6:30 बजे तक घर आने के लिए कहता था, उसके ड्रेसिंग रूम में किसी को भी जाने की परमिशन नहीं थी, उसे केवल कार में यात्रा करनी थी. जो कमाल ने उसे दी थी। यानी कि वो अपनी मर्जी से कहीं आ जा नहीं सकती थी, न किसी से मिल सकती थी। कथित तौर पर घरेलू हिंसा यहां भी शामिल थी। लेकिन बाद में धीरे – धीरे मीना कुमारी को फ़िल्में मिलने लगी। साहिब बीवी और गुलाम, परिणीता, फुट पाथ जैसी कई दिग्गज फिल्मों के कारण उनकी अपार प्रतिभा और सुपरस्टारडम भी मिला, लेकिन इस से परे, एक मीना कुमारी थी, जो एक दुखद प्रेम कहानी में घिरी थी। एक अफवाह के अनुसार कमाल मीना कुमारी के साथ मार – पीट भी करते थे।

मीना कुमारी ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री श्रेणी में चार फिल्मफेयर पुरस्कार जीते। वह 1954 में बैजू बावरा के लिए उद्घाटन फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार की प्राप्तकर्ता थीं और परिणीता के लिए दूसरे फिल्मफेयर पुरस्कार (1955) में लगातार जीत हासिल की थी। कुमारी ने 10 वें फिल्मफेयर अवार्ड्स (1963) में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का नामांकन प्राप्त कर इतिहास रच दिया और साहिब बीबी और गुलाम में अपने प्रदर्शन के लिए जीत हासिल की। [16] 13 वें फिल्मफेयर अवार्ड्स (1966) में, कुमारी ने काजल के लिए अपना अंतिम सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता। मीना कुमारी की सबसे बड़ी पहचान 50 और 60 के दशक में मौजूद भारतीय महिलाओं के संघर्ष को चित्रित करने की क्षमता थी। मीना कुमारी के ऑनस्क्रीन व्यक्तित्व को भारतीय फिल्म बिरादरी, जैसे कि मोहम्मद जहूर खय्याम और जावेद अख्तर द्वारा पारंपरिक भारतीय नारी का एक आदर्श उदाहरण बताया गया है। कमालअमरोही के निर्देशन में पाकीज़ा में सुनहरे दिल वाली एक भोली लड़की “साहिबान” का उनका चित्रण एक ऐतिहासिक, यादगार फिल्म बन गई।
फ़िल्मी कैरियर में स्टारडम मिलने के बाद उनका कारोबार के सिलसिले में लोगों मिलने के लिए भी बहुत सारे नियम, कायदे लागू कर दिए गए। मीना कुमारी की निरंतर निगरानी ने मीना कुमारी को उदास कर दिया। और आखिरकार 1964 में मीना-कुमारी ने कमाल अमरोही को तलाक दे दिया। लेकिन खुद डिप्रेशन में चली गयी। शराब का सहारा लेने लगी। फिल्म फूल और पत्थर में धर्मेंद्र को इनके साथ लिया गया। घर्मेंद्र उन दिनों फिल्म इंडस्ट्री में नए आये थे। इनका धर्मेंद्र में प्यार हो गया। लेकिन कुछ दिनों के बाद धर्मेंद्र से भी अलगाव हो गया। यानिकि कोई मीना कुमारी को सही मायने में ऐसा हमदर्द नहीं मिला, जो इन्हें संभाल सके, इन्हें दिल से प्यार कर सके। जो भी आया उन्होंने इनका शारीरिक शोषण करके चला गया। इस तरह मीना कुमारी पूरी जिंदगी अकेली ही रही। और शराब में डूबी रही। और महज 38 साल उम्र में इस बेदर्द दुनिया को अलविदा कह गयी।
मीना कुमारी के लिए “उसके कई आयाम थे – उसने कविता पढ़ी, साहित्यिक मित्र थे, उच्च जीवन की आकांक्षा की और एक शराबी थी”।
यह उनके ब्यक्तित्व का प्रभाव ही था, कि दिलीप कुमार जैसे दिग्गज कलाकार (दुखद राजा) ने उनके सामने अपने शांत रहने को मुश्किल पाया”। सेट पर मीना कुमारी के साथ काम करते समय राज कुमार अक्सर अपने डायलॉग तक भूल जाते थे। मधुबाला भी
मीना कुमारी की प्रशंसक थीं, और उन्होंने कहा: “उनके पास सबसे अनोखी आवाज़ है, जो किसी अन्य नायिका के पास नहीं है।” सत्यजीत रे जैसे विख्यात निर्माता, निर्देशक ने मीना कुमारी को “निस्संदेह उच्चतम कैलिबर की अभिनेत्री” के रूप में वर्णित किया।
अमिताभ बच्चन ने कहा “कोई – भी नहीं, कोई भी नहीं, कभी भी मीना कुमारी ने जिस तरह

धर्मेंद्र मीना कुमारी

से संवाद बोले .. कोई नहीं .. आज तक कोई नहीं .. और शायद कभी नहीं होगा”। संगीत निर्देशक नौशाद ने कहा कि “हिंदी फिल्म उद्योग महान अभिनेत्रियों का निर्माण कर सकता है, लेकिन मीना कुमारी कभी नहीं होगी” …मीना कुमारी ने मर्लिन मुनरो के साथ काफी सहानुभूति व्यक्त की, यह तथ्य कि मर्लिन के पति आर्थर मिलर की मीना के पति कमाल अमरोही के साथ कुछ समान समानताएं थीं, ने पहचान को करीब बना दिया। ऐसा कहा जाता है कि जीवन भर मीना कुमारी का फिल्मों के साथ प्रेम-घृणा का रिश्ता रहा।
कमाल अमरोही से वह इस कदर तंग थी कि कमाल ने मीना कुमारी की साइन की हुई फिल्म पाकीजा जिसे मीणा नहीं करना चाहती थी। कमाल के मीना कुमारी को ये बोलने पर कि तुम मेरी ये फिल्म कम्पलीट कर दो, मैं तुम्हें आजाद कर दूंगा। इसके बाद मीना कुमारी ने जैसे – तैसे फिल्म को कम्पलीट किया। इसके पीछे उनकी ये भी भावना थी कि फिल्म के साथ कई लोगों की रोजी – रोटी जुड़ी है। हालाँकि पाकीजा की शूटिंग मीना कुमारी ने बीच में ही छोड़ दी थी।
इस तरह मीना कुमारी जीवन भर छटपटाती रही। अपने प्यार के लिए भी …. !

धर्मेंद्र :

बात जब अफेयर्स और चर्चे की चल रही है, तो इससे हीमैन धर्मेंद्र कैसे अछूते रह सकते हैं।
धर्मेंद्र ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर अपनी बचपन की मुहब्बत का भी राज़ खोला है। धर्मेंद्र की एक कविता से पता चलता है, कि उनको पहली बार प्यार बचपन में हुआ था, जब वो छठी कक्षा में पढ़ते थे। लड़की का नाम हमीदा था, जो उनके स्कूल टीचर की बेटी थी और

धर्मेंद्र हेमामालिनी

आठवीं में पढ़ती थी। जिस उम्र में धर्मेंद्र को हमीदा से प्यार हुआ था, उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि यह मोहब्बत है। बस एक फीलिंग होती थी, जो उन्हें भीतर तक गुदगुदा जाती थी। कुछ साल बाद धर्मेंद्र को फ़िल्मों में काम करने का शौक चढ़ा और वो गांव छोड़कर मुंबई आ गये। दिल भी तेरा हम भी तेरे से धर्मेंद्र ने हिंदी सिनेमा में अपनी पारी शुरू की और कुछ ही समय में साठ और सत्तर के दशक के प्रमुख कलाकारों में शुमार हो गये। हेमा मालिनी के ज़िंदगी में आने से पहले मीना कुमारी से धर्मेंद्र के अफेयर के क़िस्से आज भी मशहूर हैं। धर्मेंद्र ने कुछ मौक़ों पर ख़ुद स्वीकार भी किया कि वो जो कुछ हैं, मीना कुमारी की वजह से हैं। धर्मेंद्र जिस समय अपना करियर शुरू कर रहे थे, बेहद खूबसूरत मीना कुमारी मोस्ट सीनियरऔरअदाकारा बन चुकी थीं। कहा यह जाता था कि कमाल अमरोही से अलग होने के बाद मीना धर्मेंद्र के क़रीब आ गयी थीं। फिल्म फूल और पत्थर में नवोदित धर्मेंद्र मीना कुमारी के साथ हीरो की भूमिका में थे। दोनों में प्रगाढ़ प्रेम संबंध बन गए थे। लेकिन उस समय के जानने वाले बताते हैं कि इनके ये संबंध कुछ महीनों ही चल पाए।
इसके बादपहले से विवाहित धर्मेंद्र और ड्रीम गर्ल की उपाधि से नवाजी गयी हेमा मालिनी की लव स्टोरी हर कोई जानता है। धर्मेंद्र और हेमा मालिनी के बीच ऐसा प्यार हुआ कि नज़ीर बन गया। यानि ये एक दूसरे के पर्याय बन गए थे। लैला मजनू और शीरी फरहाद की तरह आम बोलचाल में धर्मेंद्र हेमा मालिनी की मिसालें दी जाती थी। हालाँकि हेमामालिनी के माता – पिता धर्मेंद्र को पसंद नहीं करते थे। वह इनकी जोड़ी को प्रोफेशनल से ज्यादा कुछ नहीं मानते थे। वह धर्मेंद्र को पहले से विवाहित और शराबी मानते थे। इसके अलावा जितेंद्र भी हेमा को चाहते थे, और वो हेमा के पेरेंट्स की भी पसंद थे।
संजीव कुमार भी हेमा को चाहते थे। लेकिन शायद ये प्यार एक तरफा था।
1970 से 2011 तक धर्मेंद्र और हेमा मालिनी ने 33 फ़िल्मों में साथ काम किया है, जिनमें शोले, जुगनू, चरस, प्रतिज्ञा, सीता और गीता जैसी हिट फ़िल्में शामिल हैं। दोनों की पहली

धर्मेंद्र प्रकाश कौर

रिलीज़ फ़िल्म तुम हसीन मैं जवां है, जो 24 जुलाई 1970 को रिलीज़ हुई थी। भप्पी सोनी निर्देशित फ़िल्म को सचिन भौमिक ने लिखा था। धर्मेंद्र ने हेमा मालिनी के निर्देशन में 2011 में आयी फ़िल्म टेल मी ओ ख़ुदा में काम किया था, जो बेटी ईशा देओल के करियर को रिवाइव करने के लिए बनायी थी। हेमा के अनुसार मेरे पेरेंट्स धरम को लेकर कभी जिद्दी नहीं रहे। सुना गया कि एक दिन जितेंद्र और हेमा शादी करने वाले थे, मडंप भी तैयार था। लेकिन जैसे कि प्यार अँधा होता है, उधर धर्मेंद्र को जैसे ही खबर मिली वो जितेंद्र की मंगेतर शोभा सिप्पी, जिससे जितेंद्र की सगाई हो रखी थी, उसे लेकर वहां पहुंच गए। बस फिर क्या था, शादी रुक गयी। इसके बाद 21अगस्त 1979 को धर्मेंद्र ने धर्म और नाम परिवर्तित करके हेमा से निकाह किया था, ताकि उन्हें अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर को तलाक़ ना देना पड़े। उनके निकाहनामा में लिखा था- दिलावर ख़ान केवल कृष्ण (44 साल) 1,11,000 रुपये मेहर के साथ आयशा बी आर चक्रवर्ती (29 साल) को दो गवाहों की मौजूदगी में अपनी पत्नी स्वीकार करते हैं। हालाँकि धरम और हेमा की शादी को लेकर धरम के बच्चे खुश नहीं थे। ओर न ही उनकी पूर्व पत्नी प्रकाश कौर ने कभी धरम को इसके लिए माफ़ किया।
इन दोनों के अफेयर, चर्चे और विवाह में एक बात जो सबसे अच्छी रही ये विवाह अटूट और सफल रहा।

बॉलीवुड स्टार्स के अफेयर्स के चर्चे …


यूँ बॉलीवुड के एक्टर एक्ट्रेस के अफेयर्स, ब्रेकअप व शादी के चर्चे मीडिया में हमेशा से चर्चा का विषय रहें हैं, फेहरिस्त लम्बी है, कुछ बॉलीवुड स्टार्स के अफेयर्स के चर्चे …

दूसरी सीरीज —

गुरुदत्त :
वक़्त ने किया, क्या हसीन सितम, तुम ही ना तुम, हम ना रहे …

कभी भी गुरु दत्त को यह नहीं पता था, कि उनकी फिल्म का यही गीत उनकी असफल प्रेम कहानी और उनके जीवन की कड़वी सच्चाई को याद करने वाला नगमा बन जाएगा।
बॉलीवुड में सबसे अच्छे ब्यक्तित्व के स्वामी व प्रतिभा के धनी गुरुदत्त और गीता दत्त की

प्रेम कहानी दो प्रेमियों की सबसे दुखद और असामयिक मृत्यु एक प्रेम कहानी का अंत करती है।
भारतीय फिल्म उद्योग के सुनहरे दौर में, गुरुदत्त एक स्टार के रूप में उभरे। इस महान कलाकार ने अपनी प्रतिभा के दम पर प्रसिद्धि के शिखर को छुआ। उनके स्टारडम के समय में उनके फैन्स की संख्या अनगिनत थी। अपनी फिल्मों में स्क्रीन के पर्दे पर जटिल भावनाओं को अभिव्यक्त करने में उनका कोई सानी नहीं था। गुरुदत्त को पूरी दुनिया का प्यार मिला, लेकिन उसका प्यार नहीं मिला, जिसे वो दिल से चाहते थे। गुरुदत्त ने हिट

गुरुदत्त, गीता दत्त

फ़िल्ल्में इंडस्ट्री को दीं, जो अविस्मरणीय क्लासिक्स बन गईं। जिनमें से कुछ कागज़ के फूल, साहिब, बीवी और गुलाम और प्यासा शामिल थी। उस दौर की सबसे खूबसूरत, लोकप्रिय और बहुमुखी गायिकाओं में से एक, गीता रॉय, फिल्म बाजी की शूटिंग के दौरान गुरुदत्त से मिली जिसका निर्देशन गुरुदत्त कर रहे थे। गीता रॉय, फिल्म के निर्देशक, गुरुदत्त और संगीत निर्देशक, एसडी बर्मन ने ‘तकदीर से बिगड़ी हुई तक़दीर’ गीत रिकॉर्ड कर रही थीं। उन दिनों वह अपने हंसमुख व्यक्तित्व और मधुर आवाज से धूम मचा रही थी, उनकी मधुर सुरीली आवाज की प्रशंसकों में लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी गायिकाऐं भी शामिल थीं। गीता भी गुरुदत्त के निर्देशन और प्रतिभा की प्रशंसक थी। गुरुदत्त और गीता रॉय एक दूसरे को प्यार करने लगे। उस घटना के बारे में बात करते हुए, ललिता लाजमी
(गुरुदत्त की बहन) ने एक बार कहा था, कि अक्सर गुरुदत्त, गीता की तारीफों के पुल उनके

गीता दत्त

सामने बांधा करते थे। कैसे वो मधुर आवाज और सुंदरता की संगम थी। मैं तो बस उनके ऊपर मरा जा रहा हूँ। ऐसे ही लगभग तीन साल तक दोनों एक दूसरे के प्यार में मगन रहे। लेकिन गीता का परिवार कमाई के मामले में गीता के ऊपर निर्भर था। वह किसी भी हालत में गीता को खोना नहीं चाहते थे। लेकिन गुरुदत्त और गीता ने इसकी परवाह नहीं की।और 26 मई, 1953 को एक सादे समारोह में शादी के बंधन में बंध गए। शादी के बाद इनके तीन बच्चे हुए, तरुण दत्त, अरुण दत्त और नीना दत्त। गुरु दत्त और गीता दत्त दोनों एक दूसरे के प्यार में रमे थे। गीता दत्त के भाई मुकुल रॉय भी एक संगीतकार थे। उन्होंने गुरुदत्त की फ़िल्में

गुरुदत्त, वहीदा रहमान

बाजी, आर-पार, मिस्टर एंड मिसेज 55, सीआईडी, प्यासा और कागज़ के फूल, साहिब बीबी और गुलाम और बहारें फिर भी आएँगी, में बेहतरीन व सुपर हिट गाने दिए। इसके बाद गीता दत्त अपना ज्यादा समय परिवार को देने लगी। उधर गुरुदत्त भी अपने काम में ब्यस्त रहने लगे। और अपने परिवार के लिए समय नहीं दे पा रहे थे। 1950 तक गुरु दत्त के अभिनेत्री वहीदा रहमान के साथ रोमांस करने की खबरें आना शुरू हो गईं, जिसने गीता और उनके बच्चों को गुरुदत्त से दूर कर दिया। उनकी आर्थिक स्थिति धीरे – धीरे कमजोर होने लगी थी। और उन्हें अपना बंगला खाली करना पड़ा। जबकि गुरुदत्त किराए के फ्लैट में शिफ्ट हो गए, गीता अपने बच्चों के साथ अपने माता-पिता के यहाँ चली गई। अब इनमें जल्दी ही अहं की लड़ाई और भावना को चोट पहुंचने जैसे कई मुद्दे उठने
लगे। गीता दत्त अब ज्यादा ही परेशान रहने लगी थी। दोनों महान कलाकारों का 11 साल का विवाहित जीवन विवाह दांव पर था।
उधर गुरुदत्त भी अपने परिवार के टूटने और आर्थिक संकट से जूझने की वजह से तनाव में रहने लगे। नींद की गोलियां खाने लगे। गुरुदत्त अपने गम को भुलाने के लिए शराब का सहारा लेने लगे। आखिर 10 अक्टूबर 1964 को मात्र 39 वर्ष की उम्र में गुरुदत्त बॉम्बे के पेडर रोड में अपने किराये के अपार्टमेंट में बिस्तर पर मृत पाए गए। उनके बारे में बताया
गया कि उन्होंने नींद की गोलियों की ओवरडोज़ ली थी। इस तरह इस महान कलाकार के

के जीवन – प्रेम का अंत हो गया।

शत्रुघ्न सिन्हा :
बॉलीवुड में विलेन से हीरो बने शत्रुघ्न सिन्हा के साथ महज १९ वर्षीय रीना रॉय ने कालीचरण जैसी हिट मूवी दी। ये शत्रुघ्न सिन्हा की हीरो के रोल में पहली मूवी थी। जो उनके कॅरियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई। इसके बाद इस जोड़ी की विश्वनाथ हिट मूवी आयी। बस फिर क्या था, शत्रुघ्न सिन्हा और रीना रॉय की सफल जोड़ी ने कई हिट फ़िल्में दी। इनके

प्यार के चर्चे मीडिया में सुर्ख़ियों में आये। हालाँकि जहां रीना रॉय अभी महज १९ वर्ष की थी, और शत्रुघ्न सिन्हा उनसे ११ वर्ष बड़े थे। इस खूबसूरत अदाकारा को उन दिनों हर फिल्म

निर्माता अपनी फिल्म में लेना चाहता था। रीना रॉय ने 100 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया। रीना रॉय की माँ दोनों के अफेयर्स को लेकर नाखुश थी। और उन्होंने रीना रॉय को अपनी नाराजगी को लेकर सचेत भी किया। उधर शत्रुघ्न सिन्हा और पूनम की पहली मुलाकात फ्लाइट में हुई। शत्रुघ्न सिन्हा पूनम सिन्हा को दिल दे बैठे। वर्ष 1981 में उसके बाद अचानक मीडिया में खबर आयी, शत्रुघ्न सिन्हा पूनम से वैवाहिक बंधन में बंधे। इस खबर ने रीना रॉय सहित सभी को हैरान कर दिया था। हालाँकि उन दिनों दोनों ही उस समय अपने कॅरियर के चरम पर थे।
इसके बाद रीना रॉय ने अपने पुराने प्रेमी पाकिस्तान के प्रसिद्ध क्रिकेटर क्रिकेटर से शादी की। इनकी एक लड़की जिसका नाम ‘जन्नत’ हुई। हालाँकि मोहिसन के साथ रीना की वैवाहिक जिंदगी ज्यादा सफल नहीं हो पायी।आपसी मनमुटाव की वजह से रीना रॉय वापस
इंडिया आ गयी।

एक बात….!


जरूरी नहीं, कि जो व्यक्ति आपको ऊपर से सौम्य लगता है, बातें भी चिकनी-चुपड़ी यानी अच्छी-अच्छी करता है, हर पल आपके सामने बिछने को तैयार हो, ओर आगे -पीछे घूमता हो, वह दिल का भी अच्छा ओर सच्चा हमदर्द हो। याद रखना कोरे ओर कड़क व्यक्ति दिल के बेहद नरम ओर दरियादिली होते हैं। हाँ लेकिन दिखावटी नहीं होते।

बॉलीवुड स्टार्स के अफेयर्स के चर्चे …


पहली सीरीज …


यूँ बॉलीवुड के एक्टर एक्ट्रेस के अफेयर्स, ब्रेकअप व शादी के चर्चे मीडिया में हमेशा से चर्चा का विषय रहें हैं, फेहरिस्त लम्बी है, कुछ अफेयर्स ओर शादी के किस्सों को यहां जानते हैं।

राज कपूर :

“बरसात में तुमसे मिले हम हम से मिले तुम” ….. !

जी हाँ 1949 के दौर में ” बरसात ” फिल्म का गाना कौन भूल सकता है। ये गाना राज कपूर और नरगिस ने गाया था।
बात करते हैं, बॉलीवुड के सबसे बड़े शोमैन राज कपूर, जो कृष्णा कपूर जैसी पत्नी और 5 बच्चों के साथ एक शादीशुदा व्यक्ति होने के बावजूद, अपने समय की विभिन्न अभिनेत्रियों के

साथ उनके लिंक-अप से कोई बच नहीं पाया था। बला की सुंदर नरगिस पहले से ही सुपरस्टार थीं। और उन्होंने साथ में 8 सुपरहिट फिल्में दी। उसकी सुंदरता से चकित होकर, राज कपूर नरगिस को दिल दे बैठे। उसके बाद तो राज और नरगिस की जोड़ी की गूंज मीडिया में चर्चा का केंद्र बन गयी थी। लोग चटखारे लेकर दोनों की बातें करते, चटखारे लेकर किस्से सुनते।
राज कपूर ने आग (1948), बरसात (1949) और आवारा (1951) में नरगिस के साथ अभिनय किया। नरगिस राज कपूर की “इन-हाउस हीरोइन” थीं और आरके स्टूडियोज़ के प्रतीक में काफी अमर थीं। नरगिस और राज कपूर 16 साल तक पेशेवर और व्यक्तिगत रूप से लगातार साथी बने रहे। एक रिकॉर्ड के अनुसार, नरगिस राज के शादीशुदा होने के बावजूद, राज से शादी करने पर आमादा थीं, लेकिन यह कानूनी रूप से असंभव होने से राज शादी से मुकर गए। उसके बाद नरगिस ने राज कपूर से किनारा करना ही बेहतर समझा। चोरी चोरी (1956) आखिरी फिल्म थी, जो उन्होंने एक साथ की थी। नरगिस का राजकपूर के लिए प्यार ही था, कि फिल्म को सफल बनाने के लिए नरगिस ने उस जमाने में बिकिनी पहनी. रूस, चीन और अफ्रीकी देशों में भी फिल्म खूब चली।

इसके बाद जब नरगिस ने 1957 में महबूब खान की मदर इंडिया साइन की तो राजकपूर को बताया तक नहीं। मदर इंडिया की शूटिंग के दौरान सेट पर आग लग गई। सुनील दत्त इस फिल्म में नरगिस के बेटे की भूमिका निभा रहे थे।और सेट पर थे। उन्होंने अपनी जान पर खेलकर नरगिस को बचाया और दोनों में प्यार हो गया. मार्च, 1958 में दोनों की शादी हो गई। दोनों के तीन बच्चे हुए, संजय, प्रिया और नम्रता।
नरगिस के राज कपूर से अलग होने के बाद उनका नाम वैजयन्ती माला और जीनत अमान से भी जोड़ा गया। राज कपूर को नरगिस के साथ अपनी पहली मुलाकात जिंदगी भर याद

रही। इस असल किस्से को राजकपूर ने बॉबी फिल्म के एक सीन में हूबहू डिंपल कपाड़िया के ऊपर उतार दिया। दरअसल राज कपूर जब पहली बार नरगिस के घर गए थे, उस समय नरगिस घर में पकोड़े तल रही थी, उनके हाथ बेसन से सने थे, उन्होंने घर दरवाजा खोला, तो उनके मुंह पर बेसन लग गया था, उनकी वही भोली सूरत राज को भा गयी थी।
उसके बाद राजकपूर ज़ीनत अमान के ग्लैमर के ऐसे दीवाने हुए कि उन्होंने ज़ीनत को लेकर फिल्म ” सत्यम शिवम सुंदरम ” का निर्माण किया। इस फिल्म में राज ने जिस तरीके से ज़ीनत अमान के ग्लैमर को एक्सपोज़ किया ऐसा किसी निर्माता नहीं किया।
लेकिन राज उस दौर में जीवन के उत्तरार्ध में थे। कुछ समय के बाद अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गयी।

देव आनंद :
एक आकर्षक मुस्कान और एक ताजा चेहरे और चलने के ढीले – ढाले अंदाज वाले सदाबहार रोमांटिक हीरो देव आनंद को कौन भूल सकता है। उनके अफेयर के चर्चे भी

मीडिया में खूब सुर्ख़ियों में रहे। ये दौर 1945 का था। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि देव आनंद हमेशा महिलाओं से घिरे रहते थे। अपनी फिल्मों के लिए देव ने कई नए चेहरे अपनी फिल्मों में लांच किये। जैसे कि ज़ीनत अमान, तब्बू या टीना मुनीम जैसी चुलबुली लड़की।
अपने समय की खूबसूरत और हिट अभिनेत्री सुरैया के साथ हो या ज़ीनत अमान या कोई और।

देव आनंद रोमांस करने के मामले में कभी पीछे नहीं रहे। यहां पहले बात करते हैं सुरैया

देव आनंद और सुरैया

की। देव आनंद और सुरैया की प्रेम कहानी अपने समय की सबसे भावुक प्रेम गाथाओं में से एक थी, और एक दुर्भाग्यपूर्ण भी। देव आनंद और सुरैया शादी करना चाहते थे, और एक नया जीवन शुरू करना चाहते थे। इसमें कोई शक नहीं कि देव आनंद सुरैया लव स्टोरी जब दो धार्मिक कट्टरता के शिकार हो गई। सुरैय्या के अनुसार देव आनंद उनके साथ काम करने वाले पहले सुंदर और आकर्षक युवा एक्टर थे, जिनसे मुझे पहली नजर में ही प्यार हो गया। मैं तो पहले से फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित थी। मैं अच्छे मुकाम पर थी। फिल्म ” विद्या ” के सेट
देव मेरे सामने एक नया कलाकार था, और बेहद नर्वस था। खासकर रोमांटिक सीन में। हम धीरे – धीरे आपस में प्यार करने लगे। हमने साथ कई फिल्मों में काम किया। एक फिल्म शूटिंग के दौरान देव आनंद ने सुरैय्या को डूबने से बचा लिया। सुरैय्या ने देवआनंद को बोला, आज तो तुमने मुझे बचा लिया। इसके बाद देव ने सुरैय्या को बोला यदि आपका जीवन समाप्त हो जाता तो मेरा भी हो जाता। देव आनंद और सुरैय्या छुप – छुप कर सुरैय्या की छत पर मिलने लगे, घंटों एक साथ रहते। एक दिन देव आनंद और सुरैय्या के प्यार
और शादी की खबर सुरैय्या की नानी को लग गयी। नानी सख्त मिजाज की थी। बस फिर क्या था, सुरैय्या की कड़ी निगरानी की जाने लगी। नानी को हमारे प्यार करने पर इसीलिए भी एतराज था, कि देव हिन्दू हैं, जबकि मैं मुस्लिम। नानी रूढ़िवादी थी। इसके बाद देव ने सुर्रिया से कई बार मिलने का अनुरोध किया, लेकिन नानी की सख्ताई के आगे सुरैय्या देव के प्रति प्यार के मामले में ढीली पड़ गयी, उसे अपने कदम पीछे करने पड़े।
हालाँकि इससे पहले देव ने एक बार कहा था: “सुरैया की माँ हमेशा मेरी तरफ थीं,और हमें प्रोत्साहित करती थीं। लेकिन उनकी नानी मुझसे नफरत करती थीं।” वास्तव में, यह सुरैया की मां थी जिन्होंने हम दोनों के बीच आखिरी मुलाकात की व्यवस्था की थी। लेकिन देव आनंद थोड़ा आशंकित थे, और मीटिंग को एक षड्यंत्र होने का संदेह था, लेकिन वह फिर भी

देव और कल्पना


सुरैय्या से प्यार के कारण मिलने के लिए आगे बढ़ गए। उनके एक पुलिस अधिकारी मित्र तारा चंद ने उनकी जेब में पिस्तौल और कुछ मशालें साथ रखने का फैसला किया। उन्होंने किसी भी खतरे को भांपते हुए देव को अपनी ओर झांकने के लिए एक मशाल दी।
देव के अनुसार मैंने हमेशा सुरैया से कहा था कि केवल धर्म ही प्यार नहीं है। सामाजिक बाधाएं या परिवार आपके दिल को प्रभावित करते हैं। मैं तुम्हें बेइंतेहा प्यार करता हूँ। इस तरह एक भावनात्मक प्यार का अंत हो गया।
कुछ समय बाद देव आनंद अपने भावनात्मक बंधन से बाहर आ गए। एक दिन मोना सिंह ने

कल्पना कार्तिक को देव से उनकी अगली फिल्म “बाज़ी” जिसे देव के प्रोडक्शन हाउस नवकेतन द्वारा निर्मित पहली फिल्म थी, के लिए मिलाया। देव उन दिनों अपनी फिल्म के लिए लड़की की तलाश कर रहे थे। कल्पना कार्तिक की यह पहली मुंबई की यात्रा थी। कल्पना
एक सुंदर,चुलबुली, शरारती लड़की थी। इसके बाद देव और कल्पना ने कई हिट फ़िल्में दी। और आखिरकार “टैक्सी ड्राइवर” की शानदार सफलता के बाद, दोनों ने 1954 में एक गुप्त विवाह में शादी के बंधन में बंध गए। देव और कल्पना के एक लड़का और एक लड़की है।
1970 में, देव आनंद तब आने वाली फिल्म “हरे रामा, हरे कृष्णा” में अपनी बहन की भूमिका

निभाने के लिए एक लड़की की तलाश कर रहे थे। देव चाहते थे, कि लड़की दिखने में भारतीय हो, लेकिन पश्चिमी परवरिश के साथ, कोई ऐसी लड़की जो हर किस्म की ड्रैस पहनने से परहेज न करे। वह उस दौर में हिप्पियों की तरह रहन – सहन में ढलने वाली के रोल को शूट करने वाली हो। एक रात, देव ने अपने मित्र निर्देशक अमरजीत की एक पार्टी में भाग लिया। वहाँ देव को वह ज़ीनत अमान मिली जो “हरे राम, हरे कृष्णा” में उनकी बहन की भूमिका निभाने वाली थी, और जिसने तब मिस एशिया का खिताब जीता था। हरे राम, हरे कृष्णा एक बड़ी हिट फिल्म साबित हुई। जीनत अमान फिल्म में ” दम मारो दम ” की भूमिका में रातों-रात लाखों सिनेप्रेमियों के दिलों पर छ गयी। इसके बाद देव ने अपनी अगली फिल्म “हीरा पन्ना” में रोमांटिक लीड रोल में ज़ीनत को लिया। चूँकि देव ने ही ज़ीनत

को फिल्म इंडस्ट्री में इंट्रोड्यूस किया था। देव ज़ीनत के करीब आ गए। देव आनंद की शादी हुए १५ साल हो चुके थे, दो बच्चों के पिता बन चुके थे। फिर भी ज़ीनत को प्यार करने से अपने को रोक नहीं पा रह थे। हालांकि, ज़ीनत एक प्रोफेशनल आदत की थी। वह देव के प्यार में बंधने को तैयार नहीं थी। एक दिन देव ज़ीनत को शादी का प्रस्ताव देने के लिए घर से निकले, उन्हें ज़ीनत कहीं नहीं मिली, लेकिन तभी उन्हें किसी से मालूम चला कि ज़ीनत होटल ताज में है, फिर क्या था, देव वहीं पहुंच गए, जैसे ही उन्होंने होटल का दरवाजा खोला, ये क्या … ज़ीनत वहां राज कपूर के साथ बैठी थी। देव वहीं से उलटे पैर वापस लौट आये।
उसके बाद राज कपूर की अगली फिल्म का अनाउंस हुआ। ज़ीनत को राज कपूर नेअगली फिल्म “सत्यम शिवम सुंदरम” में लीड रोल के लिए साइन किया गया था। इस तरह ज़ीनत के राज के कैंप में जाने से देव नाराज होकर पीछे हटने को मजबूर हो गए।
इसके बाद देव ने अपनी नई फिल्म ” देश प्रदेश ” के लिए टीना मुनीम को इंट्रोड्यूस किया। फिल्म हिट हुई। लेकिन टीना और देव के बीच उम्र का बहुत गैप था। लिहाजा टीना मुनीम और देव ज्यादा नहीं नजदीक नहीं रहे।