आज की बात


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चाय के रंग अनेक ….


चाय पीने की परम्परा 2737 ईसा पूर्व की है, एक किंवदंती के अनुसार, चीनी सम्राट शेंनॉन्ग ने एक पौधे की सूखी पत्ती को प्रयोग के तौर पर गर्म पानी में उबालने के बाद पीया। उन्होंने पीने के बाद महसूस किया, कि उसके स्वाद में काफी फर्क आ गया। तब से, यह चाय पीने का चलन धीरे – धीरे दुनिया भर में फैल गया। उसके स्वाद में काफी फर्क आ गया। इसके बाद समय, समय पर इसको बनाने के तरीकों में बदलाव होते रहे। आज दुनिया भर के अलग – अलग देशों
में चाय के कप का आनंद लोग बड़े शौक से करते हैं।
आइये जानते हैं कैसी है, इन देशों में इनके बनाने का तरीका।
मोरक्को : पुदीना, हरी चाय की पत्ती और चीनी का एक सर्विंग सर्व, टूरेग चाय (जिसे मघरेबी पुदीना चाय भी कहा जाता है) का मिश्रण इस उत्तर अफ्रीकी देश में प्रथागत मिश्रण के तौर केतली के द्वारा सर्व करके मेहमानों को तीन बार परोसा जाता है। हर बार इस चाय का

मोरक्को चाय

स्वाद थोड़ा भिन्न होता है। कहावत के अनुसार: “पहले गिलास का स्वाद और खुश्बू कुछ हल्का होता है, दूसरे का स्वाद तीखा यानी स्ट्रांग होता है, और तीसरे का स्वाद उससे और तीखा और कड़वापन लिए होता है।

तिब्बत : तिब्बत की पारंपरिक चाय, पेमगुल काली चाय यानी सूप ‘ पो चै ‘ में याक का दूध, मक्खन और नमक को मिलाकर घंटों उबाला जाता है। यह सूप अपनी गुणवत्ता के अनुसार

तिब्बत की चाय

ऊंचाई वाले क्षेत्रों और ठंडी जलवायु में सुकून देने वाला होता है।

भारत : भारत यानी अपने देश में चाय के बागान क्षेत्र आसाम, दार्जिलिंग में बड़े पैमाने में चाय का उत्पादन होता है। और साथ ही चाय की खपत भी बहुत है। देश में चाय कई किस्मों

भारतीय चाय

के रूप में सेवन की जाती है। इनमें एक मसालेदार चाय जिसमें दालचीनी, अदरक, जायफल, लौंग, इलायची और काली मिर्च जैसे मसाले के साथ काली चाय की पत्तियों को मिलाते हैं। हालांकि अलग -अलग क्षेत्रीय इलाकों के व्यंजनों में अंतर भी है। यह मसालेदार

चाय देश में रोजाना की दिनचर्या का पारम्परिक हिस्सा है। बाजार में इसके अतिरिक्त घर आये मेहमानों के सामने पारम्परिक चायपत्ती को उबालकर उसमें दूध डालकर दी जाती है। इसके अलावा रेडीमेड ग्रीन टी आदि के पैकेट बाजार में उपलब्ध हैं। पुराने समय में लोग मिट्टी के कुल्हड़ में चाय पीना पसंद करते थे।

अर्जेंटीना : इस दक्षिण अमेरिकी राष्ट्र में येरबा मेट (स्पष्ट मा-त) है, जो एक जड़ी बूटी से बनी “चाय” है, जो अपने टाइटेनियम जड़ी बूटी से बनाई गई है। इसे यहां “देवताओं का पेय” भी

अर्जेंटीना चाय

कहा जाता है, यह अर्जेंटीना के जीवन का एक मुख्य पेय है। इसे गर्म और ठंडे दोनों तरह से ली जाती है। यह एक छोटे बर्तन या सूखे कैलाब्जा लौकी से तैयार किया जाता है, जिसमें से यह एक विशेष स्ट्रांग स्ट्रॉ के माध्यम से पिया जाता है जिसे बॉम्बिला कहा जाता है।

रूस : रूस में कई तरह की परम्परिक ग्रीन टी अलग – अलग उबालकर, बाद में मिक्स करके तैयार की जाती है। इसे मल्टी चैंबर पॉट में बनाया जाता है। इसे ‘ सनोवर ‘ कहा जाता है। एक चैंबर पानी के लिए होता है, दूसरा चाय ब्रू के लिए होता हैं

रसियन चाय

ब्रिटेन : यहां चाय पत्ती को पहले पानी में उबाला जाता है, यानि कि ब्लैक टी को अलग पोट में रखा जाता है। और दूध और शकर को

ब्रिटेन टी

अलग – अलग पोट में रखने के बाद चीनी मिट्टी यानी सेरामिक के कप में ब्लैक टी डालकर उसमें दूध और शकर डालकर सर्व किया जाता है।

ताइवान : यहां की बबल टी या पर्ल टी दुनियाभर में मशहूर हो चुकी है। इसे गर्म या ठंडे रूप में लिया जाता है। इस चाय की खासियत है कि इसे शकर की

ताइवान चाय

चाशनी में पकाये गए टैपियोका पर्ल्स के ऊपर डालकर सर्व किया जाता है। एक बार बबल टी पीने के बाद आपको फ्रैपुचिनो की जरूरत नहीं पड़ती।

पाकिस्तान : यहां उबलते हुए दूध में चाय पत्ती, शकर मसाले डालकर पी जाती है। बाद में गाड़ा होने के बाद सेरामिक कप में सर्व की जाती है। इसके अलावा भारत की

पाकिस्तान चाय

तरह उबलते पानी में चाय पत्ती को डालकर ऊपर दूध डालकर तैयार की जाती है।

हांगकांग : यहां की मशहूर आइस्ड मिल्क टी ‘ सिल्क स्टॉकिंग टी ‘ भी कहा जाता है। ऐसा इसीलिए कि चाय का रंग न्यूड स्टॉकिंग जैसा

हांगकांग – चाय

होता है। कड़क और ठंडी ब्लैक टी में आइस क्यूब डालकर सर्व की जाती है।

तुर्की : यहां की केय चाय मशहूर है। जिसे हर मील के साथ सर्व की जाती है। लेकिन इसमें दूध नहीं होता। शकर भी अलग से डाली जाती

तुर्की चाय

है। टू चैंबर पोट में ब्रू किया जाता है। अर्जेंटीना : यहां की विटामिन से भरपूर ग्रीन टी ‘ येरबा मेट ‘ बहुत मशहूर है। इसका सिग्नेचर स्मोकी फ्लेवर गर्म और ठंडे दोनों रूप में पीया जाता है।

चीन : यहां की पारंपरिक चीनी चाय गोंगफू चाय एक मशहूर चाय है। इसके अलावा ट्यूरेन, स्ट्रेनर्स, चिमटे,

चीनी चाय

चाय तौलिए, एक ब्रूइंग ट्रे और “खुशबू वाले कप” शामिल हैं, जो केवल सूँघने के लिए उपयोग किए जाते हैं। यहां का कड़वा काढ़ा भी लोग शौक से पीते हैं।

थाईलैंड : यहां की मशहूर आइस्ड मिल्क टी में कंडेंस्ड मिल्क और थाई टी होती है।

थाईलैंड की चाय

रसगुले की पो बारह ….!


नमकीन : भाई सुबह – सुबह कहाँ जा रहे हो ? लो, ये तो सुन ही नहीं रहा …..। पता नहीं आज रसगुले को हो क्या गया…? (बड़बड़ाने लगी), तभी रिपोर्टर वहां से गुजरता हुआ,

क्या बड़बड़ा रही है, अकेले ही। कुछ हमें भी तो पता चले …. आखिर बात क्या हुई ?
नमकीन : कुछ भी तो नहीं …। लो, इसे तो रिपोर्ट मिल गयी …न्यूज़ बनाने के लिए। ( मन में लगी फिर बड़बड़ाने )।
रिपोर्टर था, कि मान ही नहीं रहा,
रिपोर्टर : रसगुले की आदत है तो स्वाद के अनुसार, मीठी, नमकीन बहन कुछ तो बात हुई होगी …
नमकीन : बात …बात क्या, जो रसगुल्ला हमेशा मेरे साथ रहता था, अठखेलियां करता था,आज सुबह मुझे मिल गया।
बात तक नहीं करी मेरे साथ, और तो और मेरे को देखकर अपने चलने का अंदाज ही बदल

लिया। ऐसे चल रहा था, जैसे कोई भानुमति का पिटारा उसके हाथ लग गया हो।
रिपोर्टर : हूँ ….. शायद हो सकता है, कोई बात हुई हो तुम्हारे और उसके बीच में।
नमकीन : बात …..? कल अच्छा – भला मेरे साथ बैठकर गया।
रिपोर्टर : चल बहन, चलते हैं उसके पास। घर में मिल जायेगा। हमें भी तो कुछ पता चले,

आखिर चल क्या रहा है,
उसके दिमाग में ? पहुंच गए रसगुले के घर में, जैसे ही बैल बजाई, रसगुले ने दरवाजा खोलकर रिपोर्टर से हाथ मिलाया, उसके बाद जैसे ही मझे देखा, झट से अपना मुंह फेर लिया। मैं जैसे ही वापस जाने को मुड़ी,
अरे, कहां चली ….. रिपोर्टर मेरा हाथ पकड़ते हुए
नमकीन : देखा नहीं ? कैसे रसगुले ने मुझे देखकर अपना मुंह फेर लिया, ऐसे भी कोई करता है, अपने घर आये मेहमान से
रिपोर्टर : अंदर बैठकर बात करते हैं रसगुले के साथ, यही बात तो करने आये हैं। भाई

रसगुल्ला, क्या हाल हैं ?
रसगुल्ला : हाल क्या होने….. बढ़िया हैं एकदम।
नमकीन : नमकीन रिपोर्टर के कान में फिर बड़बड़ाने लगी, सुना ? कैसे बात कर रहा है, इसकी वाणी में कैसा घमंड है, और देखो …… आज
रिपोर्टर : रसगुल्ला भाई, एक बात तो बता, तेरी नमकीन बहन के साथ क्या बात हो गयी, जो तू इससे बात भी नहीं
कर रहा है। कुछ हमें भी तो पता चले।
रसगुल्ला : तैस में आकर बोलने लगा, मैंने सोच लिया है। अब ज्यादा किसी से बात नहीं करनी, और अपने से छोटे लोगों से तो बिलकुल नहीं।
अच्छा मैं चली, लाल – पीली होकर खड़ी हो गयी, नमकीन, जाने के लिए।
रिपोर्टर : सुनो… रुक भी जाओ, मैं जो साथ में आया हूँ ….. साथ चलेंगे।
नमकीन : अब में एक पल भी नहीं रुकूंगी यहां। पता नहीं इसे एक रात में अचानक क्या घमंड आ गया ?
रसगुले को देखा, वो न्यूज़ पेपर को ऐसे पढ़ रहा था, जैसे उसकी कोई लॉटरी निकली हो।
नमकीन : कुछ तो बात है इस न्यूज़ पेपर में, जो ये निगोड़ी रसगुल्ला इतना इतरा रहा है
तभी ….. अजी सुनते हो …. चाय ले जाओ, पत्नी बोली
रसगुल्ला : न्यूज़ पेपर को टेबल पर रखकर किचन में पहुंचा।
रिपोर्टर : न्यूज़ पेपर में ऐसी क्या खबर है, पेपर उठाकर पढ़ने लगा, ऒ … ये बात है
नमकीन का भी माथा ठनका। मैं भी देखूं ऐसी क्या खबर है ? समझ गया
रिपोर्टर : तुझे पता है ….. आज इसी रसगुले की खबर जो आयी
नमकीन : इसकी खबर ? तभी इसकी अचानक चाल – ढाल बदल गयी
रसगुल्ला : लो…. चाय पीओ पहले, चाय के कप टेबल पर रखते हुए बोला।
रिपोर्टर : चाय तो ठीक है, पी लेंगे, लेकिन एक बात बता, तेरी अचानक नमकीन से क्या बात हो गयी। ये टेंशन में है,
तूने उससे बात नहीं करी।
नमकीन : ये क्यों बोलेगा …..ये तो पहले ही अपनी खबर पढ़कर इतरा रहा है। आ जायेगा अपने आप कुछ दिनों बाद लाइन पर
रसगुल्ला : इतराने की तो बात ही है, मेरा इतिहास ही इतना पुराना है। मेरे चाहवान तो सभी हैं ही, बल्कि अब तो मेरे को लेकर बंगाल और उड़ीसा दोनों अपना दावा ठोंक रहे हैं
बंगाल कहता है कि 1868 में नवीनचन्द्र दास ने मुझे बनाया, बाद में उनके बेटे ने मेरी विरासत को आगे बढ़ाया, यहीं नहीं बंगाल में 14 नवम्बर को रसगुल्ला डे भी मनाया जाता है।
उधर उड़ीसा ने मेरे को लेकर अपना दावा किया है कि, 12 वीं सदी से ही मुझे भगवान जगन्नाथ के मंदिर में भोग के रूप में चढ़ाया जाता था। उड़ीसा में 30 जुलाई को रसगुल्ला दिवस के रूप में मनाया जाता है।
नमकीन : देखा ….. कहती थी न मैं। कोई बात .. तो है, जो यह भाव खा रहा है
रसगुल्ला : भाव खाने वाली तो बात ही है। तेरे पास है ? ऐसी कोई बात ….
नमकीन : अरे जा, जा … बड़ा आया भाव खाने वाला। कल मेरे ही पास बैठा था। आज सुबह न्यूज़ पेपर में जरा अपनी न्यूज़ क्या देख ली, अपना एटीट्यूड ही बदल लिया। याद कर

तेरे को खा – खाकर लोगों को शुगर भी होने लगी है। ब्याह – शादी जैसे फंक्शन में लोग तेरे पास आने से कतराने लगे हैं। मेरे को देख ….. सभी लोग स्वाद लेकर चटकारे लेकर खाते हैं।
रसगुल्ला ; चटकारे ? उनको जब मिर्च लगती है तो, मैं ही उनके मुंह में मिठास घोलकर जीभ को शांत करती हूँ।
रिपोर्टर : अच्छा ठीक है। आपस में लड़ाई न करो। तुम दोनों की अपनी – अपनी अहमियत है। चलो आपस में गले मिलो। अचानक रिपोर्टर ने रसगुले को देखा वो नमकीन को देखकर मंद – मंद मुस्कुरा रहा था।

पंडित जी से चर्चा….. !


बहुत दिनों से दिल कर रहा था, पंडित जी से मिलने, व कुछ चर्चा करने की। कहीं मुलाकात भी नहीं हुई थी। सोचा पंडित जी से सुबह ही मिलकर आते हैं। जानते हैं, आजकल की कुछ नई खबरों के बारे में, उनके विचारों को सुने, कई दिन भी तो गए थे। सो सुबह जल्दी

उठकर, नाश्ता आदि निपटाकर उनके घर जाने के लिए।

पंडित जी के घर जैसे ही बैल बजाई, वही हमेशा की तरह, कौन … अंदर से आवाज लगाते

हुए उनके लड़के ने गेट खोला, नमस्ते अंकल जी
नमस्ते … पंडित जी हैं ? आ जाइये, पंडित जी ड्राइंगरूम में लेटे हैं
हूँ …. पंडित जी तो हमेशा पेपर पढ़ते हुए मिलते थे, आज … मन में सोचते हुए ड्राइंगरूम में जैसे ही प्रवेश किया।
प्रणाम पंडित जी ….
आ गये , बच्चू …. कैसा है ? पंडित जी हमेशा की तरह बिना मुझे देखते हुए बोले …..
बस ठीक हूँ , आप बताएं कैसे हैं, सब ठीक हैं ?
हूँ … क्या खबर लाये हो ? पंडित जी साथ ही उठकर बैठ गए, साथ ही पास रखे पेपर को उठाकर देखने लगे। खबरें हमने क्या लानी थी। बहुत दिनों से मुलाकात नहीं हुई थी, आपसे। सोचा आज जरूर मिलकर आना है …
कहां से शुरू करूं, इसी उधेड़बुन में से बाहर निकलते हुए मैंने पूछा …
पंडित जी चुनाव भी खत्म हो चुके हैं, लेकिन अपने सिद्धू ने अपना मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है, और कैप्टन ने फटाफट स्वीकार भी कर लिया।
तो इसमें कौन से बड़ी बात हो गयी, मैंने तुझे पिछली बार भी कहा था, कि कैप्टन घाघ नेता है। वो अपने सामने किसी को टिकने नहीं देगा।
उधर कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस के विधायक बागी हो गए, हालाँकि उनको मनाने की कुमारस्वामी एंड कंपनी ने काफी कोशिशे भी करी थी, आखिर में सरकार गिर ही गयी। संसद में कांग्रेस और जेडीएस ने हंगामा भी किया था, फिर …
फिर क्या ? पंडित जी अपनी आदत के अनुसार तपाक से बीच में टोकते हुए बोले,उन्होंने यही कहा न कि भाजपा ने हमारी सरकार गिरा दी। सुन बच्चू …! एक कहावत है, ” जिसकी लाठी उसकी भैंस “, अब भाजपा वालों को सिखाया तो कांग्रेस वालों ने ही न। देख बच्चू। इंदिरा जब पीएम थी, तो उसने भी तो यही किया था। दूसरी पार्टियों की सरकारें उस समय गिरा देती थी। कांग्रेस के पी वी नरसिंहाराव के पीएम के कार्यकाल में अयोध्या
में 1992 में बाबरी मस्जिद का ढांचा गिरा दिया गया था, उन्होंने भाजपा की तीन राज्यों में सरकारें भंग कर दी थीं। अब कोई कांग्रेस से पूछे कि अयोध्या तो यूपी में था, वहां की सरकार बाबरी ढांचे की जिम्मेदार थी, बाकी सरकारों का क्या कसूर था।
लेकिन पंडित जी अब तो कर्नाटक में भाजपा के येदुरप्पा ने विश्वासमत भी प्राप्त कर लिया है। और इसके अलावा
कई जगह कांग्रेस और एनसीपी के कई नेता अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा ज्वाइन कर रहे हैं ….
तो इसमें कौन सी बड़ी बात है ? राजनीति में “आया राम गया राम ” का खेल पुरानी बात है। कभी सुना है ? किसी को डूबते हुए जहाज की सैर करते हुए।
और तूने देखा नहीं भाजपा में रामबिलास पासवान को। केंद्र में जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार 1999 में आयी थी, तो यही पासवान उस सरकार में संचार मंत्री थे। उसके बाद युपीए सरकार के दो कार्यकाल में मंत्री पद से नवाजे गए थे। उसके बाद पिछली बार मोदी सरकार की, अब मोदी सरकार की दूसरी पारी में भी मंत्री पद लिए बैठे हैं। इन्हीं के बारे में लालू यादव ने पिछले चुनावों में कहा भी था, कि पासवान तो मौसम वैज्ञानिक हैं। उसे पहले ही पता चल जाता है, कौन सी पार्टी की सरकार केंद्र में आएगी। बस फिर क्या, वो झट पलटी मार लेता है, और मंत्री पद पा ही लेता हैं।
मैं मन ही मन में सोच रहा था, पंडित जी हैं, आखिर हाजिर जवाब।
अच्छा पंडित जी आजकल यूपी में उन्नाव केस को लेकर योगी सरकार की बड़ी किरकिरी हो रही है। अब उस घटना के इतने दिनों बाद भाजपा ने घटना के आरोपी कुलदीप सेंगर को पार्टी से निकाला है। यदि पार्टी उसे पहले ही निकाल देती ….
एक बात सुन बच्चू, …. यही कुलदीप पहले सपा, बसपा से होकर ही भाजपा में आया है। और सभी राजनीतिक पार्टियां यही तो खेल खेल रही हैं। कोई पार्टी दूध की धुली हुई थोड़े ही है।
पंडित जी योगी सरकार की सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव केस को लेकर बड़ी खिंचाई भी लगाई।
एक बात सुन बच्चू, जब कभी देश में किसी भी सरकारों द्वारा संकट की घड़ी आती है, तो सुप्रीम कोर्ट को बीच में आना तो पड़ेगा।
अच्छा पंडित जी एक ताजी खबर ये भी आ रही है, कि मोदी सरकार जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबलों को ज्यादा संख्या में भेज रही है। कहीं इसके पीछे धारा 35 A हटाने की तैयारी तो नहीं …?
पंडित जी अपने सिर के बालों में हमेशा की तरह उँगलियाँ फेरते हुए मंद – मंद मुस्कुराने लगे, साथ ही अपनी घड़ी की सुईयों को दखने लगे।
मैं पंडित जी को ऐसी मुद्रा में पहले भी कई बार देख चुका था। समझ गया, उनकी यही मुस्कान अपने आप में न कुछ बोलते हुए भी बहुत कुछ बोल जाती है। मैंने पंडित जी से विदा होने में देर लगानी ठीक नहीं समझी।

आज की बात


संगत का ध्यान रखना
उतना ही जरूरी है
जितना, भूख लगने पर भोजन
याद रहे …. संगत हमारी खराब होगी
बदनाम माता – पिता और संस्कार होंगे।

बॉलीवुड स्टार्स के अफेयर्स के चर्चे …


यूँ बॉलीवुड के एक्टर एक्ट्रेस के अफेयर्स, ब्रेकअप व शादी के चर्चे मीडिया में हमेशा से चर्चा का विषय रहें हैं, फेहरिस्त लम्बी है, कुछ अफेयर्स ओर शादी के किस्सों को यहां जानते हैं।
छटी सीरीज :
बात अफेयर्स, प्यार और शादी के चर्चे की हो, तो साउथ के सुपर स्टार, बहुआयामी प्रतिभा व हैंडसम ब्यक्तित्व के धनी अभिनेता, स्क्रीन लेखक, निर्देशक, निर्माता, पार्श्व गायक और गीतकार और इसके अतिरिक्त आशिक मिजाज के कमल हासन इससे कैसे अछूते रह सकते हैं ?

कमल का जन्म 7 नवंबर 1954 को रामनाथपुरम, मद्रास राज्य में एक तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके माता-पिता डी। श्रीनिवासन (पिता) पेशे से वकील हैं और राजलक्ष्मी (माँ) हाउसवाइफ हैं। मद्रास से एजुकेटेड कमल अपने पिता द्वारा प्रोत्साहित किए

कमल हासन

जाने के कारण फिल्म और ललित कला की ओर आकर्षित हुए।1960 में, कमल हासन ने बाल कलाकार के रूप में कलाथुर कन्नम्मा के साथ तमिल फिल्मों में शुरुआत की। और बाद में बाल कलाकार के रूप में पांच और फिल्में कीं। कमल ने बाकायदा डांस की ट्रेनिंग ली।
कमल हासन यकीनन आज तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सितारे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है। कमल ने चार साल की उम्र में कलाथुर कन्नम्मा में अपने प्रदर्शन के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार (राष्ट्रपति स्वर्ण पदक) जीता। उनकी प्रोडक्शन कंपनी, राज कमल फिल्म्स इंटरनेशनल ने उनकी कई फिल्मों का निर्माण किया है। उन्होंने तमिल, मलयालम, हिंदी, तेलुगु में 200 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। चार राष्ट्रीय पुरस्कारों सहित और
100+ से अधिक पुरस्कार जीते। पुरस्कार: कालीमणि, पद्म श्री, पद्म भूषण, ऑर्ड्रे डेस आर्ट्स एट डेस लेट्रेस (शेवेलियर), फिल्मफेयर, विजय अवार्ड्स आदि। अभिनय के अलावा उन्होंने फिल्म कोरियोग्राफी, निर्देशन और निर्माण में भी काम किया। उनके प्रमुख निर्देशन में चाची 420, हे राम, विरुमांडी, विश्वरूपम आदि फिल्में हैं, जिन्हें 1990 में पद्म श्री पुरस्कार और भारत सरकार द्वारा 2014 में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
2017 में, कमल ने विजय टेलीविजन के साथ मिलकर ‘बिग बॉस तमिल’ शो की मेजबानी की। 1981 में कमल ने हिंदी सिनेमा में अपना डेब्यू प्रसाद प्रोडक्शन की एल वी प्रसाद द्वारा ” एक दूजे के लिए के लिए ” फिल्म से किया। इसे बालाचंदर द्वारा निर्देशित तेलुगू भाषा की फिल्म मारो की हिंदी रीमेक, जिसने उन्हें अपना पहला फिल्मफेयर अवार्ड हिंदी में पहली फिल्म के लिए दिया। इसमें इनके साथ अभिनेत्री रति अग्निहोत्री, जिसने इस फिल्म से अपना डेब्यू किया था। फिल्म से सभी गाने सुपर हिट थे।
कमल प्रमुख रूप से तमिल सिनेमा के पहले अभिनेता हैं, जिन्होंने 50 साल तक तमिल फिल्म इंडस्ट्री व बॉलीवुड में राज किया। विजय टेलीविज़न ने सम्मान के रूप में एक शो ‘कमल 50’ का आयोजन किया।
इतने प्रतिभाशाली होने के बावजूद कमल के अफेयर्स के चर्चे मीडिया में हमेशा सुर्ख़ियों में रहे। उनके जीवन में पांच खूबसूरत महिलाएं आयीं, जिनसे इनके संबंध रहे। लेकिन किसी एक से उनका वैवाहिक संबंध लम्बा व स्थिर नहीं रहा। उनके रिश्ते हमेशा मीडिया की चर्चा में रहे। वह पांच महिलाओं, अभिनेत्री श्रीविद्या, नर्तकी वाणी गणपति, अभिनेत्री सारिका, अभिनेत्री सिमरन बग्गा और गौतमी के साथ संबंध में रहे हैं। इन सभी महिलाओं में से, उन्होंने केवल वाणी और सारिका से शादी की। बाकी किसी न किसी कारण से टूटते चले गए। कमल की शादी की बात की जाये, तो दक्षिण की मशहूर खबूसूरत डांसर वाणी गणपति और बॉलीवुड की सफल अभिनेत्री, सारिका, जिन्होंने राजश्री की फिल्म “गीत जाता चल ” जैसी सुपर हिट फिल्म से हीरोइन के रूप में शुरुआत करी थी। इन दोनों के ही साथ कमल ने शादी करी थी। जो कि कुछ सालों के बाद संबंधों में किसी न किसी कारण से दरार आने के बाद टूट गए। इसके अलावा कमल के बारे में सभी जगह यही चर्चा थी, कि उनका शादी जैसे सामाजिक बंधन में कोई विश्वास नहीं है। वह ये बात अक्सर पार्टियों में अपने दोस्तों में भी कहा करते थे।
आइये उनके रिश्तों को जानते हैं।
1 श्री विद्या :

अभिनेता के रूप में कमल हासन ने 1975 में पहली तमिल हिट फिल्म बालाचंदर द्वारा निर्देशित फिल्म अपूर्व रवांगल में एक जिसमें कमल ने एक विद्रोही युवक की भूमिका निभाई थी, जो एक बड़ी महिला के प्यार में पड़ जाता है। उन्होंने अपना पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार एक दोषी स्कूल शिक्षक की भूमिका के शानदार अभिनय के लिए जीता। एक लोकप्रिय दक्षिण भारतीय अभिनेत्री श्रीविद्या इनके साथ फिल्म में अभिनेत्री थी।

कमल हासन, श्रीविद्या

अभिनेत्री श्रीविद्या कमल से दो साल बड़ी थीं। श्रीविद्या और कमल ने इसके बाद कई फिल्मों में काम किया। अपूर्व रवांगल फिल्म के निर्माण के अंत में 22 साल की श्रीविद्या को कमल से प्यार हो गया। लेकिन दोनों ने अपने अफेयर को हमेशा मीडिया व साथ के लोगों से छिपा कर रखा। दोनों ने इसके बारे में ज्यादा बात नहीं की। कमल, श्रीविद्या से शादी करने के मामले में बचते रहे।आखिर लिव – इन रिलेशनशिप में रहने के बाद कमल और श्रीविद्या का रिश्ता टूट गया।
इसके बाद श्रीविद्या ने 1976 में मलयालम फिल्मों में सहायक निर्देशक जॉर्ज थॉमस से शादी की, लेकिन 1980 में उनका तलाक हो गया। लंबी बीमारी के बाद 2006 में उनका निधन हो गया और सूत्रों के अनुसार कमल श्रीविद्या से तब मिले जब उनकी मृत्यु हो गई थी।
2 वाणी गणपति :

श्रीविद्या से रिश्ता तोड़ने के कुछ ही दिनों बाद, एक कॉमन फ्रैंड के जरिये कमल की मुलाकात उस समय दक्षिण की प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना वाणी गणपति से हुई। कमल वाणी की सुंदरता और कला के अद्भुत संगम के कायल हो गए। दोनों एक दूसरे से बेहद प्यार करते थे। हालाँकि कमल शादी में विश्वास नहीं करते थे। उधर वाणी

कमल हासन, वाणी गणपति

लिव – इन रिलेशनशिप में सहज नहीं थी, वो कमल से शादी करने लिए दबाव डालने लगी थी। बाद में कमल ने 1978 में वाणी गणपति से शादी की और अपने जीवन में एक आयाम स्थापित किया। शादी के बाद कमल और वाणी गणपति अपने-अपने काम में व्यस्त हो गए। दोनों के बीच सब ठीक चल रहा था। 1980 के दशक में कमल की मुलाकत बॉलीवुड अभिनेत्री सारिका से हुई। वो बॉलीवुड में अपना मुकाम बना चुकी थी। कमल और सारिका

के रोमांस की खबर जब वाणी के कानों तक पहुंची और उसके बाद दोनों अलग-अलग रहने लगे। इस अलगाव के कारण कमल सारिका के ज्यादा करीब आ गए। लिव – इन रिलेशनशिप में रहने की वजह से सारिका प्रेगनेंट हो गयी थी। इसकी खबर से कमल मुसीबत में फंस गए। जबकि कमल वाणी गणपति के साथ भी वैवाहिक बंधन में रह रहे थे। इस बीच सारिका ने 1986 में अपनी पहली बेटी श्रुति हासन को जन्म दिया। बस फिर क्या था, ये खबर सारे मीडिया में सुर्खियां बन गयी थी। लेकिन इन सबसे बेपरवाह कमल की इस खबर के बाद वाणी के साथ कमल के रिश्तों में दरार और चौड़ी होने की वजह से इनकी शादी खतरे में पड़ गई। आखिर बड़े क़ानूनी विवाद के बाद कमल और वाणी की शादी 10 साल के बाद 1988 में तलाक होने की वजह से खत्म हो गयी।
3 सारिका :

हालाँकि कमल सारिका के साथ अपने लिव-इन रिलेशनशिप में ही खुश था। लेकिन उनके बच्चे शादी के बिना हुए थे। मीडिया में उनकी बदनामी के चर्चे होने लगे थे। आखिर बाद में सामाजिक दबाव के रूप में कमल ने 1988 में अपनी पत्नी वाणी को तलाक दे दिया। 1991 में सारिका और कमल की एक और बेटी, अक्षरा हासन हुई। वाणी से तलाक के बाद कमल

कमल हासन, सारिका

ने बकायदा औपचारिक रूप से सारिका से 2004 में शादी कर ली। सारिका से शादी करने के बाद सारिका और कमल की एक और बेटी, अक्षरा हासन हुई। कमल और सारिका के बीच सब कुछ ठीक चल रहा था। यह भी चर्चा थी, कि अब कमल और सारिका की शादी

कमल हासन, श्रुति व अक्षरा हासन

उनकी लाइफ में अच्छी रहेगी। इनकी जोड़ी को सभी पसंद करते थे।
लेकिन कमल की जिंदगी में इश्क अभी रुका नहीं था, या यूँ भी कह सकते हैं कि आदत से मजबूर कमल अभी भी और महिलाओं के साथ संबंध बनाये हुए थे।
4 सिमरन बग्गा :
कमल 2000 के दशक की शुरुआत में लोकप्रिय तमिल अभिनेत्री सिमरन के साथ एक-दो फिल्मों में साथ आये। कमल और सिमरन फिल्म पम्माल के.संबंदम की शूटिंग के दौरान रोमांटिक सीन करते हुए काफी करीब हो गए थे। भले ही कमल वाणी से तलाकशुदा और सारिका से विवाहित थे। दोनों की उम्र में 22 साल का बड़ा अंतर भी था, लेकिन अपनी इश्क की आदत से मजबूर कमल को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। सिमरन के साथ कमल की फ़्लैंडरिंग के

कमल हासन, सिमरन बग्गा

तरीके पर सारिका परेशान हो गयी। चर्चा यही भी थी, कि सारिका ने आत्महत्या का भी प्रयास किया। और उसके बाद गंभीर डिप्रेशन में चली गई। हालाँकि, इस घटना के बाद सिमरन और कमल का रिश्ता कम ही चला, और सिमरन ने दूसरे व्यक्ति से शादी कर ली।
5 गौतमी :

जिस समय कमल सारिका से विवाहित होने के बावजूद भी सिमरन के नजदीक आ चुके थे, ठीक उसी समय कमल सारिका की बेस्ट फ्रैंड गौतमी के भी बहुत नजदीक आ चुके थे। गौतमी अपने पहले पति से हुई लड़की को साथ में रखती थी। सिमरन के जाने के बाद कमल और गौतमी लिव – इन रिलेशन में साथ रहने लगे। आखिर कुछ निजी कारणों से 1 नवंबर 2016 को, गौतमी ने कमल से अचानक अपने रिश्ते और उससे अलग होने के बारे

कमल हासन, गौतमी

में लिखकर अपने ब्लॉग में डाल दिया। ब्लॉग में लिखे अनुसार “आज मेरे लिए यह कहना हृदय विदारक है, कि मैं और श्री हासन अब साथ में नहीं हैं। पिछले लगभग 13 वर्षों के बाद, यह मेरे सबसे विनाशकारी निर्णयों में से एक है, जो मुझे अपने जीवन में करना पड़ा है। मुझे यह समझना होगा, इस स्तर पर खुद को स्थापित करने का यह निर्णय शायद सबसे कठिन निर्णयों में से एक है, जो किसी भी महिला को कभी भी करना होगा, लेकिन यह मेरे लिए
एक आवश्यक है। क्योंकि मैं सबसे पहले एक माँ हूँ, और मेरे पास अपने बच्चे के लिए एक जिम्मेदारी है, कि मैं सबसे अच्छी माँ बनूँ। ” ब्लॉग में गौतमी ने लिखा, कि मेरा यह निर्णय किसी की सहानुभूति प्राप्त करना नहीं है। मुझे निर्णय लेने में कुछ समय लगा। सत्य व एकांत को स्वीकार करना होगा। इस खबर के बाद 2004 में, सारिका ने कमल से अपने 16 साल लंबे रिश्ते को समाप्त करते हुए तलाक ले लिया। हालाँकि कमल के प्रशंसकों के लिए यह काफी झटका था। क्योंकि कमल और सारिका की जोड़ी व शादी को लेकर
निश्चिंत थे। बाद में खबर यह भी चर्चा में आयी, वास्तव में, गौतमी कैंसर से जूझ रही थी। गौतमी को कमल के साथ रहने के दौरान स्तन कैंसर हो गया था। लेकिन कमल गौतमी की मदद करने के लिए पूरी तरह उसके साथ खड़ा था।