कहीं आप ई सिगरेट या हुक्के के शौकीन तो नहीं…


ई-सिगरेट पीने वाले कहीं आप तो नहीं, या आधुनिक हुक्के के … यदि हाँ, तो हो जाएं सावधान….

कैंसर समेत कई रोगों के हो सकते हैं शिकार

आधुनिकता के पीछे दौड़ती आज की युवा पीढ़ी   ने स्मोकिंग का नया  विकल्प  ई-सिगरेट का इस्तेमाल करना शुरू कर  दिया है। आमतौर पर सिगरेट की लत छुड़ाने के लिए बाजार में आई  ई-सिगरेट युवाओं के बीच अब काफी पसंद की जा रही है, लेकिन  यह भी धूम्रपान की तरह  खतरनाक है।

ई सिगरेट यानि  इलेक्ट्रॉनिक इन्हेलर है, जिसमें निकोटीन और अन्य केमिकल मिश्रित  लिक्विड भरा जाता है। यूँ   धूम्रपान का ये नया  अवतार  ई-सिगरेट भी सेहत के लिए हानिकारक हो  सकती है।  एक रिसर्च के अनुसार, ई-सिगरेट में भी अस्थमा समेत ऐसी और  बीमारियों के कारक हो सकते हैं, जिनसे फेफड़े को खतरा होता है। एक  अध्ययन में अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ई-सिगरेटके 75 लोकप्रिय उत्पादों को शामिल किया। इनमें एक बार प्रयोग होने वाले और रीफिल किए जा सकने वाले उत्पाद  शामिल थे। अध्ययन

में 27 फीसद उत्पादों में एंडोटॉक्सिन पाया गया। यह एक माइक्रोबियल एजेंट है, जो ग्राम-नेगेटिव  बैक्टीरिया पर पाया जाता है । वहीं 81 फीसदी उत्पादों में ग्लूकन के कण पाए गए। अब ग्लूकन को भी समझ लेते हैं, ग्लूकन ज्यादातर

फंगस की कोशिकाओं  की दीवारों पर मिलता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ई-सिगरेट उत्पादों में इन तत्वों की उपस्थिति यह बताने की लिए पर्याप्त है,  कि इनके कारण भी अस्थमा और फेफड़े की अन्य बीमारियां हो सकती हैं

इसमें शामिल  केमिकल जानलेवा हैं, इसके दुष्प्रभावों से  लंग्स कैंसर और पॉपकॉन लंग्स का इसके इस्तेमाल करने वालों में खतरा तेजी से बढ़ रहा है। ई-सिगरेट के दुष्प्रभाव पर जीएसवीएम के रेस्पेरेटरी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. सुधीर चौधरी अध्ययन कर रहे हैं। उनके मुताबिक ई-सिगरेट युवक, युवतियां और गर्भवती भी इस्तेमाल कर रही हैं। इसका उत्पादन करने वाली कंपनी अपने बिजनेस  लाभ के लिए इसे हानिकारक नहीं बताते हैं जबकि यह सिगरेट के बराबर ही हानिकारक है।

ई-सिगरेट कैसे काम करती है : 

इन्हेलर बैट्री की ऊर्जा से इस लिक्विड को भाप में बदल देता है जिससे पीने वाले को सिगरेट पीने जैसा एहसास होता है। लेकिन ई-सिगरेट में जिस लिक्विड को भरा जाता है,  उसमें ज्यादातर  निकोटिन होता है और कई बार उससे भी ज्यादा खतरनाक केमिकल होते हैं।  इसलिए ई-सिगरेट को सेहत के लिहाज से बिल्कुल सुरक्षित नहीं माना जा सकता है।

यूँ  ई-सिगरेट का निर्माण  वर्ष 2003 में चीन में  हुआ था।  यह बैटरी से चलने वाला निकोटिन डिलीवरी का यंत्र है।

इसमें द्रव्य पदार्थ, जिसे भाप कहते हैं, को गर्म करने के बाद मुंह से खींचा जाता है। वैसे इसे यह सोचकर बनाया गया था,  कि बिना

टॉर या कार्बन के फेफड़े तक कम मात्रा में निकोटिन जाएगा। अपने बिजनेस  फायदे के लिए इसे बनाने वालों ने ऐसे तरीके अपनाये, जिससे अधिक मात्रा में निकोटिन फेफड़े में जाने लगा। ये  लिक्विड निकोटिन होता है। निकोटिन नशीला पदार्थ है इसलिए पीने वाले को इसकी लत लग जाती है। थोड़े दिन के ही

इसे इस्तेमाल करने  के बाद अगर पीने वाला इसे पीना बंद कर दे, तो उन्हें बेचैनी और उलझन की समस्या होने लगती है। निकोटिन दिल और सांस के मरीजों के लिए बिल्कुल सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। ई-सिगरेट के वेपर को गर्म करने के लिए क्वाइल का इस्तेमाल होता है। क्वाइल में निकोटिन, फार्मालडिहाइड, फेनाले, टिन, निकिल, कॉपर, लेड, क्रोमियम, आर्सेनिक एवं डाई एसेटाइल मेटल हैं।

इसके सेवन  करने वालो के फेफड़ों में पॉपकॉन जैसा उभर जाने के कारण इसे पॉपकॉन लंग्स कहते हैं। और बाद में कैंसर का शिकार हो जाते हैं।

कई लोगों में ये धारणा  है की इसमें तम्बाकू नहीं होता, लेकिन ये उनका भ्रम है, इसमें जो लिक्विड होता है, उसमें केमिकल मिश्रित निकोटिन होता है। और  समान्य सिगरेट के तम्बाकू में भी निकोटिन होता हे। 

आज लगभग बड़े शहरों में  ई-सिगरेट एवं हुक्का बार का चलन तेजी से बढ़ा है। हुक्का बार में फ्लेवर्ड ई-लिक्विड होता है जबकि ई-सिगरेट में केमिकल वेपर के रूप में होता है। दोनों में हानिकारक डाई एसिटाइल केमिकल (बटर -जैसा जो पॉपकॉन में मिलाते थे, अब प्रतिबंधित) होता है। इसके सेवन से फेफड़े में पॉपकॉन जैसा उभरने पर पॉपकॉन लंग्स कहते हैं। इस बीमारी को ब्रांक्योलाइटिस आब्लिट्रेंन कहा जाता है। इसमें फेफड़ों की छोटी श्वांस नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जो आगे चलकर आइएलडी में परिवर्तित हो जाती है। इसकी चपेट में आकर युवा एवं महिलाएं तेजी से फेफड़े की बीमारी का शिकार हो रहे हैं। याद  रहे किसी भी ब्यसन का परिणाम हमेशा खतरनाक होता है। और यदि आप एक बार इसकी गिरफ्त  में आ गए, तो इससे बाहर निकलने में बहुत मुश्किल हो सकती है।

आज अपने भविष्य को सुरक्षित और स्वस्थ बनाने  के लिए इसकी गिरफ्त में आ चुके युवा पीढ़ी  को चहिये कि, इससे जितनी जल्दी हो सके बाहर निकलें।

Persona …. ‘J Manjula,’ Female Scientist


J  Manjula, the country’s first woman director general in DRDO

She is the first woman director general of the DRDO cluster. Many of her work is already being done by Indian Defense

The various weapons of the establishments are included.

Today the three Armies of the country, using their built jammer and controller software successfully has been. J  Manjula honored with the Scientist the Year award in 2011 for this achievement in DRDO Was awarded  She was born in 1962 in the Reddy cast of Nellore district Andhra Pradesh. andat that time, girls did not pay much attention to education. Her  father, Principal in a high school And he used to understand the importance of education. He read of J  Manjula being inspired by them motivated them. J  Manjula was interested in mathematics only to start with. She mathematics curry on his own efforts, because her  parents could not teach him mathematics.

J. Manjula has a degree in Engineering from Osmania University with electronics and communication stream Lee

She was made the first woman director general of DRDO in 1987. But before that electronics worked for the Corporation Warfare, in which he spent almost 26 years in Defense Electronics Research Lab, Working in Hyderabad only Apart from jammer, many other tools made by them are available in the country. Armies are being used successfully in the Army, Navy and Air Force etc. Becoming the Director General of DRDO

Prior to that, she was providing her services at the Defense Avionics Research Establishment DARE.

Today the country is proud of J Manjula.

शख्सियत …. ‘ जे मंजुला,’ महिला वैज्ञानिक


जे मंजुला डीआरडीओ में  देश की पहली महिला डायरेक्टर जनरल।

वह डीआरडीओ क्लस्टर की पहली महिला महानिदेशक हैं।उनके कई कार्य पहले से ही भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों के विभिन्न हथियारों में शामिल हैं।

आज देश की तीनों सेनाएं इनके बनाये जैमर और कंट्रोलर सॉफ्टवेयर को सफलतापूर्वक उपयोग कर रही है। जे मंजुला को इस उपलब्धि के लिए २०११ में  डीआरडीओ में साइंटिस्ट  द ईयर सम्मान से नवाजा गया। इनका  जन्म १९६२ में  नेल्लोर जिला आंध्र प्रदेश की प्रमुख रेड्डी जाति में हुआ। तथा

उस दौर में लड़कियों की शिक्षा पर ज्यादा तवज्जो नहीं देते थे। इनके पिता एक हाई स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर थे।, और वह  पढ़ाई की अहमियत को भली – भांति समझते थे। उन्होंने जे मंजुला की  पढ़ने  में रूचि होने के कारण उन्हें प्रेरित किया। जे  मंजुला की रूचि गणित पड़ने में शरू से ही थी। उन्होने गणित की पढ़ाई अपनी कोशिशों के दम  पर करी,  क्योंकि उनके माता – पिता उनको गणित नहीं पढ़ा सकते थे।

जे मंजुला ने इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार स्ट्रीम के साथ उस्मानिया विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की डिग्री ली।

सन १९८७ में डीआरडीओ में उन्हें पहली महिला महानिदेशक बनाया गया। लेकिन इससे पहले वे इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन वॉरफेअर के लिए भी काम कियका, जिसमें करीब 26 साल तक वे डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च लैब,

हैदराबाद में ही काम  करती रही। जैमर के अलावा इनके द्वारा तैयार किये कई अन्य उपकरण देश की तीनो सेनाएं थलसेना, नौसेना व वायुसेना आदि में सफलता से उपयोग में आ रहे हैं। डीआरडीओ की महानिदेशक बनने

से पहले वे डिफेंस एविओनिक्स रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट डीएआरई  में अपनी सेवाएं दे रही थी। 

आज  देश  को  जे मंजुला   के ऊपर गर्व  है।

Something is not bothered by baldness …


If the hair is rapidly flowing, then it should be assumed that you are moving towards baldness.

Yes, if the reason for hair loss is known in time, then it will be treated faster …

If you are 30 years of age or older, and even the head of the elderly in the family is too much hairIf it is low or not, it is a genetic disease. It can also be called ancestral disease. And further Hair can also take you down to baldness. At the beginning, hair starts to fall, then it swings

The hair from around and goes around falling, which gradually leads you towards baldness. Now in Should we worry about its treatment? Probably will not be in the answer, because of the above-mentioned ancestral reasons due to the treatment is not suitable. Yes you can grow hair by hair transplant in such a place of baldness. But this is an expensive solution. And in many cases it has been seen that it does not succeed.

  So the beginning of baldness begins when the number of hair loss falls from around 80 to also starts to grow too much. Well if the number of hair is from 80 to 100, then according to the doctor it is normal Be thought. Because they are replaced by new-grown hair. If the number of new growing hair fall

If the number of hair starts decreasing, the thickness of the hair starts decreasing. And front forehead on women’s head

The hair starts to diminish, and this is why they look bigger in their forehead. Now thinking

The thing is, if there is no problem of ancestral disease in your family, even then your hair is rapidly flowing, then its

The gesture indicates another disturbance, and this disturbance is somewhere else. Due to which its direct on the hair The effect is falling. Now by recognizing this sign you can get out of the problem of hair. See more It is a matter of fact, these problems of hair loss are in women, in addition to men. But one thing needs to be noticed.

There is every reason that hair loss can have different causes. Generally due to hair loss

Dermatologists detect these causes after clinical examination. Hair with skin sometimes occasionally Folicular biopsy or blood tests may be necessary.

Well now know what else can be the reason for hair fall apart from ancestral …

Alopecia arita: In the baldness caused by this disease, hair fall in a round patch. This kind of baldness

Can be in any edge. This occurs when body antibodies against the folicus of their own body hair It starts to start working. This is called Auto Emium Cause. Egestion of steroids in Alopecia arita Once a month, the place where there is no hair is placed on the patch. And that place after a few months

But the hair grows back. But in many cases, it has not been affected. And these problems if children

If they are in, they are given an injection instead of injection. They have to spend for a few months.

Incorrect Lifestyle: The False Life of Today – Hair Loss due to Eating, Fast Food and Junk Food

Main reason is that. Due to the lack of essential nutrient iron, vitamin D, zinc for the body. Because hese elements are not found in these mines. Apart from the market – kind of shampoo and paraffin hair loss

There is a reason for the problem. And apart from nowadays – emotional and physical stress in the race life May also be the main cause of hair fall. So you should try the necessary nutrition, seasonal fruits and regular

Equivocalize and try to avoid stress. This can prevent hair loss by controlling it. And if

If needed, tablets of selenium, vitamin D, zinc etc supplements are also provided. Tonic separately Come also.

Some special diseases: Several reasons for long-term fever, liver and kidney disease are also related to hair loss.

The cause of the fall becomes. Hormones change in thyroid, anemia and women, the cause of hair lossit happens. Apart from this, a mental illness starts to snatch its hair in a disease like trikutilomania. And this problem is often in women. But due to proper treatment in these diseases hair loss is complete

Stops like And again the hair starts growing.

Wrong Hits: Sometimes the hair starts to fall as well as combs, such as pulling the hair, peeling etc.

Many people wash hair with warm oil, or more hot water, this causes hair follicles to get worse. Some people rub the hair frequently with fine comb, due to which the hair weakens and falls. Repeatedly

Do not change your hairstyle. Never rub the towel with the hair after washing the hair. Olives once a week in the hair

Apply oil and lemon.

Fungus or some other reason: Fungal infections also cause hair loss due to sweating, dermatitis and dandruff.

Are. Apart from this, many such medicines of epilepsy or chemotherapy are coming, due to which hair loss starts. If

The person is sick of epilepsy and if the hair is flushed after taking the medicine, then talk to your doctor, he will write the second medication. now-a-days

Even more medicines are present in the market.

Correct treatment: Do not keep your hair dry, always keep oil in the hair, if possible, coconut oil will be your fingers

In the roots of hair with the knees there is every reason that hair loss can have different causes. generally due to hair loss

Dermatologists detect these causes after clinical examination. Hair with skin sometimes occasionally folicular biopsy or blood tests may be necessary.

Well now know what else can be the reason for hair fall apart from ancestral …

Alopecia arita: In the baldness caused by this disease, hair fall in a round patch. This kind of can be in any edge. This occurs when body antibodies against the folicus of their own body hair

It starts to start working. This is called Auto Emium Cause. Egestion of steroids in Alopecia arita

Once a month, the place where there is no hair is placed on the patch. And that place after a few months

But the hair grows back. But in many cases, it has not been affected. And these problems if children

If they are in, they are given an injection instead of injection. They have to spend for a few months.

Incorrect Lifestyle: The False Life of Today – Hair Loss due to Eating, Fast Food and Junk Food Main reason is that. Due to the lack of essential nutrient iron, vitamin D, zinc for the body. Because

These elements are not found in these mines. Apart from the market – kind of shampoo and paraffin hair loss here is a reason for the problem. And apart from nowadays – emotional and physical stress in the race life may also be the main cause of hair fall. So you should try the necessary nutrition, seasonal fruits and regular

Equivocalize and try to avoid stress. This can prevent hair loss by controlling it. And ifIf needed, tablets of selenium, vitamin D, zinc etc supplements are also provided. Tonic separately

Come also.

Some special diseases: Several reasons for long-term fever, liver and kidney disease are also related to hair loss.

The cause of the fall becomes. Hormones change in thyroid, anemia and women, the cause of hair lossit happens. Apart from this, a mental illness starts to snatch its hair in a disease like trikutilomania.

And this problem is often in women. But due to proper treatment in these diseases hair loss is complete Stops like And again the hair starts growing.

Wrong Hits: Sometimes the hair starts to fall as well as combs, such as pulling the hair, peeling etc.

Many people wash hair with warm oil, or more hot water, this causes hair follicles to get worse. Some people rub the hair frequently with fine comb, due to which the hair weakens and falls. Repeatedly Do not change your hairstyle. Never rub the towel with the hair after washing the hair. Olives once a week in the hair Apply oil and lemon.

Fungus or some other reason: Fungal infections also cause hair loss due to sweating, dermatitis and dandruff.

Are. Apart from this, many such medicines of epilepsy or chemotherapy are coming, due to which hair loss starts. If

The person is sick of epilepsy and if the hair is flushed after taking the medicine, then talk to your doctor, he will write the second medication. now-a-days

Even more medicines are present in the market.

Correct treatment: Do not keep your hair dry, always keep oil in the hair, if possible, coconut oil will be your fingers

Lightly massage the roots of the hair with the knees, it will nourish the hair. Do not rub the memory of the memory loudly.

If you are trying to stop hair fall, then changes in your eating and drinking diet are important, it needs to be essential nutrients.

कहीं गंजेपन से परेशान तो नहीं…


इसमें कोई दो राय नहीं घने औऱ स्वस्थ बाल ब्यक्ति के व्यक्तित्व मैं चार चांद का काम करते हैं। यदि इसके विपरीत बाल तेजी से झड़ रहे हैं, तो इसका मतलब ये लगा लिया जाए कि  आप गंजेपन की तरफ बढ़ रहें हैं। हाँ यदि समय रहते बालों के झड़ने का कारण मालूम कर लिया जाये, तो इसका इलाज भी तेजी से हो सकेगा…..

अगर आपकी उम्र ३० साल या इससे अधिक की   है, और परिवार में बड़े बुजुर्गों के सिर पर भी बाल बहुत ही कम हैं, या है ही नहीं, तो ये जैनेटिक रोग है। इसे हम पुश्तैनी रोग भी कह सकते हैं। और आगे चलकर आपके बाल भी झड़ते हुए गंजेपन तक आपको ले जा सकते हैं। शुरू  में तो ऊपर के बाल झड़ने लगते हैं,

इसके बाद तेजी से और चारों तरफ के बाल भी झड़ते चले जाते हैं, जो धीरे- धीरे आपको गंजेपन की तरफ ले जाता है। अब ऐसे में क्य इसके इलाज की चिंता हमें करनी चहिये ?  शायद जवाब नहीं में होगा, क्योंकि ये उपरोक्त पुश्तैनी कारणों की वजह से इलाज योग्य नहीं है।  हाँ गंजेपन की ऐसी स्थति में हेयर ट्रांसप्लांट के द्वारा आप बाल उगा सकते हैं। लेकिन ये एक खर्चीला उपाय होता है। और कई केसों में देखा  गया है कि ये सफल नहीं होता।

   यूँ गंजेपन की शुरुआत तभी से स्टार्ट हो जाती है जब रोजाना बालों के झड़ने की संख्या लगभग ८० से १०० से

भी ज्यादा होने लगती है।  वैसे यदि बालों की संख्या ८० से १०० तक भी रहती है, तो डॉक्टर के अनुसार इसे सामान्य बात माना  जाये। क्योंकि उनकी जगह नए उगे बालों से पूर्ति हो जाती है। यदि नए उगने वाले बालों की संख्या झड़ने वाले बालों की संख्या से कम होने लगे तो बालों में घनापन कम होने लगता है। और महिलाओं के सिर पर सामने माथे की तरफ से बाल कम होने लगते हैं, और इसी वजह से उनका माथा देखने में बड़ा नजर आता  है।  अब सोचने वाली बात ये है, यदि आपके परिवार में पुश्तैनी रोग की समस्या नहीं है, फिर भी आपके बाल  तेजी से झड़ रहे हैं, तो इसका

इशारा किसी और गड़बड़ी की और संकेत देता है, और ये गड़बड़ी कहीं और है।  जिसकी वजह से बालों पर इसका सीधा

इफैक्ट पड़ रहा है। अब इस संकेत को पहचान कर आप बालों की समस्या से बाहर निकल सकते हैं। और देखने वाली

बात है, बाल झड़ने की ये समस्या महिलाएं, पुरुषों के अलावा बच्चों में भी होती हैं। लेकिन एक बात गौर करनी जरूरी

है की हर ब्यक्ति में बाल  झड़ने के अलग – अलग कारण हो सकते हैं। सामान्यतया  बाल झड़ने के कारणों में

डर्मेटोलॉजिस्ट, क्लीनिकल एग्जामिनेशन के बाद इन कारणों का पता लगाते हैं। कभी कभार सिर की त्वचा से हेयर फॉलिकल की बायोप्सी या रक्त की जाँच जरूरी हो सकती  है।

अच्छा अब जानते हैं की पुश्तैनी के अलावा बालों के झड़ने के और क्या कारण हो सकते हैं…

एलोपेसिया एरिटा : इस बीमारी के कारण होने वाले गंजेपन में गोल पैच में बाल  झड़ते जाते हैं। इस तरह का गंजापन किसी भी एज में हो सकता है। यह  तब होता है जब शरीर की एंटीबॉडी अपने ही शरीर के बालों के फॉलिकल के खिलाफ

काम करना शरू करना शरू कर देती है। इसे ऑटो इम्यूम कारण कहते हैं। एलोपेसिया एरिटा में स्टेरॉयड के इजेक्शन महीने में एक बार जिस जगह पर बाल नहीं हैं, उस जगह यानि पैच पर लगाए जाते हैं। और कुछ महीनों के बाद उस जगह पर बाल वापस उग आते  हैं। लेकिन कई केसों में देखा गया है, कि इसका असर नहीं भी पड़ता। और ये समस्या यदि बच्चों में है, तो उनको इंजेक्शन की जगह क्रीम ( ऑइंटमेंट ) दिए जाते हैं। इनको कुछ महीनों तक लगानी होती  है।

गलत लाइफस्टाइल : आज के समय के गलत रहन – सहन, फ़ास्ट फ़ूड और जंक फ़ूड खाने की वजह से बालों के झड़ने की

मेन  वजह है। जिस कारण शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व आयरन, विटामिन डी, जिंक की कमी हो जाती है। क्योंकि इन खानो में ये तत्व नहीं पाए जाते। इसके अलावा बाजार से तरह – तरह के  शैम्पू और आयल भी बालों के झड़ने की

समस्या का एक कारण है। और इसके अलावा आजकल की भाग – दौड़ भरी लाइफ, में भावनात्मक व् शारीरिक तनाव बालों के झड़ने का मुख्य कारण हो सकता है। अतः कोशिश करनी चहिये की जरूरी न्यूट्रिशन, मौसमी फ्रूट्स व् नियमित एकसरसाइज करना व् तनाव से बचने का प्रयास करें। इससे बालों के झड़ने को कंट्रोल करके रोक सकते हैं। और यदि जरूरत पड़े तो सेलेनियम, विटामिन डी, जिंक आदि सप्लीमेंट्स की टेबलेट्स भी दी जाती है। इनके अलग से टॉनिक भी आते हैं।

कुछ विशेष बीमारियां : कई वजह से लम्बे समय तक चलने वाले बुखार, लिवर और किडनी की कुछ बीमारी भी बालों के झड़ने का कारण बन जाती हैं। थायराइड, एनीमिया और महिलाओं में हार्मोन्स का बदलाव होने, बालों के झड़ने का कारण होता है। इसके अलावा एक मानसिक रोग त्रिकोटिलोमनिया जैसी बीमारी में ब्यक्ति अपने ही बालों को नोचने लगता है। और यह समस्या महिलाओं अक्सर होती है। लेकिन इन बिमारियों में उचित इलाज होने से बालों का झड़ना पूरी तरह रुक जाता है। और दोबारा से बाल  उगने लगते हैं।

गलत हैबिट्स : कई बार गलत तरीके से कंघी जैसे कि बालों को खींचकर चोटी करना आदि से भी बाल  झड़ने लगते हैं। कई लोग आयल को ज्यादा गर्म करके, या ज्यादा गर्म पानी से बालों को धोते हैं, इससे हेयर फॉलिकल खराब होते हैं।

कुछ लोग महीन कंघी से बालों को बार – बार जोर से रगड़ते हैं, जिस  वजह से भी बाल कमजोर होकर  झड़ते हैं। बार – बार अपने हेयर स्टाइल को ना बदलें। बालों को धोने के बाद कभी टॉवेल से जोर से ना रगड़ें। सप्ताह में एक बार  बालों में जैतून का तेल व्  निम्बू लगाएं।

फंगस या कुछ और  कारण : फंगल इन्फेक्शन पसीने से होने वाली सेबरेहिक डर्मेटाइस और डैंड्रफ से भी बाल झड़ने लगते हैं। इसके अलावा मिर्गी या   कीमोथेरेपी की ऐसी बहुत सी मेडिसिन आ रही हैं जिनकी वजहसे बाल झड़ने लगते हैं। यदि ब्यक्ति मिर्गी का रोगी है और दवाई लेने से बाल झड़ रहें हैं, तो अपने डॉक्टर से बोले, वो दूसरी दवाई  लिख देगा। आजकल और भी दवाइयां मार्किट में मौजूद हैं।

सही इलाज : अपने बालों को खुश्क न रखें, हमेशा बालों में तेल लगाकर रखें, हो सके तो नारियल का तेल अपनी उँगलियों की पोरों से बालों की जड़ों में हल्की – हल्की मालिश करें,इससे बालों का पोषण होगा।  याद रहे बालों को जोर से रगड़ें नहीं। यदि बालों का झड़ना रोकना चाह रहे हैं, तो अपनी खाने – पीने की डाइट में बदलाव जरूरी है, उसमें जरूरी पोषक तत्व होने जरूरी हैं। ज्यादा पानी से गिला होने से भी बालों को नुकसान होता है।  बाल जब अच्छी तरह से सुख जाएँ, तेल तभी लगाएं।

इस तरह से छोटी – छोटी बातें आपके बालों को अनावश्यक नुकसान होने से बचाने में मददगार सिद्ध होंगी।

Slip of politicians


The rest of the previous page … ..
Just bypassing it could sit quietly … ..Yes .. this is it, I agreed to Pandit ji as a disciple. But, Panditji, tell me one thing, what happened in the previous UPA government, after being trapped in the charge of Rs 99 lakh in bribery by Pawan Bansal, he had

to resign from the post of minister. Abe Bachu, looking at me from the checker and seeing the head on the head as usual, said Panditji, you will not understand … This is politics. In the party there are lot of thought sharing tickets.
Good Panditji, tell one thing, what have you heard of your Yu Turban? What is that Pandit ji said in my interrupted interaction as usual. She too had hurried to join the Congress, had even met senior Congress leader Sheela Dikshit and had met her with her Rahul.
And the talk broke up. Broke … ..? I asked in the middle and said in the middle. Panditji said, his name U Turn was such a little, …. It would have been kept unnecessary for counting of seats. If you did not make a mistake, you turned on Thought, let’s have a lot of things today, Panditji should have been tired, now it is better to say goodbye. We got to meet each other again with the promise of meeting again.
next day …. And tell, how are Pandit Ji, putting their knees on their hands? When Panditji was completely submerged in the news paper, I asked again again. After seeing the full line, Pandit ji looked at me, and said, how are you? I am fine with your grace, Pandit ji What is going on in Pandit ji and narao up In U P …? As always, in your head’s hair, your fingers are fluttering, there is a saying, when there is nothing left to you, then be with time. That is, the thief’s nappy right over ran. When it comes to a conservative leader like Mulayam, first, he told the son Akhilesh about the alliance with Mayawati after giving a statement in the media, saying that the party has destroyed the party. After that, after forgetting the mood of the spot, forgetting the old gillas that have reached the whole 24 years later, he also shared the platform near his grim enemy Mayawati. After all, the Parliament is also there to reach. I said moving the matter forward … yes he is, as well as Mulayam also declared it, that this is my last election. Upon hearing, Pandit ji saw me and said, Who saw yesterday? I also understood that Panditji is such a little
Say this hairy sun
Did not turn white Good Pandit ji Akhilesh had coalition alliances with Rahul Gandhi in the last election, and nowadays, with Mayawati, I did not understand anything. Now what’s the point of understanding in it, babychu, one thing
Taking a knot is a political feature and opportunity, there is no permanent friend or enemy in it.
In Panditji Rampur, Azam Khan broke all the limitations by speaking against the Jaya Prada, standing against him against Jaya Prada, against him. Pundit ji said that abhe kidchu is so hot that leaders will not slip
So will the animal slip? And on the same excuse he was also aiming at his enemy Amar Singh. Yes, yes I remembered, the Election Commission has imposed 72 hours of ban on the Azam Khan.
What will happen to him? This excuse has got a chance, to create a new strategy for its future, and to meet supporters. Good Pandit ji tell me something here in Haryana Panditji looked at me for a moment and then started speaking, Inaela in Haryana is scattered just like the cards, although some days before Chautala Sahib has got bail from unconditional courts, now it depends on him. How do they collect scattered leaves, and play
Are. Anyway no one can stop the passing time. Talk of Congress, its color is not even seen here in the state
Coming, Pandit ji, Khattar ji had failed to control Baba Ram Rahim’s disciples, you will not understand, our politics is vote politics in our country, I have asked Pandit Ji, Pandit I do not understand, Abe kidchu is no big deal to understand, all the parties have bowed down in the days of elections to these Baba, now the party which will get blessings of Baba Baba They will win the same party with their votes. Talking about the rest of the Khattar ji, in the beginning, he made mistakes like a novice, like Baba Ramaraham
Failure to keep time from the disciples’ disciples, which resulted in places like fire brigade etc.
But later he created his calm, honest and perspicuous image, the result of which could come in his favor. The rest of the people have a mood when the leader of the slip slips and the wind turns up.
Panditji did not tell you about Rahul Gandhi. Listen, how can you forget Rahul Gandhi, the leader in the political center? But whenever Pandit speaks, he speaks against Modi and more against anybody
Do not speak anything. Panditji breathed a long time, as if he had made a crooked question. Now tell him about what his party advisors call him as he speaks. First of all, the issue of Raphael against Modi
Talk to the cry, that too, referring to the Supreme Court. But when the Bjp went to the Supreme Court against him, he is silent since then. And now, hear it, Rahul apologizes to his past wrong statements in the Supreme Court
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नेताओं की फिसलती जुबान


पिछले पेज का शेष …..

यूँ ही दरकिनार कर  के चैन से बैठ सकती थी …..हाँ .. ये तो है मैंने पंडित जी को एक शिष्य की तरह सहमति जताई। लेकिन पंडित जी एक बात तो बताओ,    पिछली यू पी ए सरकार में  पवन बंसल ने रेल मंत्री रहते हुए नब्बे  लाख रुपए के रिश्वत के आरोप में फंसने के बाद मंत्री पद से इस्तीफा  देना पड़ा था,   क्या बना। अबे बच्चू  तपाक से मेरी  और देखते हुए  सिर पर हमेशा की तरह फेरते हुए पंडित जी  बोले हुए, तू नहीं समझेगा  … ये राजनीति है। पार्टी में बहुत सोच समझकर टिकट के  बंटवारे होते हैं।  

अच्छा  पंडित जी एक बात बताओ, अपने यू टर्न बाबू का क्या बना  सुना है,  वो ..? वो क्या पंडित जी मेरी बात  को हमेशा की तरह बीच में रोकते हुए बोले।  वो भी कांग्रेस से गठबंधन करने के लिए उतावले थे, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित से तो  मीटिंग भी कर  ली थी, अपने राहुल से भी मिल लिए थे।

और बात बनकर टूट गयी।  टूट गयी…..? मैंने  बीच में टोकते हुए पूछा।   पंडित जी बोले, उनका नाम यू टर्न ऐसे थोड़े ही पड़ गया, …. रख दी होगी कोई सीटों की गिनती की अनमनी शर्त। बात ना बनने पर हो गए यू टर्न। सोचा, चलो आज बहुत बातें हो गयी,  पंडित जी भी थक गए होंगे, अब अलविदा कहने में ही भलाई है।  हमने फिर से अगले दिन मिलने के वादे से, एक दूसरे से विदाई ली।  

अगले दिन …. और सुनाओ,   पंडित जी कैसे हैं, उनके घुटनों को हाथ लगाते हुए पूछा। पंडित जी को न्यूज़ पेपर में पूरी तरह से  डूबे होने पर मैंने फिर दोबारा से पूछा।  पंडित जी ने पूरी लाइन पड़ने  के बाद बाद मेरे को देखा, और बोले कैसे हो बच्चू।  आपकी कृपा से मैं ठीक हूँ  पंडित जी। पंडित जी और सुनाओ यू पी में क्या चल रहा है। यू  पी में …? अपने सिर के बालों में हमेशा की तरह अपनी उँगलियाँ फेरते हुए बोले, एक कहावत है, जब कहीं कुछ ना रह जाये अपने पास, तो समय के साथ हो लो। यानि भागते चोर की लंगोट ही सही।  जब बात हो मुलायम जैसे   घाघ नेता की, तो पहले तो उन्होंने पुत्र अखिलेश को मायावती से गठबंधन को लेकर मीडिया में बयान देकर बड़ा भला – बुरा कहा, जैसे कि अखिलेश ने पार्टी का नाश कर  दिया है। उसके बाद मौके की नजाकत को समझते हुए पूरे  २४ साल बाद  पहुंच गए पुराने गिले  शिकवे भुलाकर, वो भी  अपनी घोर शत्रु मायावती के पास मंच साँझा करने।  आखिर संसद भी तो पहुंचना है। मैंने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा …  हाँ वो तो है, साथ ही मुलायम ने ये भी तो एलान कर दिया, कि ये मेरा आखिरी चुनाव है। सुनकर  पंडित जी मेरी और देखकर बोले, कल की किसने देखी।  मैं भी समझ गया पंडित जी ऐसे थोड़े  ही

बोलते हैं कि ये बाल  धूप

में सफेद नहीं हुए। अच्छा पंडित जी अखिलेश ने पिछले चुनाव में राहुल गाँधी से गठबंधन किया था, और अबकी बार मायावती से, कुछ समझ नहीं आया। अब इसमें समझने वाली क्या बात है बच्चू, एक बात

को गांठ बांध ले राजनीति सुविधा और मौके की होती है, इसमें कोई परमानेंट दोस्त या दुश्मन नहीं होता। 

पंडित जी रामपुर में आजमखान ने उनके खिलाफ बी जे पी के टिकट से खड़ी जयाप्रदा के बारे में क्या अनाप शनाप बोलकर सारी  मर्यादाएं ही तोड़ दी।   सुनकर पंडित जी बोले अबे बच्चू इतनी गर्मी है नेताओं की जुबान नहीं फिसलेगी

तो क्या जानवर की फिसलेगी। और इसी बहाने  उन्होंने अपने शत्रु अमर  सिंह पर  निशाना भी तो साधना था।  हाँ, हाँ याद आया, चुनाव आयोग ने ७२ घंटों का बैन आजमखान पर लगाया है मैंने आदतवश बीच  में टांग अड़ाते हुए बोला।

उससे  क्या होगा पंडित जी बोले।  इसी बहाने आजमखान  मौका मिल गया, अपनी  आगे की नई  रणनीति  बनाने के लिए, और समर्थकों से मुलाकात करने के लिए ।   अच्छा  पंडित जी एक इधर हरियाणा की तो कुछ बताओ।  पंडित जी ने एक पल तो मेरी और देखा, फिर बोलने लगे हरियाणा में इनेलो तो ताश के पत्तों की तरह वैसे ही बिखरी पड़ी है, हालाँकि कुछ दिन पहले चौटाला साहब को बिना शर्त कोर्ट से जमानत मिल गयी है, अब ये उनपर निर्भर करता  है कैसे वो बिखरे पत्तों को इकठ्ठे करते हैं, और खेलते

हैं। वैसे भी गुजरते समय को कोई नहीं रोक पाया। रही कांग्रेस की बात तो उसके रंग भी यहां प्रदेश में अभी नजर नहीं

आ रहे हैं, एक बात करनी थी पंडित जी, खट्टर जी ने बाबा राम रहीम के चेलों पर कंट्रोल करने में नाकाम रहे, बच्चू तू नही समझेगा, हमारे देश में वोटों की राजनीति है, मैंने पूछ ही लिया बीच में पंडित जी को, पंडित जी मैं समझा नहीं, अबे बच्चू इसमें समझने वाली कोई बड़ी बात नहीं है, सभी पार्टीयां इन्हीं बाबा के पास चुनावों के दिनों में नतमस्तक होते हैं, अब इब बाबाओं का आशीर्वाद जिस पार्टी को मिलेगा, उनके भक्त उन्हीं पार्टी को अपने वोटों से जीता देंगे। बाकी रही खटटर जी की बात, शुरू शरू में उन्होंने  नौसिखिये की तरह गलतियां करी, जैसे कि बाबा रामरहीम

के चेलों से वक्त रहते न सुलट पाना, जिसका परिणाम जगह जगह आगजनी की खबरें आदि जैसी घटनाएं घटित हुई।

लेकिन बाद में उनहोंने अपने शांत, ईमानदार और  दृड़ता वाली छवि बनाई, जिसके परिणाम उनके पक्ष में आ सकते हैं। बाकी जनता का मूड है कब, किस नेता की जुबान फिसल जाये और हवा का रुख पलट जाये।

पंडित जी आपने  राहुल गाँधी के बारे में नहीं बताया। सुन बच्चू राहुल गाँधी को कैसे भूल सकते हैं, राजनीतिक केंद्र में विराजमान नेता हैं। लेकिन पंडित जी वो जब  भी बोलते हैं, मोदी के ही खिलाफ बोलते हैं और किसी के खिलाफ  ज्यादा

कुछ नहीं बोलते। पंडित जी ने लम्बी साँस ली जैसे कि उनसे कोई टेढ़ा सवाल कर  दिया हो। अब क्या उनके बारे में बताऊं उनकी पार्टी के  सलाहकार उनसे जो बुलवाते हैं, वैसा ही वो बोल देते हैं। पहले उनसे मोदी के खिलाफ रफैल के मुद्दे को

रटने को बोला, वो भी सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर बोलते रहे।  लेकिन जब बी जे पी वाले उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गए, तब  से चुप हैं। औऱ सुन अभी पता चला राहुल सुप्रीम कोर्ट में अपने पिछले गलत बयानों को लेकर माफीनामा देकर आये हैं। अब उनको अपनी गलती का एहसास हो गया होगा। रही बात और पार्टियों के बारे में कुछ नहीं बोलने की, तो तू नहीं समझेगा, अबे बच्चू कल के लिए भी

तो कोई गुंजाईश चहिये। यदि केंद्र में अपना बहुमत न आने पर उनके समर्थन की जरूरत पड़ गयी तो…..अपने सलाहकारो की भी सुननी है। हाँ… ये तो मैंने सोचा नहीं। हाँ सोच ना कल को कुछ भी हो सकता है,  चित भी पट भी। एक बात बताओ पण्डित जी इस तरह से तो राहुल तोता बन गए, जिसने जो सीखा दिया, वैसे ही बोल दिया। चुप कर बच्चू कोई सुन लेगा। मैंने भी चुप रहने में भलाई समझी। एक बात याद आई पण्डित जी अब तो प्रियंका गांधी भी मैदान में कूद गई हैं। हां तो फिर उसमें क्या नई बात है। आखिर ये जागीर उन्ही की तो है। देश की आजादी से लेकर कांग्रेस इसी परिवार पर तो निर्भर है। यदि कल को कांग्रेस की सरकार केंद्र में आ गई, तो प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा

को बी जे पी सरकार द्वारा के दायर केसों से बचाना है।

अच्छा पंडित जी एक बात तो बताओ अपने राहुल गाँधी किसी हिंदू धर्मस्थान में गए, और वहां पर उन्होंने अपने कुर्ते के ऊपर जनेऊ डाल रखा था, तो वो हिन्दू ही तो हैं।  पंडित जी त्योरियां चढ़ गयी, लेकिन मेरी  तरफ एक पल को देखकर बोले,

बच्चू कहा  ना जैसे उन्हें सलाहकार करने को बोलते हैं, तो उन्हें करना पड़ेगा न। शयद उनके ये करने से हिन्दू वोट मिल जाएँ।

मैंने पंडित जी को बीच में टोकते हुए बोला, लेकिन उनके दादा तो मुस्लिम थे।  तो ..? पंडित तपाक से बोले।  यही राजनीति है। मैं कुछ समझा नहीं पंडित

जी। अरे बच्चू इसमें समझने वाली क्या बात है, आखिर

हमारा देश धर्म निरक्षेप जो है, वो भी इनकी मेहरबानी की बजह से। तो यदि मुस्लिम होने के बाद हिन्दू भी कहलाएं तो इसमें क्या बुराई है, आखिर वोट भी तो लेने हैं। समझ गया पण्डित जी दूर की कौड़ी जो लेकर आते हैं आप। ठीक ठीक है ज़्यादा चापलूसी न कर। अब चलने का समय हो गया है। बाकी कुछ बाद के लिए भी रख ले। ठीक है पण्डित जी आगे फिर मिलेंगे कुछ नई बातें करेंगे, जय हिंद।

Slogan of leaders slipping ….


Yes, this is democracy, Goyaki …. like a rare chance, to muddle each other, he Even after five years, as if there is a competition here. Let’s see … who goes ahead, hey brother It is only to get out, to spill some out, and to get somebody out in the

parliament. Who’s in now Lucky, what to ask in this is dependent on the mood of the public. Such a little ‘roti’
The song in the movie was ‘He who is public, all knows’.
Nowadays, the leaders of the country are going to shoot arrows on each other. Thought that the pundit of your old politics, yes
Yes, there are only scholars, in the elections in the elections, the arrows of the arrow show each other and see it today


Those who have reached Sanjha Valley Many times, if they make a question by mistake, then this is their pillow Kalam would be .. O kidoo, what do you understand us, our white hair is only a few … Ghat -We have drunk water, we do not know how many elections are seen. Many leader leaders came and went. We too are the same old accent From seeing them like this, like a

brother you are a wise scholar, we have become habituated just like that. You have to tease. In the same way I reached Pandit Pandit ji, Panditji was very nervous in the news paper. We bow down to Pandit Bole Pratam, Pandit Ji, while touching the knee Pratam Chachchu .. Pandit ji said in the paper without

being seen. good Punditji should not call us as a ‘Bachu’, take the name of us, after all, we also have a beautiful name. Look at
If you will be a son then you are our child. No, we do not like to invite you to your child’s mouth. I again Complained to Pandit ji Okay … I will not call you today, saying that the Pandit got up and walked, angry
By being able to understand the age of his age, his experience and his time, he found him with his both hands, an It’s okay,

you have the right to call me by whatever name you call. From now on, when you call me a kidchu Will not touch Pundit ji spoke to me and said, rightly.. Let’s leave it good, tell me what’s new news today. He fingered the hair of his head
Speak neatly and said, What are you now? Go to West Bengal, there is a joke on Mamta da’s house Let me tell you, or party, in the morning, if it is found in the morning, then speak. Someone learned from them How is it possible to hold on to its rule and party, the mazals who are in front of any officer or party
The Adna Siege Even an officer of the Election Commission hides his face from BJP banner
Was removed from the walls, when a media watched, questioned about his actions,
Hiding off his mouth said that this is the building of the government building, but on the second building of the same building On which Mamata gave the party TMC banner, then she got out of there. Oh yeah this video then channel Having been constantly showing up I talked about them in the middle. Pandit ji said, someone in his kingdom today Pandit could not even flip the wings without his will. Yes Mamta, if you want, your party also from neighboring country Can invite anyone to publicize. Yes, yes, I remember, interrupting Pandit Ji in the middle. This news I also felt how Bangladeshi actors campaigned for Mamta Diwas and that too the visa duration ended in spite of. So Bachu Pandit ji said, shaking hands on the head. They came to know the BJP, then they They were told to leave the country. Now if anyone from the Central Government asks what their intelligence was doing. Mamta Dey has said in her speech in clear words to Modi, that Modi Babu will have you in the election Will get Rasgulla Rasagulla ? I asked, I did not understand anything, hey, what is it to understand, Rasgulla means Zero, zero. Pundit ji said. And then he and his people choose to choose a party worker from BJP Doing it, threatening, so that their unhappy propaganda, rallying. Good leave, Pandit ji is close to the BJP Shatgun Babu, who has been running for over three decades, was not happy with his party’s entire tenure, never He used to say anything, as if he was running for the same time. The party also suffered from them, and Now, when the BJJ expressed his displeasure with not giving ticket to Patna, he has taken the Congress down.
Panditji was not silent, he said in the middle of the interrogation, what new he has gone in the second party, for the last five years
They only get upset with them, forgot children, Lalu, Rashtishya, Yashwant Sinha, Mamta Dey, Tejshi Yadav or
Whenever they saw him against Kejriwal or BJP, he used to sing songs of praise, and all these The parties are the same. And sometimes it’s their old habit to say anything, such a short name was shotgun Has happened. And all these parties are theirs. Take yesterday’s own, he himself joined the Congress, and his wife Taking a ticket from the Samajwadi Party, went to file a writ against Rajnath in Lucknow, a reporter Ask them in Lucknow that you had to go to Patna today to file your own form, how did you hear it here today What was Shatrughan Sinha’s answer, I did not hear. Pandit ji again talked to me and said, Shatrughan Sinha
That reporter told me to be the first family
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नेताओं की फिसलती जुबान….


जी हाँ ये लोकतंत्र  है, गोयाकि …. जैसे बमुश्किल मौका मिला हो, एक दूसरे पर कीचड़ उछालने के लिए, वो भी पुरे पांच साल बाद, जैसे कि यहां कोई प्रतियोगिता हो रही हो। देखते हैं … कौन आगे निकलता है, अरे भाई निकलना तो है ही, कुछ  छिटक कर  बाहर की  और,  और कुछ अंदर संसद में पास होकर। अब इनमें कौन भाग्यशाली होगा, इसमें पूछने वाली कौन सी बात है, ये तो जनता के मूड पर निर्भर  है।  ऐसे थोड़े ही न ‘ ऱोटी ‘मूवी  में गाना  था ‘ ये जो   पब्लिक है, सब जानती है ‘।

आजकल देशभर में नेताओं के एक  दूसरे पर शब्दों के बाण चल  हैं। सोचा कि अपने  पुराने राजनीति के पंडित, हाँ, हाँ पंडित ही तो हैं, सालों से चुनावों में  यही शब्दों के  बाणोँ की बौछार एक दूसरे  की और देखते सुनते आज वो साँझ वेले में जो पहुंच  गए हैं। कई बार  उनसे कोई सवाल गलती से कर  भी लें, तो उनका यही तकिया कलाम होता..अरे बच्चू  तुम हमें समझते क्या हो, हमारे सफेद बाल यूँ ही थोड़े ही हो गए …..  घाट- घाट का पानी पिया है  हमने, पता नहीं कितने  चुनाव  देखे हैं।  कई नेता नेता आये और गए। हम भी वही  पुराने लहजे से उनको ऐसे देखते, जैसे भाई  तुम ही ज्ञानी पंडित हो, हमें तो वैसे ही आदत सी पड़ गयी है तुम्हे छेड़ने की। ऐसे ही मैं पहुंच गया पंडित जी पास, पंडित जी

न्यूज़ पेपर में बुरी तरह रमे पड़े थे। हमने झुक कर पंडित जी के घुटने को छूते  हुए बोले प्रणाम, पंडित जी।  प्रणाम बच्चू ..  पंडित जी  पेपर में ही रमे हुए बिना देखे  बोले। अच्छा पंडित जी हमें बच्चू कहकर ना बुलाया करो, नाम लिया करो हमारा, आखिर हमारा भी एक सुंदर सा नाम है।  देखो बेटा  रहोगे तो तुम

हमारे लिए बच्चू ही। नहीं हमें यूँ  बच्चू आपके मुंह से पुकारना अच्छा नहीं लगता।  मैंने फिर पंडित जी से  शिकायत की। ठीक है … मैं नहीं आज से तुम्हे बुलाऊंगा, कहते हुए पंडित जी उठकर चल दिए, नाराज होकर मैंने उनकी उम्र, तजुर्बे और समय   की नजाकत को समझते हुए उनको दौड़कर अपने दोनों हाथो से झपी पायी, और

बोला, अच्छा ठीक है, तुमको पूरा हक है मुझे जिस भी नाम से पुकारने का।  अब से तुम्हें बच्चू कहने पर बिलकुल नहीं टोकूंगा। पंडित जी मेरी और मुखातिब होकर बोले, ठीक है, ठीक है।  

चलो छोड़ो अच्छा ये बताओ आज  क्या कुछ नई खबर है।  उन्होंने अपने सिर के  बेतरतीब बालों को  उँगलियों

से करीने से संवारते हुए बोले  अब  क्या बताएं।  पश्चिम बंगाल चले जाओ, वहां पर मजाल जो ममता दी के घर

में अपना, या पार्टी का इश्तिहार  लगा दे, सुबह का लगा शाम को लगा मिल जाए, तो बोलना। कोई उनसे सीखे

कैसे अपने शासन और पार्टी पर  पकड़ मजबूत करनी होती है, मजाल जो उनके सामने चाहे कोई अफसर या पार्टी का अदना सा सिपाही।  यहां तक  कि चुनाव आयोग का ही एक अफसर बी जे पी के बैनर को अपना मुंह छिपाते

हुए दीवारों से हटा रहा था, किसी मीडिया वाले ने देख लिया, उससे उसकी हरकत के बारे में सवाल किया तो उसने कैमरे से अपना मुँह छिपाते हुए कहा कि ये  सरकारी इमारत की दिवार है, लेकिन उसी इमारत की दूसरी दिवार पर

जिस पर ममता दी की पार्टी टी एम् सी का बैनर लगा था, तो वो वहां से निकल  लिया। अरे हाँ ये वीडियो तो चैनल वाले लगातार सारे दिन दिखाते  रहे। मैंने बीच  में इनको रोकते हुए बोला। पंडित जी फिर बोले आज उनके राज्य में कोई

परिंदा भी उनकी मर्जी के बिना   पंख  नहीं फड़फड़ा सकता। हाँ ममता दी यदि चाहे तो पड़ोसी देश से भी अपनी पार्टी के प्रचार के लिए, किसी को भी बुला  सकती है। अच्छा जी मैने पूंछा, हाँ हाँ याद आया, मैंने  बीच में पंडित जी को   रोकते हुए कहा।  ये खबर

मैंने भी पड़ी थी, कैसे बंगलादेशी  अभिनेता ने ममता दी के लिए प्रचार किया और वह  भी वीजा अवधि खत्म होने के बावजूद। तो देखा बच्चू पंडित जी  सिर पर हाथ फेरते हुए बोले। वो तो बी जे पी वालों को पता चल गया, तो उन्होंने

उनको देश छोड़कर जाने को बोला गया।  अब यदि केंद्र सरकार से कोई ये पूछे कि इनकी इंटेलिजेंस क्या कर रही थी। ममता दी ने मोदी को अपने भाषण में  साफ शब्दों में कह दिया है, कि मोदी बाबू तुम्हें अबकी बार चुनाव परिणाम में

रसगुल्ला मिलेगा। रसगुल्ला ? मैंने पूछा, कुछ समझा नहीं, अरे इसमें समझने वाली क्या बात है, रसगुल्ला मतलब जीरो, शून्य। पंडित जी बोले। और तो और  उसने अपने लोगों  के द्वारा बी जे पी के एक एक पार्टी वर्कर को चुन चुन मारा, धमकाया, ताकि उनकी हिमत न पड़े प्रचार, रैली करने की। अच्छा  छोड़ो पंडित जी ये बी जे पी के करीब तीन दशक से चले आ रहे शॉटगन बाबू  यानि सिन्हा अपनी पार्टी से पूरे  कार्यकाल से खुश नहीं चल रहे थे, कभी वो कुछ  भी बोल देते थे,  जैसे कि उनके लिए वही  समय चुनाव का चल रहा हो। पार्टी भी उन्हें झेलती रही , और अब तो बी जे पी ने उन्हें पटना से टिकट न देकर अपनी नाराजगी  जाहिर कर दी, उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम  लिया है। पंडित जी से चुप नहीं रहा गया बीच  में ही तपाक  से बोले,  वो दूसरी पार्टी में अब कौन से नए गए हैं, पिछले पांच सालों से वो उन्ही के ही तो साथ उठते  बैठते हैं, भूल गए बच्चू कभी लालू, तेजस्वी, यशवंत सिन्हा, ममता दी, तेजस्वी यादव या केजरीवाल या बी जे पी के खिलाफ जो भी उन्हें नजर आता उसी  के साथ हो लेते, उनके गुणगान गाने लगते, और ये सभी पार्टियां उन्ही की तो हैं। और कभी भी कुछ भी बोल देना  ये तो उनकी पुरानी  आदत है, ऐसे थोड़े ही उनका नाम शॉटगन पड़ा हुआ है। और ये सभी पार्टियां उन्ही की तो है। अब कल की ही ले लो, अपने आप उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन की, और अपनी पत्नि को समाजवादी पार्टी से टिकट दिलवा कर,  लखनऊ में राजनाथ के खिलाफ पर्चा दाखिल करवाने चले गए, किसी रिपोर्टर ने

उनसे लखनऊ में पूछ ही लिया कि आपने  तो आज  पटना में अपना पर्चा दाखिल करने जाना था, आज यहां कैसे, तो सुना ? शत्रुघ्न सिन्हा का क्या जवाब था, नहीं मैंने नहीं सुना।  पंडित जी फिर मेरी और मुखातिब होते हुए बोले, शत्रुघ्न सिन्हा ने

उस रिपोर्टर से कहा  मेरे लिए पहले परिवार है, पार्टी बाद में। ये तो गलत बोल दिया मैंने बीच में अपनी टांग  अड़ाते  हुए पंडित जी से कहा। कांग्रेस के किसी नेता ने उन्हें कोई  ताकीद नहीं  दी..? जाओ यहां हमारी पार्टी में क्या कर रहे हो।  अपने परिवार में जाओ। पंडित जी ने मेरी तरफ ऐसे घूरते  हुए देखा, जैसे कि मैंने कोई गलत बात कर दी हो, मैंने मोके की नजाकत को समझते हुए अपना ध्यान इधर उधर भटकाने  की कोशिश की। पंडित जी फिर नॉर्मल होकर बोले, ये कांग्रेस वालों की क्या मजाल जो शत्रु के खिलाफ कुछ भी बोल  दे। पटना की सीट नहीं चहिये ? हँस पड़ा मैं, पंडित जी का जवाब सुनकर। याद आया वो वाकया, जब अरुण जेटली ने शत्रु के  कांग्रेस ज्वाइन करने के बाद कहा था, बधाई हो कांग्रेस में जाने की, आज से हमारी सिरदर्दी उनकी हुई। हंसते हुए मैंने पंडित जी से फिर एक सवाल किया , अच्छा पण्डित जी ये तो बताओ कि अपने शॉटगन बी जे पी वालों से क्यों नाराज थे । अबे बच्चू इसमें समझने वाली क्या बात है, एक अंधे को क्या चाहिए , दो नैन। यदि बी जे पी वाले उन्हें मंत्री बना देते

बस फिर क्या था, खुश रहते ।जुबान का भी रंग बदल होता । पंडित जी मुझसे बोले अब समझे बच्चू, कैसे नेताओं की जुबान और जमीर वक्त के साथ रंग बदल जाते हैं।तभी तो उनकी जुबान फिसलने में समय नहीं गंवाती। अच्छा  पंडित जी अब सिद्धू जी भी कुछ चर्चा जाए। पंडित जी बोले भूल गए बच्चू, पिछले २०१४ के  लोकसभा चुनावों में उन्होंने बी जे पी के द्वारा अमृतसर से उन्हें टिकट न देकर उनका टिकट अरुण जेटली को देने पर चले गए थे कोपभवन में।  बी जे पी ने सिद्धू को कोपभवन से निकलने के लिए बड़ा लाड लड़ाया, उन्हें कुरुक्षेत्र

से भी टिकट का प्रलोभन दिया गया, लेकिन सिद्धू ऐसे नाराज हुए पार्टी से, अपनी सुविधा अनुसार पार्टियां ढूढ़ने लगे, कभी उनकी चर्चा आम आदमी पार्टी में जाने की हुई, लेकिन पार्टी में बड़े ओहदे को लेकर पेंच  फंस गया, अब जाना तो था, अपने रुतबे को  बचाने को लेकर किसी पार्टी में, कांग्रेस के अलावा कोई दूसरी पार्टी थी नहीं मैदान में, सो हो लिए उसी में। अपनी

आदत से मजबूर मैं  बीच  में फिर से टपकते हुए बोला, लेकिन आप तो पंडित जी एक बार  बोल रहे थे कुछ समय सिद्धू पार्टी के

साथ रहे।  हाँ मैं कौन  सा अब मुकर रहा हूँ।  उन्होंने पार्टी की तरफ से प्रचार भी किया था। याद है। .?  एक बार दिल्ली में मोदी

के साथ मंच साँझा करते हुए सिद्धू ने कांग्रेस को लेकर बोला था, कांग्रेस मुन्नी से भी ज्यादा बदनाम हो गयी है। और आज देख लो उन्ही  सिद्धू  की  जुबान मुन्नी से भी ज्यादा बदनाम पार्टी में  रहकर मोदी के खिलाफ कैसे फिसल रही है। मैंने पंडित जी को आदतवश  बीच में फिर से  टोकते हुए कहा, अच्छा  पंडित जी ये तो बताओ अभी पिछले दिनों सिद्धू की पत्नि चंडीगढ़ में कांग्रेस  पार्टी का टिकट का टिकट लेने के लिए डेरा जमाये बैठी थी, बैठी क्या थी ……टिकट मिल गया बच्चू … ? पंडित जी ने मेरी और  तल्खियों से देखा, चंडीगढ़ से कांग्रेस का टिकट लेने के लिए तो मनीष  तिवारी भी बैठा था। अच्छा एक  बात बता

चंडीगढ़ में जो पुराने पवन बंसल जैसे घाघ जिहोने राजनीति  में वर्षों गुजार दिए तू क्या समझता हे कांग्रेस पार्टी उनको यूँ ही दरकिनार कर  के चैन से बैठ सकती थी …..हाँ .. ये तो है … मैंने पंडित जी को एक शिष्य की तरह सहमति जताई। लेकिन  पंडित जी एक बात तो बताओ,   

 बाकि अगले पेज पर कल को

टूटती ख़ामोशी


ख़ामोशी,   तोड़ते  होठों  ने

बेटा …थोड़ा,  पानी पीला देते

सूख रहा…. .है    गला,

अभी,  आया  बाबूजी……,

लैपटॉप   पर  घुमाते  ऊँगली

मोबाइल कान  पर सुनते बोला ..

बीतते समय कुछ बाद, फिर से

बेटा …सुन  रहे  हो… ?

पकड़ा  देते  मेरी  स्टिक .. ही,  बेटा

सोचते,  खुद  ही….. पी  लूँगा,

लड़खड़ाते  किसी तरह  किचन ….में 

ओह.. ! निपटा,  थोड़ा ही  काम  तो

  रह  गया अभी,  जो

निपटाते  ही आया  जल्दी ….

देर   में निपटा काम बाद

ऊँगली लैपटॉप … पर से थाम

आया….बाबूजी,   पास जैसे ,  ही

क्या  चहिये, अब  बताओ 

हाथ ठंडा, बाबू जी,  का पकड़ा

खुला मुंह .. सूखा जो पानी को

था,  बंद  गला, सूखा, प्यासा …

हो,  गया .. खामोश  वो

दर्द, जो  कराहता  हुआ

पल, था … जो निकल  गया ….

पिलाने को  … पानी 

रह  गया, लैपटॉप,  मोबाइल

ऊँगली वहीं घूमने, फिर से ।