सुविचार


Advertisements

करिश्माई भाजपा


पूरे तीन दशक के बाद राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। और ये सब हो सका है, अमित शाह और नरेंद्र मोदी की वजह से। आज भाजपा पुनः एक नए रूप में अपने को निखारती हुई प्रकट हुई है। देश के इतिहास में गैर कांग्रेसी

पार्टी के रूप में दोबारा अपने दम पर पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने वाली भाजपा पहली और अकेली पार्टी बन गई है। देश में राजनीति के दृश्य पटल पर
आज दूर तक कोई राष्ट्रीय स्तर की पार्टी नजर नहीं आती।
करिश्माई भाजपा का रूप …
भाजपा यानी की फीनिक्स। यहां अपनी ही राख में पैदा होने वाले फीनिक्स को हम अपनी भाषा में ककनूस भी कह सकते हैं। दो सीटों से ३०० सीटों के पार जाने का यह सफर बहुत संघर्षपूर्ण भी रहा, और मिसाल भी। अटल जी से शुरू हुई कहानी नरेंद्र मोदी पर जाकर इतनी बड़ी हो जाएगी, शायद इसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं होगा। दरअसल ककनूस एक कल्पित पक्षी है, और जब यह अपनी उम्र पूरी करने को होता है तो सुगंधित टहनी चुनता है, और उनके ढेर पर बैठकर सुंदर स्वर लहरियां छेड़ता है। उसकी चोंच से चिंगारियां निकलती हैं, और लकड़ियों के जिस ढेर पर वह बैठा होता है, वह आग पकड़ लेती है। वह पक्षी वहीं जलकर भस्म हो जाता है। पावस की पहली बूंद जब उस राख पर पड़ती है तो नया ककनूस पैदा होता है। भाजपा भी इसी ककनूसी नस्ल की है। ककनूस के इस इतिहास का यहां इतना सा मतलब है, कि भाजपा को इससे जोड़ना काफी सहज और मोजू लगता है। इस बार के चुनाव में जो भाजपा ने किया है, यह असम्भव कार्य को करने जैसा है। ऐसे लगता है पीपल के पत्तों पर जैसे देवता बैठे होते हैं। हिलाओ और पा लो। वैसे ही जैसे नरेंद्र मोदी ने पेड़ को हिलाया और हर प्रदेश से भाजपा की झोली में सांसद आ गिरे हों।

अब ३० मई को शपथ ग्रहण समारोह है, और उसी दिन या अगले दिन मंत्रियों के विभागों के नाम भी घोषित हो जायेंगे, क्योंकि इतनी प्रचंड जीत के बाद कोई इस बात पर अड़ने वाला तो है नहीं कि मुझे भी मंत्री बनाओ, या मुझे तो ये वाला विभाग चहिये। न भाजपा में ऐसा कोई सूरमा है, न ही सहयोगी दलों में। चूँकि

अकेली भाजपा ही ३०० के पार जा पहुंची है। इसीलिए सहयोगी दलों के पास भी बार्गेनिंग की कोई गुंजाइश नहीं बची। हाँ अगर भाजपा २५० पर आकर अटक जाती तो अकालियों का अलग राग होता, शिवसेना अपनी आदत के अनुसार छत पर चढ़कर चिला रही होती, और जगनमोहन रेड्डी अपने आंध्रप्रदेश के लिए चंद्र बाबू नायडू की तरह विशेष राज्य का दर्जा मांग रहे होते। बहरहाल मंत्री पद हो या विभाग, मोदी जिस को जो भी विभाग दे देंगे, वह उसी को मान जायेगा। या यूँ कहें कि मानना उनकी मजबूरी है। जहां तक जीत के बाद के मोदी के भाषणों का सवाल है, वो पहले से ज्यादा मुलायम और परिपक्व लग रहे हैं। शायद ये २०२४ के चुनावों की तैयारी है। निश्चित ही यही सब कुछ चलता रहा, तो
२०२४ भी मोदी के लिए दूर नहीं है।
जय हिन्द

चाणक्य सरीखा रणनीतिकार …



वर्ष २०१९ में देश के लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से बीजेपी को जीत दिलाने में सिर्फ और सिर्फ एक ही नाम उभर कर सामने आता है, और वो है, मोदी के आधुनिक चाणक्य यानी रणनीतिकार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह।

जिनके सामने सारे राजनीति के पंडित बगलें झाँकने को मजबूर हो गए। ये इनकी रणनीतिक कौशल का ही कमाल है कि इनके सामने सभी पार्टियों को मुंह की खानी पड़ी है, और उनकी जातिवाद की राजनीति को इन्होने धत्ता देते हुए अकेले बीजेपी को चुनावों में ३०३ सीटें दिलवाई, और साथी पार्टियों के साथ ३५३ सीटें दिलवाई।
अमित शाह :
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का जन्म मुंबई २२ अक्टूबर १९६४ में ब्यवसायिक परिवार में हुआ। परिवार में पिता पीवीसी पाइप्स का बिजनेस करते थे। परिवार का राजनीति से दूर तक कोई संबन्ध नहीं था। अमित शाह १४ साल की कुमार

अवस्था में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए। उनकी नरेंद्र मोदी से पहली मुलाकात १७ वर्ष की उम्र में ही हो गई थी, पहली मुलाकात में ही शाह ने मोदी को प्रभावित कर दिया था। शाह २२ वर्ष की उम्र में बीजेपी में शामिल हो गए। जब शाह पहली बार मंत्री बने तब उनकी उम्र ३५ की थी। इन्होने छोटे, बड़े २९ चुनाव लड़कर सभी जीते। और जब वे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तब इनकी उम्र ५० की थी। इनकी रणनीतिक कौशल को गुजरात में देखते हुए वर्ष २०१४ लोकसभा चुनाव में बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने शाह को उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रभारी बनाकर भेजा। उत्तर- प्रदेश जहां पार्टी का जनाधार व पार्टी कार्यकर्ताओं

की सक्रियता लगभग शून्य थी। चुनाव सिर पर थे। शाह ने उत्तर प्रदेश के दूरदराज के गावों, जहां आजादी के कई वर्षों बाद तक भी सड़क सुविधा नहीं थी, व कोई भी पार्टी वहां जाकर खुश नहीं थी। ये वहां उन इलाकों में गए, लोगों से बात की, उनके बीच में रहकर उनको समझाया, पार्टी के लिए प्रचारक तैयार किये, उनको जिम्मेदारी दी गई। इस तरह पूरे प्रदेश में घूम – घूम कर लोगों को पार्टी से जोड़ने में सफल ही नहीं हुए बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में पार्टी को ७१ सीटें दिलाई, तथा प्रदेश में अपना दल से गठबंधन करके ७४ सीटें प्राप्त करी। ये इनकी रणनीतिक कौशल का चमत्कार ही था।
बीजेपी अध्यक्ष :
२०१४ में शाह को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया। अध्यक्ष बनने के बाद शाह ने पार्टी की सदस्य संख्या को तेजी से बढ़ाने का काम करते हुए इसकी सदस्य संख्या १० करोड़ करके विश्व की सबसे बड़ी पार्टी में शुमार कर दिया।
शाह की छवि मेहनती, कठोर व जोखिम लेने वाले नेता की है। व हमेशा जमीन से जुड़कर, वहां रह रहे कार्यकर्ताओं से सम्पर्क में रहते हैं। ये इनकी कठोरता व जोखिम लेने का ही एक उदाहरण है कि इन्होने बात – बात पर शर्तें थोपने, प्रेशर बनाने की राजनीति करने वाली शिवसेना से लगभग २५ वर्ष पुराना संबन्ध तोड़ने में भी देर नहीं लगाई। ये इन्होने बीजेपी के ऊपर अनावश्यक दबाव
डालने की शिवसेना की रणनीति से पीछा छुड़ाने के लिए जरूरी समझकर किया था। इसके बाद महाराष्ट्र में विधानसभा के चुनाव
दोनों पार्टियों ने अकेले अपने दम पर लड़े। लेकिन किसी एक को बहुमत न मिलने के कारण दोनों को फिर से सरकार बनाने का फैसला करना पड़ा। पार्टी में टिकट के बंटवारे से लेकर कमजोर प्रत्याशी का टिकट काटना, साफ छवि वाले को प्रत्याशी बनाना इनकी रणनीति का ही एक हिस्सा है। किसी भी बड़े, प्रभावशाली नेता का टिकट काटने में इन्होने संकोच नहीं किया। बीजेपी की शहरी पार्टी की छवि को तोड़कर शाह ने पार्टी के अभियान को दूर गावों – गावों तक पहुंचाया। जिस वजह से पार्टी को २०१९ के चुनावों में गावों से ५७ फीसदी वोट मिले,व शहरों से ५० फीसदी वोट मिले। ये पार्टी के लिए इनकी और से किये गए बहुत
बड़े बदलाव का ही फल था। इसके अलावा इन्होने पार्टी को नई टेक्नोलॉजी से जोड़ा। एक वार रूम की स्थापना की गई, जहां पर कॉल सेंटर बनाकर देश के सभी शहरों से जोड़े गए। वहीं कंट्रोलरूम में घंटों – घंटों बैठकर देश में पार्टी के कार्यकर्ताओं से एक – एक सीट की रणनीति बनाई।
पार्टी का जनाधार पश्चिम बंगाल और उत्तर पूर्व में नहीं था। शाह की ही वजह से त्रिपुरा में बीजेपी शासित सरकार काम कर रही है। और पश्चिम बंगाल में २०१९ के चुनावों में पार्टी को १८ सीटें दिलाई। हालाँकि यहां ममता बनर्जी ने बीजेपी के कार्यकर्ताओं की हिंसा में हत्या करायी। उनको तरह – तरह से डराया, धमकाया गया। दरअसल शाह ने २०१४ से ही वैस्ट बंगाल में पार्टी के लिए

रणनीति बनानी शुरू कर दी थी। यदि बंगाल में स्वस्थ माहौल में चुनाव होते तो ये आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता था। इसमें कोई दो राय नहीं। शाह देश के सभी बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं और नेताओं से सम्पर्क में रहते हैं। उनका फोन जब भी देश के किसी नेता, कार्यकर्त्ता से सम्पर्क के लिए मिलता है, तो पहला शब्द यही होता ‘ दोस्त बोल रहा हूँ ‘,.शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं की बात पार्टी तक पहुंचने के लिए एक विश्वनीय सिस्टम तैयार करवाया, ताकि पार्टी के कार्यतर्ताओं को दिल्ली न पहुंचना पड़े। वो अपने कौशल के कारण ही मोदी के सबसे विश्वनीय हैं। ये शाह की सादगी व खर्चों का सही इस्तेमाल करने का परिणाम है, कि वो जब भी कहीं यात्रा पर जाते हैं तो होटल में न ठहर कर किसी सर्किट हाउस या कार्यकर्त्ता के घर पर रहना पसंद करते हैं। इस बारे में इनका मानना है कि ऐसे में उनसे उनकी मन की बात जानने में आसानी होती है। व समस्या का समाधान भी होने में मदद मिलती है। २०१९ के लोकसभा चुनाव में मोदी देश में जगह – जगह जाकर रैलियां कर रहे थे, ये वॉर रूम में घंटों-घंटों देशभर के दर्जनों युवा कार्यकर्ताओं के साथ रणनीति तैयार करते थे, व खुद भी रैलियां करते थे। शाह जरूरी होने पर ही चार्टेड प्लेन्स का इस्तेमाल हैं। आगे होने वाले चुनावों की पृष्ठिभूमि पहले ही तैयार कर लेते हैं। यही कारण है
२०१९ के लोकसभा चुनावों में एनडीए को प्रचंड बहुमत मिला।

वारिस कौन .. ?


कालोनी में एक सज्जन का देहांत हो गया। सगे – संबंधी उसकी अर्थी ले जाने लगे।  तभी एक आदमी आगे आया, उसने अर्थी को आगे ले जाने से रोक दिया, और बोला मरने वाले से मैने ५ लाख रुपए लेने  हैं। पहले मुझे ५ लाख रुपए दो

फिर आपको अर्थी ले जाने दूंगा। सारे लोग तमाशा देखने लगे। इतने में वहां खड़े बड़े लड़के ने उस आदमी से कहा, पापा ने तो हमें तो कोई नहीं बताया कि वे कर्जदार हैं, इसीलिए हम आपको पैसे नहीं दे सकते। इसके बाद मृतक के

भाइयों ने उससे कहा कि जब भाई साहब के बेटे जिम्मेदार नहीं हैं, तो ऐसे में हम क्यों दें ..?

अब सभी लोग खड़े हैं, और आदमी ने अर्थी पकड़ी हुई है। जब काफी देर हो गई, तो बात अन्दर घर की महिलाओं तक पहुंच गई , मरने वाले की इकलौती बेटी ने जब यह बात सुनी तो उसने फौरन अपने सारे गहने आननफानन में इकठ्ठे किये, इसके अलावा अपने पास सारी नकद रकम इकठ्ठी करके उस आदमी के पास गई, और देते हुए बोली, भगवान के लिए ये रकम और गहने रख लो, और पापा द्धारा लिया गया कर्ज ले लो, यदि इन गहनों से आपके कर्ज की अदायगी पूरी नहीं हुई तो बचा हुआ कर्ज भी मैं चुका दूंगी, कृपा करके पापा की अर्थी न रोको। इनका संस्कार होने दो।

अब अर्थी पकड़ने वाला शख्स खड़ा हुआ, और सभी लोगों से मुखातिब होते हुए बोला, असल बात ये है, कि मैंने ही मरने वाले से ५ लाख रुपए कर्ज लिया था, जिसको ब्याज सहित मैंने वापस करना था, और इनके किसी वारिस को मैं नहीं जानता था। इसीलिए मैंने यह नाटक किया। इस घटनाक्रम के बाद मुझे पता चल गया है कि इनकी असली वारिस बेटी है, कोई बेटे या भाई नहीं है। तभी कर्जदार आया और उसने उस बेटी को सारे गहने, नकदी और ५ लाख रुपए ब्याज सहित

वापस लौटाए। और वापस लौट गया। लेकिन जाते समय ये बोल गया बेटियों को पराया न समझना।  

कहीं आपके भोजन का स्वाद न बदले …


अक्सर देखा गया हे कि घर में कोशिशों के बाद भी भोजन बच ही जाता है :

आमतौर पर महिलाएं घर में रात के बचे खाने को अगली सुबह नाश्ते में प्रयोग में लती हैं। लेकिन …. 

गर्मी का मौसम है, और इस मौसम में खाना बहुत जल्दी खराब हो जाता है। ऐसे में बचे हुए भोजन को यदि दोबारा

से इस्तेमाल करना हो, तो ठंडा होने के बाद उसे तुरन्त फ्रीज़ में रख देना चहिये। अगर भोजन को बनाये जाने के बाद दोबारा फिर से गर्म किया जा चुका है, और यदि वो मसालेदार शब्जी या दाल हो तो इनको बिलकुल भी दोबारा इस्तेमाल

न ही करें। आइये आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स देने जा रहें जिनसे खाना फिर से गर्म करके और इस्तेमाल करने में सुविधा होगी।

सूखी शब्जी:

सूखी शब्जी पहले पैन में थोड़ा ऑइल डालकर मध्यम आंच पर गर्म करें। फिर

उसमें शब्जी डालकर कुछ देर चलाएं।  यदि शब्जी ग्रेवी वाली ही जैसे आलूदम हैं तो पहले आलू निकाल  कर गर्म कर लें, फिर उसमें ग्रेवी डालकर थोड़ा सा पानी डाल दें। इससे ये होगा कि आपकी शब्जी का स्वाद नहीं बदलेगा।

चावल :

अक्सर बचे हुए चावल सूख जाते हैं। ऐसे में इनको स्टोर करने या दोबारा फिर से इस्तेमाल करने के लिए पैन में दाल लें फिर थोड़ा सा इन पर पानी छिड़क दें, फिर मध्यम आंच पर लगातार चलाते रहें। इससे पैन में चावल चिपगेंगे नहीं बल्कि ताजा बने रहेंगे। यदि आप माइक्रोवेव में गर्म करने जा रहें हैं, तो बॉल में चावल डालकर थोड़ा पानी छिड़क कर बॉल को ढंक कर २-३ मिनट तक गर्म करके बाहर निकाल लें। आप चाहें तो इससे पहले भी ढंक कर फ्रीज़ में रख कर स्टोर करें।

बेहतरी के लिए डायरेक्ट आंच न लगे :

शब्जी, सूप या दाल की ग्रेवी आंच पर कुछ देर रखने पर ही गाढ़ी हो जाती है। इन्हें दोबारा प्रयोग में लाने के लिए गर्म पहले पानी डालते हैं।

दोबारा गर्म करने से बचें :

मेथी और पालक को दोबारा गर्म नहीं करना चहिये। यदि दोबारा प्रयोग में लाना है, तो कुछ देर पहले फ्रीज़ से निकाल कर नॉर्मल टेम्प्रेचर में आने दें। याद रहे इनको दोबारा गर्म करने से इनके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।

कई बार हम समय बचाने के लिए न्यूडल्स और पास्ता को उबालकर रख देते हैं, और कुछ देर बाद ये सख्त और रूखे हो जाते हैं।  यदि इन्हें फिर से मुलायम व तरोताजा करना है तो एक बड़े बर्तन में पानी उबाल लें। अब स्टील की छलनी में न्यूडल्स और पास्ता को डालकर उबलें हुए पानी में डुबोएं।  इसके अलावा उबले पानी को भी इनके ऊपर डाल सकते हैं। याद रहे पास्ता को छलनी में डालकर ही ऐसा करें, वरना ये चिपचिपे हो जायेंगे।

याद रहे भोजन का सेवन, बनने के दो घंटे में ही कर लेना चहिये। इससे भोजन की पौष्टिकता बनी रहेगी। यदि इस्तेमाल के बाद बच जाये, तो तुरंत फ्रीज़ में रख देना चहिये। इससे भोजन में बैक्टीरिया भोजन को खराब नहीं कर पाएंगे। 

यदि गर्मियों में भोजन बनने के दो घंटे से अधिक सामान्य टेम्प्रेचर में रखा गया, तो बैक्टीरिया भोजन को खराब करना शुरू कर देते हैं।

शिशु आहार हमेशा ताजा ही होना चहिये। उसे कभी भी स्टोर न करें।

बचा हुआ भोजन हमेशा पहले से साफ करे हुए बर्तन में ही स्टोर करें, यानी जिस बर्तन में बनाया गया है उसमें कदापि न रखें।

गर्म भोजन को कभी भी फ्रीज़ में न रखें, सामान्य ठंडा होने पर ही स्टोर करना चहिये।

बचे हुए भोजन को फ्रीज़ में ढंककर ही स्टोर करें। इसके अलावा दो दिन से ज्यादा पुराने भोजन को कभी इस्तेमाल न करें।

बचे भोजन को कभी भी ताजे बने भोजन में मिलाकर प्रयोग न करें।

भोजन को बार – बार गर्म करने से बचे। इससे जरूरी पोषक तत्व नष्ट हो जातें।     

बड़े काम की है ये बर्फ …


यूँ तो सभी अपने घर में बर्फ का गर्मियों में इस्तेमाल किसी न किसी कारण से करते हैं। लेकिन हमें ये जानना जरूरी है कि बर्फ के और भी कई फायदे हैं।

गर्मियों में बर्फ का इस्तेमाल लस्सी, शर्बत, जूस, पानी आदि को ठंडा करे के लिए किया जाता है। लेकिन इसके अलावा बर्फ को गर्मियों में होने वाली त्वचा के रोग जैसे घमोरिया, सनबर्न आदि रोगों में कर सकते हैं।

Ice Tube, dolly shot

घमोरिया में बर्फ लगाने से राहत मिलेगी।

दांत के दर्द में बर्फ के पानी से कुल्ला करने और बर्फ मुंह में रखने से दर्द से राहत मिलेगी।

सनबर्न से तुरंत राहत पाने के लिए आइस क्यूब पर गुलाब जल डालकर उसे त्वचा पर रगड़ें।

मोच आने पर प्रभावित जगह पर बर्फ से सिकाई करने से फायदा पहुंचता है।

तलवों में जलन होने पर तोलिये में बर्फ रखकर तलवों पर रखने से लाभ मिलेगा। गर्मी से भी राहत मिलेगी।

यदि त्वचा पर कट लग जाये तो बर्फ रगड़ने से खून रुक जाता है।

यदि वैक्सीन या थ्रेडिंग करने से पहले बर्फ  लगा ली जाये तो दर्द नहीं होगा।

यदि आम को कुछ देर बर्फ  के पानी में रखकर छीला जाये तो छिलका आसानी से उतरेगा।

चेहरे पर बर्फ लगाने से ये छिद्र साफ़ हो जाते हैं, और आपकी त्वचा स्वस्थ, चमकदार और चिकनी हो जाती है।

चेहरे पर मेकअप  लगाने से पहले आइस क्यूब  लगाने से त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनेगी।

आइस क्यूब चेहरे पर लगाने से बड़े छिद्रों को कम कर देता है और अतिरिक्त तेल के उत्पादन को कम करता है।

बिस्तर पर जाने से पहले  हर रात एक कपड़े में दो क्यूब्स बर्फ बाँधें और अपने चेहरे पर मालिश करें। इसके अलावा,

मुंहासे: एक आइस  क्यूब लें और इसे प्रभावित जगह पर लगाएं। आपको राहत और शीतल प्रभाव देने के लिए लालिमा और सूजन काफी कम हो जाती है।

हालाँकि बर्फ का उपयोग सीधे त्वचा पर न करें, इसे कपड़े में रखें, कपड़े को पानी में घोलें।

ये स्किन वाइटनिंग आइस क्यूब्स को धब्बों को हल्का करती हैं और स्किन में ग्लो जोड़ती हैं। यह सन टैन से छुटकारा पाने और असमान स्किन टोन से छुटकारा पाने और गोरा, ग्लोइंग और यहां तक कि रूखापन दूर करने

का भी एक बेहतरीन प्राकृतिक उपचार है। … यह मृत त्वचा कोशिकाओं को बंद करके त्वचा को गोरा करने में काफी मदद करता है, जिससे त्वचा चिकनी और चमकदार हो जाती है।

अपने चेहरे पर बर्फ के टुकड़े लगाने से आपको काले घेरे से निपटने में मदद मिलती है।

इस उपाय को करने के लिए,

आपको केवल बर्फ के टुकड़े और एक तौलिया की आवश्यकता होगी। आइस क्यूब ट्रे से कुछ बर्फ लें और इसे एक साफ तौलिये या साफ कपड़े में रखें। यह आंख के नीचे काले घेरे और पफनेस को कम करने में आपकी मदद करेगा।

Amazing but true …


You will be surprised to know that there are such Shiva temples in India, from Kedarnath to Rameswaram, a direct made in line. Wondering that our ancestors had such a science and technology, did not understand till date?

Kedarnath of Uttarakhand, Kaleshwaram of Telangana, Kalahasti of Andhra Pradesh, Ekbandeshwar of Tamil Nadu, Chidambaram and finally Rameswaram temples have been constructed in the geographical straight line of 79 degree E41 ’54 “longitude.

This whole temple represents the expression of gender in 5 elements of nature, which we call the Panch ghost in common language. Punch ghost means earth, fire, air, water and sky. Based on these five elements, these five Shiv Lingas have been established.

Water is represented in the Thiruvanavakal temple, Agni is represented in Tiruvannamalai, the air is represented by Kahalaste

The earth is represented in Kanchipuram, and finally the representation of the sky is in the Chidambaram temple. Vaastu Science-Vedic These five temples show an amazing connection. Geographically, specialty is also found in these temples. These five temples were built according to the science of yoga, and have been placed in a definite geographic alignment with each other. There will definitely be some science behind this will have effect above.

These temples were constructed approximately four thousand years ago. When to measure the latitude of longitude of those places satellite technology was not available. Then how were the five temples so accurately replaced? The answer

God knows only

The distance between Kedarnath and Rameswaram is 2383 km. But the temple falls in almost the same parallel line. After all

Which temples have been used in the parallel line by using the technique earlier this year, it is mystery till date. Mr.Kalahasti

The flickering lamp in the temple reveals that it is wind sex. The Thiruvanika temple reveals the water spring in the inner plateau

That is the water penis. The huge lamp on the Annamalai hill shows that it is a fire penis. From the self-styled gender of sand of Kanchipuram

It is revealed that it is the earth gender, and the infinite form of Chidambaram reveals God’s formlessness ie the sky element is.

Now it is not surprising if it is that the five sexes representing the five elements of the universe in a similar line

It has been established centuries ago. We must be proud of the knowledge and wisdom of our ancestors, that they have such science and Technology, which has not even distinguished modern science. It is believed that only these five temples are there but many temples in this line

Those who fall in the straight line from Kedarnath to Rameshwaram This line is also called ‘Shiva – Shakti Aksh Line’. Maybe this

The Surya temple has been built keeping Kailash in mind, which is 81. It falls into 311 9 degree E. Answer: Shivaji know only …

Amazing thing is there is a direct connection between Shiva Jyotirlinges from ‘Mahakal’ …

The repetition of remaining Jyotirlingas from Ujjain is also interesting –

Somnath from Ujjain – 777 km

Omkareshwar from Ujjain – 111 km

Bhimashankar-666 km from Ujjain

Ujjain Se Kis Vishwanath – 999 km

Ujjain to Mallikjurn- 999 km

Ujjain to Kedarnath – 888 km

Ujjain to Trimbakeshwar – 555 km

Bijnath from Ujjain – 999 km

Rameswaram from Ujjain – 1 999 km

Ujjain to Ghrishneshwar – 555 km

It is to be remembered that nothing in Hinduism was due to non-causality and it is. Ujjain is considered to be the center of the Earth. Those who believe in Sanatan Dharma for thousands of years have been coming to the center.

That is why man-made instruments have also been made for calculating Sun and calculating astrology in Ujjain, which is close
2050 years ago, and when about 100 years ago the imaginary line (cancer) on Earth was created by the English scientist
His middle part is Ujjain. Even today, scientific Ujjain is in the dark, for information about the sun and the space.

उपलब्धि


देश को विकास, सुरक्षा और ताकत की रफ्तार देते हुए इसरो ने आज २२ मई २०१९ में RISAT -२B सेटेलाइट को श्री हरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से सुबह ५:३० बजे सफलतापूर्वक लांच किया।

आइये जानते हैं कि यह सेटेलाइट हमारी सेनाओं और सुरक्षा बलों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है….

इस प्रेक्षपण के बाद अब भारत हर मौसम में चाहे रात हो, बादल हों या बारिश, अंतरिक्ष से दुश्‍मनों पर बारीकी से नजर रखेगा।

सीमाओं की निगरानी और घुसपैठ रोकने में मदद मिलेगी।

बादल रहने पर रेगुलर रिमोट सेंसिंग या ऑप्टिकल इमेजिंग सैटेलाइट भी जमीन पर मौजूद ऑब्‍जेक्‍ट की सटीक पोजिशन नहीं दिखा पाते। यह सेटेलाइट इस कमी को पूरा करेगा। यह हर मौसम में चाहे रात हो, बादल हो या बारिश,

ऑब्जेक्ट की सटीक लोकेशन और उसकी तस्‍वीरें जारी करेगा। खराब मौसम में भी यह देश के भीतर, दुश्‍मन देशों और भारतीय सीमाओं की निगरानी कर सकेगा।

हाई रेजोल्यूशन की तस्वीरें लेने में सक्षम :

ऐसा नहीं कि सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्‍ट्राइक में इस्तेमाल हुए उपग्रह भी हाई रेजोल्यूशन की तस्वीरें लेने में सक्षम नहीं हैं। रीसैट-2बी सेटेलाइट   उन उपग्रहों से अलग इस मामले में है, कि खराब से खराब मौसम और घने बादलों में भी इससे हाई रेजोल्यूशन की तस्वीरें ली जा सकती हैं। सक्रिय एसएआर (सिंथेटिक अर्पचर रडार) से लैस इस उपग्रह से अंतरिक्ष से जमीन पर तीन फुट की ऊंचाई तक की बेहद उम्‍दा तस्वीरें ली जा सकेगी। 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष डॉ. के. शिवन के मुताबिक, पीएसएलवी-सी46, ने रिसेट-2बी उपग्रह को 555 किलोमीटर की ऊंचाई पर महज 15 मिनट 30 सेकेंड में सफलतापूर्वक पृथ्‍वी के निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में 37 डिग्री झुकाव पर स्‍थापित करने में मदद की।अब आसानी से जुटाए जा सकेंगे सर्जिकल या एयर स्‍टाइकों के सबूत :

मालूम हो कि बीते 26 फरवरी को भारतीय वायु सेना ने पाकिस्‍तान के बालाकोट में जब आतंकियों के ठिकानों पर एयर स्‍ट्राइक की थी तो  उस वक्‍त मौसम खराब था और आसमान में घने बादल थे। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि तब अंतरिक्ष में मौजूद भारतीय उपग्रह बादलों की परिस्‍थ‍ितियों के चलते ऐसी घटनाओं की तस्‍वीरें या वीडियो लेने में सक्षम  नहीं थे। राजनीतिक कारणों से देश की विपक्षी पार्टियां भी ऐसी स्‍ट्राइकों के सबूत को लेकर आवाज उठाती हैं। लेकिन, अब हमारी सेनाओं को सर्जिकल स्‍ट्राइक या एयर स्‍टाइकों के सबूतों के लिए अलग से मेहनत करने की जरूरत नहीं होगी इस उपग्रह की मदद

से अब बालाकोट एयर स्‍ट्राइक जैसे अभियानों की तस्‍वीरें भी ली जा सकेंगी। 

देश में कई जगह आपदा राहत कार्य में इसकी सहायता से अब पहले की तुलना में ज्यादा मिलेगी मदद : 

रीसैट-2बी सेटेलाइट  का भार 615 किलोग्राम है। खुफिया निगरानी के अलावा इससे कृषि, वन एवं आपदा राहत कार्यों में मदद मिलेगी। इसकी मदद से बाढ़ और तूफान के कारण हुए नुकसान का आकलन करने में आसानी होगी। साथ ही

फसलों के उत्‍पादन का अनुमान भी लगाया जा सकेगा। खरीफ के सीजन (मई से सितंबर) में जब आकाश में बादल होते हैं, इसकी मदद से फसलों की स्थिति, नुकसान आदि का पता लगाया जा सकेगा।

वैज्ञानिकों का दावा है कि इस तरह की निगरानी तकनीक कुछ ही देशों के पास है।

वैज्ञानिक इस सफलता के लिए बधाई के पात्र हैं।

आश्चर्यजनक लेकिन सत्य, शिवलिंग की महिमा …


आपको  यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में ऐसे शिव मंदिर हैं, जो केदारनाथ से लेकर रामेश्वरम तक एक सीधी रेखा में बनाये गए हैं। आश्चर्य है कि हमारे पूर्वजों के पास ऐसा विज्ञानं और तकनीक थी,  आज तक समझ ही नहीं पाए ?उत्तराखंड का केदारनाथ, तेलंगाना का कालेश्वरम, आंध्र प्रदेश का कालहस्ती, तमिलनाडु का एकंबरेश्वर, चिदंबरम और अंततः रामेश्वरम मंदिरों को ७९ डिग्री E ४१’ ५४ ” Longitude के भौगोलिक सीधी रेखा में बनाया गया है।

यह सारे मंदिर प्रकृति के ५ तत्वों में लिंग की अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसे हम आम भाषा में पंच भूत कहते हैं।

पंच भूत यानी पृथ्वी, अग्नि, वायु, जल और आकाश। इन्हीं पांच तत्वों के आधार पर इन पांच शिव लिंगों को प्रतिष्ठापित किया है।

जल का प्रतिनिधित्व तिरुवनैकवल मंदिर में है, अग्नि का प्रतिनिधित्व तिरुवन्नमलई में है, वायु का प्रतिनिधित्व कालाहस्ती में है, पृथ्वी का प्रतिनिधित्व कांचीपुरम में है, और अंत में आकाश का प्रतिनीधित्व चिदंबरम मंदिर में है। वास्तु विज्ञानं-वेद का अद्भुत समागम को दर्शाते हैं ये पांच मंदिर।

भौगोलिक रूप से  भी इन मंदिरों में विशेषता पायी जाती है। इन पांच मंदिरों को योग विज्ञानं के अनुसार बनाया गया था, और एक दूसरे के साथ एक निश्चित भौगोलिक संरेखण में रखा गया है। इसके पीछे निश्चित ही कोई विज्ञानं होगा जो मनुष्य के शरीर के ऊपर प्रभाव करता होगा।

इन मंदिरों का करीब चार हजार वर्ष पूर्व निर्माण किया गया था। जब उन स्थानों के अक्षांश और देशांतर को मापने के लिए कोई उपग्रह तकनीक उपलब्ध ही नहीं थी। तो फिर कैसे इतने सटीक रूप से पांच मंदिरों को प्रतिस्थापित किया गया था  ? इसका उत्तर भगवान ही जाने। केदारनाथ और रामेश्वरम के बीच २३८३ किमी की  दूरी है। लेकिन  मंदिर लगभग एक ही समानांतर रेखा में पड़ते हैं। आखिर हजारों वर्ष पूर्व किस तकनीक का उपयोग करके इन मंदिरों को समानांतर रेखा में बनाया गया है, यह आज तक रहस्य ही है। श्रीकालहस्ती

मंदिर में टिमटिमाते दीपक से पता चलता है कि वह वायु लिंग है। तिरुवनिक्का मंदिर के अंदरूनी पठार  में जल बसंत से पता चलता है कि वह जल लिंग है। अन्नामलाई पहाड़ी पर विशाल दीपक से पता चलता है कि वह अग्नि लिंग है। कांचीपुरम के रेत के स्वयंभू लिंग से पता चलता है कि वह पृथ्वी लिंग है, और चिदंबरम की निराकार अवस्था से भगवान के निराकारता यानी आकाश तत्व का पता चलता है।

अब ये आश्चर्य की बात नहीं तो और क्या है कि ब्रह्माण्ड के पांच तत्वों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच लिंगों को एक समान रेखा में सदियों पूर्व ही प्रतिष्ठापित किया गया है। हमें हमारे पूर्वजों के ज्ञान और बुद्धिमता पर गर्व होना चहिये, कि उनके पास ऐसा विज्ञानं और तकनीक थी, जिसे आधुनिक विज्ञानं भी नहीं भेद पाया है। माना जाता है कि केवल ये पांच मंदिर ही वहीं अपितु इसी रेखा में अनेक मंदिर होंगें जो केदारनाथ से रामेश्वरम तक सीधी रेखा में पड़ते हैं। इस रेखा को ‘ शिव – शक्ति अक्श रेखा ‘ भी कहा जाता है। सम्भवतया ये सारे मंदिर कैलाश को ध्यान में रखते हुए बनाया गया हो जो ८१. 31१९ डिग्री E में पड़ता है। उत्तर शिवजी ही जानें… 

कमाल  की बात है ‘ महाकाल ‘ से शिव ज्योतिर्लिंगों के बीच कैसा सीधा संबंध है…

उज्जैन से शेष ज्योतिर्लिंगों की दुरु भी रोचक है —

उज्जैन से सोमनाथ – ७७७ किमी

उज्जैन से ओंकारेश्वर – १११ किमी

उज्जैन से भीमाशंकर -६६६ किमी

उज्जैन से कशी विश्वनाथ – ९९९ किमी

उज्जैन से मल्लिकाजुर्न- ९९९ किमी

उज्जैन से केदारनाथ – ८८८ किमी

उज्जैन से त्र्यंबकेश्वर – ५५५ किमी

उज्जैन से बैजनाथ – ९९९ किमी

उज्जैन से रामेश्वरम – १९९९ किमी

उज्जैन से घृष्णेश्वर – ५५५ किमी

यहां यह बात स्मरण करने की है कि हिन्दू धर्म में कुछ भी बिना कारण के नहीं होता था और है। उज्जैन पृथ्वी का केंद्र माना जाता है। जो सनातन धर्म में हजारों सालों से केंद्र मानते आ रहें हैं।

इसीलिए उज्जैन में सूर्य की  गणना और ज्योतिष गणना के लिए मानव निर्मित यंत्र भी बनाये गए हैं, जो करीब २०५० वर्ष पहले, और जब करीब १०० वर्ष पहले पृथ्वी पर काल्पनिक रेखा (कर्क) अंग्रेज वैज्ञानिक द्धारा बनाई गई, तो

उनका  मध्य भाग उज्जैन ही निकला। आज भी वैज्ञानिक उज्जैन ही आतें हैं, सूर्य और अंतरिक्ष की जानकारी के लिए।