Hello friends…..


1st April is named fool’s day, after steve , he was born on 1st April 1579. he did 105 business in his life time. He
lost all his assets, and so everyone started calling him father’s of fools.
At 19, he married a 61 year old woman who discovered him after a year because of his foolness. He used to read
all kinds of fake stories like you are doing now.
It’s is great idea fooling you.
HAPPY APRIL FOOL’S DAY…
Lough Out Loud….!

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Climate change colors due to global warming


Climate change colors due to global warming
The changing colors of the weather have taken its worst attitude since last month. However, behind the effect is … .. Global warming
is the end of the month MarClimate change colors due to global warming
The changing colors of the weather have taken its worst attitude since last month. However, behind the effect is … .. Global warming
is the end of the month March corner, but hey still hangs season trenchant as it is, the way the human body nature has so much power been this season is
the roller-coaster ride of According to the fluctuation in temperature, it can shield itself …. But occasionally man’s immune system is eaten … This time it is sensitized for humans ……, In fact, mood of weather in the morning. G is O and O something else in the evening, … put the past winter treat was,
at the placed packed clothes washed Khrine winter …., But they do come with clear spells in the sky suddenly went dark Rain drops
It starts raining …, the temperature drops again, due to the change in weather, the human body also
has to spend internal energy to balance the body temperature according to temperature fluctuations , or say that the body’s energy The extra energy is spent. Because of this, many
actions of the body become fractured due to these actions, besides keeping the body’s immune system strong and
controlling the arteries and respiratory tracts of the body . With these sudden energy expenditure, these actions have an impact. Bacteria, fungus, viruses are present in the living room in the atmosphere, and they become activated in this changing season, and come in the currency of the attack …. In breathing in the body, in the respiratory system and
In the vein which enter the control from the respiratory system, enter. They destroy the process there; its effect is in the form of colds, colds,
allergies, sneezes, fever in human body .
Due to the changing weather, temperature fluctuations in the body cause problems like pain, stiffness in the body.
How to defend
Do not change clothes completely, tolerate for a few days. Take special care of the children, keep the body covered. Keep wearing inner inside. Eat lukewarm water. Do not play wings, cooler AC.
Keep doing physical work, body will remain in action, pain will decrease,
green words, fruits, yogurt, oats, eat raw garlic buds, contain antioxidant elements in it, take green tea, remember one or two times only or
Take two cups, take things with carbohydrates, eat dry fruits (almonds, walnuts), bananas. This will improve the body’s immune system.
ch corner, but hey still hangs season trenchant as it is, the way the human body nature has so much power been this season is
the roller-coaster ride of According to the fluctuation in temperature, it can shield itself …. But occasionally man’s immune system is eaten … This time it is sensitized for humans ……, In fact, mood of weather in the morning. G is O and O something else in the evening, … put the past winter treat was,
at the placed packed clothes washed Khrine winter …., But they do come with clear spells in the sky suddenly went dark Rain drops
It starts raining …, the temperature drops again, due to the change in weather, the human body also
has to spend internal energy to balance the body temperature according to temperature fluctuations , or say that the body’s energy The extra energy is spent. Because of this, many
actions of the body become fractured due to these actions, besides keeping the body’s immune system strong and
controlling the arteries and respiratory tracts of the body . With these sudden energy expenditure, these actions have an impact. Bacteria, fungus, viruses are present in the living room in the atmosphere, and they become activated in this changing season, and come in the currency of the attack …. In breathing in the body, in the respiratory system and
In the vein which enter the control from the respiratory system, enter. They destroy the process there; its effect is in the form of colds, colds,
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Due to the changing weather, temperature fluctuations in the body cause problems like pain, stiffness in the body.
How to defend
Do not change clothes completely, tolerate for a few days. Take special care of the children, keep the body covered. Keep wearing inner inside. Eat lukewarm water. Do not play wings, cooler AC.
Keep doing physical work, body will remain in action, pain will decrease,
green words, fruits, yogurt, oats, eat raw garlic buds, contain antioxidant elements in it, take green tea, remember one or two times only or
Take two cups, take things with carbohydrates, eat dry fruits (almonds, walnuts), bananas. This will improve the body’s immune system.

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से रंग बदलता मौसम


लगभग पिछले माह से मौसम के बदलते रंग ने अपना तल्ख रवैया अख्तियार किया हुआ हे। हालाँकि इसके पीछे ग्लोबल वार्मिंग का ही इफ़ेक्ट हे…..
मार्च का महीना समाप्त कोने को हे , लेकिन मौसम की तल्खी ज्यों की त्यों बनी हुई हे , वैसे तो मनुष्य के शरीर को कुदरत ने इतनी शक्ति दी हे की ये मौसम
के उठा पटक से तापमान में हुए उतार चढ़ाव के अनुसार अपने को ढाल सके…., लेकिन कभी कभी मनुस्य का इम्युनिम सिस्टम गच्चा खा जाता हे… यही समय मनुष्य के लिए सेंसेटिव होता हे…., दरअसल सुबह मौसम का मिजाज कुछ होता हे और शाम को कुछ और होता हे,… पिछले दिनों लगा सर्दी गयी समझो ,
घर में सर्दियों के कपड़े धोकर क़रीने से पैक करके रख दिए गए…., लेकिन ये क्या, अचानक से आसमान में बादल उमड़ते हुए आये और छा गए, वर्षा की बूंदे
बरसने लगती हैं… , तापमान में फिर से गिरावट आ जाती है, मौसम के बदलते तेवर से मनुष्य के शरीर को भी तापमान के उतार चढ़ाव के अनुसार शारीरिक
तापमान का बैलेंस बनाने के लिए आंतरिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है , या यूँ कहें की शरीर की अतिरिक्त ऊर्जा खर्च हो जाती है। .,इसी वजह से शरीर की कई
क्रियाएं अस्त – ब्यस्त हो जाती हैं, इन्ही क्रियाओं के कारण ही शरीर का इम्युनिम सिस्टम स्ट्रोंग रखने के अलावा शरीर की रक्तवाहिनी और स्वसन नालियों
को नियंत्रित रखना होता हे। इस आकस्मिक ऊर्जा खर्च होने से इन क्रियाओँ पर असर पड़ता है । वायु मंडल में बैक्टीरिया, फंगस, वायरस आदि जीवित अवस्था में मौजूद रहते हैं, तथा इस बदलते मौसम में ये सक्रिय हो जाते हैं, और अटैक की मुद्रा में आ जाते हैं…., शरीर में साँस के द्वारा ये श्वसन तंत्र में और
रक्तवाहिनी में जो श्वसन तंत्र से कंट्रोल होती है, में प्रवेश कर जाते हैं। वहां की प्रकिया को नष्ट कर देते हैं, इसका असर मनुष्य के शरीर में सर्दी, जुकाम,
एलर्जी , छींकें, बुखार के रूप में होता है ।
इस बदलते मौसम के कारण तापमान में हुए उतार चड़ाव से शरीर में दर्द, जकड़न जैसी समस्याएं हो जाती हैं।
बचाव कैसे करें….!

एकदम से कपड़े चेंज न करें, कुछ दिन सहन करें। बच्चो का विशेष ख्याल रखें , शरीर को ढक कर रखें । अन्दर इनर पहने रखें । गुनगुने पानी का सेवन करें। पंखें, कूलर AC ना चलायें।
फिजिकल वर्क करते रहें, शरीर हरकत में रहेगा, दर्द में कमी होगी,
हरी शब्जी, फल,दही, ओट्स, हो सके कच्चे लहसुन की कलियाँ खाएं इसमें एंटीऑक्सीडेंट तत्व होते हैं, ग्रीन टी लें, याद रहे एक या दो टाइम ही एक या दो
कप लें, कार्बोहइड्रेट वाली चीजें ले, ड्राई फ्रूट्स (बादाम, अखरोट), केला खाएं। इससे शरीर का इम्यून सिस्टम ठीक होगा ।

Today’s Tips


The navel is directly related to the organs inside our body, if the edges of the feet have exploded, then lie down on the bed while you sleep at night, put
some drops of mustard oil in the navel, and massage with finger until then Do not rum until you go, after a few days the difference will start, but you have to do all the rest till the rest. Gap did not come in between.

1. Keep the clothes clean,
do not move nails.

आज का टिप्स


नाभि का हमारे शरीर के अंदर के अंगों से सीधा सम्बंध है, यदि पैरों की एड़ियां फट गई हैं, तो आप रात को सोने के समय बैड पर सीधे लेट जाएं, सरसों के तेल की
कुछ बूंदें नाभि में डालें, औऱ उंगली से तब तक मसाज करें जब तक रम न जाए, कुछ दिनों के बाद फर्क आना शुरू हो जाएगा, केकिन आपने पूरा आराम आने तक करना है। बीच मे गैप न आये।

1.पैरों को साफ रखें,
2.नंगे पैर न चलें।

सिटी ब्यूटीफुल यानि चंडीगढ़ में ये नहीं देखा तो क्या देखा…..!


हैलो दोस्तों , कैसे है आप,
चलें आज मैं आपको अपने देश के वैल प्लान्ड ,एक तरह से विकसित इस सुँदर शहर के बारे में बताता हूँ,जिसे सिटी ब्यूटीफुल के नाम से भी जाना जाता है, यदि चंडीगढ़ पहले आप कभी न आयें हो तो अबकी बार जब भी घूमने का मूड बने तो अपनी फ़ैमिली, मित्रों के साथ जरूर घूमने आएं !

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आजादी के समय भारत पाकिस्तान के बंटवारे के बाद पंजाब का कुछ हिस्सा पाकिस्तान में चला गया, यहां तक कि पंजाब की राजधानी लाहौर भी पाकिस्तान में चली गयी, इसके बाद पंजाब की राजधानी की जरूरत पड़ी ! भारतीय पंजाब का हिस्सा पूर्वी पंजाब और पाकिस्तान के पंजाब का हिस्सा पश्च्मि पंजाब कहलाया गया.!देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं जवाहरलाल नेहरू ने पंजाब की राजधानी बनाने के लिए खूबसूरत शहर की कल्पना की, इसके के उपरांत वर्ष १९५० में पंजाब की राजधानी बनाने के लिए इसकी जिम्मेदारी फ़्रांस के मशहूर आर्किटेक्ट “ली कार्बूजिए” को सौंपी गयी, ली कार…ने एक योजनाबद्द राजधानी के लिए एक ऐसा शहर जिसमे आधुनिक सुविधाओं से लैस वेल प्लांड शहर की रूप रेखा तैयार की, और उसको साकार रूप दिया, वर्ष १९५२ में चंड़ीगढ़ की नीँव रखी गयी.! शहर का प्लान करते हुए इस बात का ध्यान रखा गया, यहां पर लेटेस्ट तरीके की सुख सुविधाओं के अलावा प्राचीन भारतीय संस्कृति की प्रसिद्ध परम्पराएं भी साफ तौर पर नजर आएं ! इसीलिए इस शहर का नाम माँ चंडी देवी के नाम पर रखा गया, चंडीगढ़ मतलब चंडी का किला, माँ चंडी देवी मंदिर चंडीगढ़ कालका रोड पर स्थित है।

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यहां श्रद्धालुओं की भीड़ नवरात्रि के दिनों में खास होती है।
ली कार्बू….ने इस शहर के लिए एक खूबसूरत लोगो का डिज़ाइन “ओपन हाथ”, जो कार्बू… की थीम का ही एक हिस्सा है, मतलब शांति और पुर्नस्थापना का प्रतीक है।
ली कार्बूजे… ने ओपन हैंड मोन्यूमेंट चंडीगढ़ के राजधानी काम्प्लेक्स सेक्टर १ में स्थापित किया।
चंडीगढ़ में ५६ सेक्टर हैं , लेकिन ली कार्बूजे…जो १३ अंक को अशुभ मानते थे, इसीलिए उन्होंने चंडीगढ़ में सेक्टर १२ के बाद सेक्टर १४ की स्थापना की ।
वर्ष १९६६ में हरियाणा राज्य के अस्तित्व में आने के बाद चंडीगढ़ को यू टी, केंद्रशासित राज्य का दर्जा दिया गया, इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण, ये पंजाब के अलावा हरियाणा राज्य से सटा होने के कारण इसको हरियाणा , पंजाब दोनों की राजधानी बना दिया गया, इसके अलावा चंडीगढ़ का रेलवे स्टेशन भी दो शहरों का कंबाइंड स्टेशन है, इसका एक प्लेटफॉर्म हरियाणा में पंचकूला से ओर दूसरा चंडीगढ़ की तरफ है।
चंडीगढ़ हिमालय की शिवालिक पर्वतमाला की तराई में देश के उत्तर पश्चिम में स्थित भारत के ७ (सेवन) केंद्र शासित प्रदेशों में से एक हे ! इस शहर का एरिया लगभग ४५ वर्ग मील हे, इसकी हाइट समुंद्र तल से १०५४ फ़ीट हे !
संविधान की धारा २३९ के अनुसार यहां नियुक्त किये गए प्रशासक के चंडीगढ़ में आमतौर पर सभी धर्मों के लोग रहते हैं, तथा बोलचाल की भाषा पंजाबी, हिंदी और इंग्लिश है । चंडीगढ़ अपनी खुली साफ क्वालिटी की सड़कों के लिए देश में जाना जाता है ।

rok garden
ये ली कार्बूजिए की दूरदर्शी सोच का नतीजा हे, उन्होंने शहर को बारिश के पानी से, शहर तक न पहुंचे, इसके लिए बांध बनाया, उस बांध पर ४० फ़ीट का रास्ता
पैदल चलने के लिए बनाया, इसके चारोँ तरफ हरियाली के लिए पेड़ लगाए गए, इसको ही सुखना लेक कहते हैं, यहां पूरे वर्ष झील पानी से भरी रहती हे, पूरे वर्ष सुखना लेक पर पर्यटकों की भीड़ उमड़ी रहती है, प्रशासन द्वारा चंडीगढ़ की सुन्दता के लिए जगह जगह सफाई, खूबसरत पार्कों, सुंदर मौसमी फूलों के नजारे यहां वर्ष भर देखने को मिल जायेंगे, पूरा चंडीगढ़ हरियाली, सफाई के लिए माना जाता है ! इसके अलावा चंडीगढ़ के पास ही छतबीड़ जू में आप सफारी में घूम सकते हैं । इसके अलावा यहां पी जी आई के साथ ही मुल्लांपुर में सरकार ने न्यू चंडीगढ़ को बनाने के लिए जगह एक्वायर की है,यहां ओमेक्स जैसी बढ़े रेजिडेंशियल काम्प्लेक्स बन रहे हैं ।
चंडीगढ़ की संस्कृति मॉडर्न है। आम बोलचाल में हिंदी, इंग्लिश ही ज्यादा चलन में है, पर्यटन के हिसाब से यहां सुखना लेक इसके साथ लगते रॉक गार्डन,गार्डन के साथ ही पंजाब, हरियाणा हाई कोर्ट है ! इसके अलावा रोज गार्डन, सरकारी संघ्रालय ,जापानी गार्डन, म्यूजिकल फाउंटेन, बटरफ्लाई, आर्ट गैलरी और बॉटनिक गार्डन, इसके अलावा ३५० एकड़ में बना राजीव गाँधी चंडीगढ़ टेक्नोलॉजी पार्क,साथ पंचकूला में हिल स्टेशन मोरनी हिल उसके पास गुरु गोविन्द सिंह जी का हिस्टोरिकल नाडा साहिब गुरुद्वारा आदि घूमने लायक है !
यूँ चंडीगढ़ टूरिज्म द्वारा सेक्टर १७ से स्पेशल ओपन बस टूरिस्टों के लिए रेगुलर जाती हे, इससे आप सुखना लेक, रोक गार्डन घूमने जा सकते हैं ।
चंडीगढ़ से शिमला १२० कि मि की दूरी पर है !
शिमला जाने के लिए आपके पास कई ऑप्शन हैं, आप by air हलोकॉप्टर, सड़क या ट्रेन किसी से भी जा सकते हैं, ये आपके बजट और समय पर डिपेन्ड
करता हे । आप हेलीकॉप्टर से २५ से ३० मिनट में शिमला पहुंच सकते हैं, यहां से शिमला के लिए हर तरह की बस सर्विस, चाहे वॉल्वो बस हो,या रोडवेज बस, रेगुलर सर्विस हे यदि आपके पास समय और फुल एन्जॉय करने का मूड है तो आप वाया सुंदर छोटे हिल स्टेशन कसौली सड़क मार्ग से कैब लेकर जा सकते हैं, यहां सुंदर छोटी मार्किट है, ठहरने के लिए पर्याप्त होटल हैं, ये कैन्टोमेंट एरिया है, यहां से भी शिमला जाने लिए आपके सामने दो ऑप्शन हैं, यदि टॉय ट्रेन से जाना चाहें तो पास ही कैब से धर्मपुर रेलवे स्टेशन महज १५ कि मि की दूरी पर है, यहां से यहां से टॉय ट्रेन से जा सकते हैं, या बस, कैब से जा सकते हैं ! इसके अलावा चंडीगढ़ से ट्रेन, बस या कैब द्वारा पहले कालका जाकर, कालका से टॉय ट्रेन से शिमला जाने के ऑप्शन हैं , कालका शिमला रेल सेक्शन वर्ल्ड हैरीटेज में २४ जुलाई २००८ में आया था, इससे भी सफर का आनंद ले सकते हैं , इसके रास्ते में १०२ टनल आती हैं, जिसमे रास्ते में बड़ोग की टनल सबसे बड़ी हे , इसकी ( length) लम्बाई ११४३ mt. हे, यदि आप पहली बार शिमला जा रहे हैं तो मैं आपको टॉय ट्रेन से जाने को बोलूंगा,जो अंग्रेजों द्वारा ९ नव १९०३ को शुरू की गयी ।
ये हसीन हरियाली वादियों से घूमती हुई जाती हुई,और खूबसूरत नजारे देखने का अलग ही अनुभव हे । ऐसा लगता हे जैसे स्वर्ग में आ गए ।
धर्मशाला। …
धर्मशाला चंडीगढ़ से २५० कि मि की दूरी पर हे ,यहां से जाने के लिए आपके पास दो ऑप्शन हैं , एक by Air या सड़क मार्ग से जा सकते हैं , चंडीगढ़ से वॉल्वो, प्राइवेट ए सी (AC) और रोडवेज की रेगुलर बसें मिल जाती हैं !
चंडीगढ़ कैसे पहुंचें…….!

वैसे तो चंडीगढ़ में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है, यहाँ इंटरनेशनल फ्लाइट्स के अलावा डोमेस्टिक (घरेलू) फ्लाइट्स दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, भोपाल से सीधे घरेलू फ्लाइट्स हैं।

दिल्ली एयरपोर्ट से चंडीगढ़ के लिए वॉल्वो, व प्राइवेट बसों की रेगुलर सर्विस है।

ट्रेन्स ….चंडीगढ़ में चेन्नई , लखनऊ , मुंबई, हावड़ा, दिल्ली से जन शताब्दी एक्सप्रेस, देहरादून आदि से मुख्य ट्रेन्स आती हैं।
इसके अलावा देश के अलग अलग शहरों से रोडवेज की बसें रेगुलर आती हैं।

यहाँ आप एक बार आएंगे, बार बार आने को दिल करेगा।

भोजन के बाद फल, आइसक्रीम…तो नहीं लेते…..?


हैलो दोस्तों कैसे हैं…

आज हम खाने के बारे में बात करते हैं, खाने में किस खाने के साथ या खाने के बाद में क्या नहीं खाना चाहिए, यानि फ़ूड कॉम्बिनेशन में क्या अवॉइड करें, इसी पर चर्चा करते हैं

प्रकति ने हमारे लिये हर मौसम के हिसाब से खाने को बहुत खूब उपलब्घ कराया है, किसी की तासीर गर्म होती है, किसी की ठंडी होती है। हर खाने पीने की चीजों का अपना स्वाद होता है, अपनी तासीर होती है, और पाचन के बाद शरीर पर उसका क्या इफ़ेक्ट होता है, ये जानना बेहद जरुरी है, इसीलिए कोई भी दो अलग अलग फूड खाते समय इस बात का खयाल रखना जरूरी है, कहीं इन दोनों के कॉम्बिनेशन का हमारी सेहत पर कोई नकारात्मक असर तो नही पड़ेगा।

चलिये आज हम आपको कुछ ऐसे ही फूड कॉम्बिनेशन के बारे में बताते हैं, जिन्हें हमें अच्छी हैल्थ के लिये अवॉइड करना जरूरी है।

जरूरी नहीं जो चीज हमें स्वाद लगती हो वो हमारी सेहत के लिए ठीक हो। ऐसे में हमें स्वाद से थोड़ा सा समझौता भी करना पड़े तो इसमें संकोच ना करें, यानि हिचकिचाएं ना।

आइये जानते हैं कौन से फ़ूड ऐसे हैं।

1. भोजन के साथ तुरंत बाद कोल्डड्रिंक्स ।

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पुराने ग्रन्थों यानि आयुर्वेद के अनुसार भोजन शरीर के सभी टिस्यूज तक पहुंच कर उनका पोषण करता है या यूं कहें उन्हें पोषित करता है, इसीलिए हमें खाना ऐसा खाना चाहिए। अक्सर कई लोगों की ये आदत होती है, वे खाने के बाद या तुरंत बाद कोल्डड्रिंक्स, इसमें सोडे वाला कार्बोनेटेड ड्रिंक्स लेते हैं। अक्सर देखा गया है पिज़्जा के साथ कोल्डड्रिंक्स लेते हैं। लेकिन ये ड्रिंक भोजन से शरीर में मिलने वाले पोषण में बाधा उत्पन्न करता है, यहां तक कि कोल्डड्रिंक्स अमाशय में भोजन को पचाने में सहायक एन्जाइम्स को भी नुक्सान पहुंचाता है, जिससे हमारी पाचन क्रिया खराब होती है।

2. भोजन के साथ या तुरंत बाद फल ।

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फलों में फाइबर्स ओर शकर होने की वजह से ये जल्दी पच जाते हैं, जबकि इसके विपरीत भोजन में फैट, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट ओर स्टार्च जैसे तत्व होते हैं, जिन्हें पचने में अपेक्षाकृत ज्यादा समय लगता है। इसी वजह से भोजन के साथ या तुरंत बाद फल, यहांतक कि फ्रूट चाट कदापि ना खायें। इनका कोई लाभ होने के बजाय हानि होती है, फल अमाशय में सड़ने लगते हैं।

3. दूध के साथ फल

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आयुर्वेद के अनुसार दूध की पाचन क्रिया अन्य फ़ूड से अलग होती है, दूध पीने का सबसे ज्यादा फायदा तब मिलता है जब इसे अकेला ही लिया जाये। किसी के साथ मिलाकर ना लिया जाये।, हाँ यदि कॉर्नफ्लेक्स जैसे कुछ nan yisti फ़ूड के साथ लिया जा सकता है, हाँ फलों के साथ दूध का कॉम्बिनेशन अवॉइड करना चाहिए, इसमें मिल्कशेक भी खराब करता है।

4. फ़ूड के साथ आइस क्रीम

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हमारे समाज में आम चलन है, खासकर मैरिज , पार्टियों में भोजन के बाद आइस क्रीम खाने खिलाने की परम्परा सी बन गई है। लेकिन इसका दुष्प्रभाव हमारी पाचन क्रिया के लिए तो बिल्कुल उचित नहीं है। आयुर्वेद के अनुसार भोजन खाने के बाद पाचन अग्नि यानि जठराग्नि जरूरी है हमारे भोजन को पचाने के लिए। जबकि भोजन के तुरंत बाद आइस क्रीम खाने से जठराग्नि पैदा ही नहीं हो पाती। इससे हमारी पाचन क्रिया खराब होती है।

5. दूध के साथ अंडा, मांस

आयुर्वेद के अनुसार दूध के साथ या तुरंत बाद में फिश, मांस ओर अंडा नहीं लेना चाहिए। इसका कारण यह है कि नॉनवेज में जो प्रोटीन होता है वह दूध के प्रोटीन से बिल्कुल उलट होता है। दूध अमाशय में न पचकर ड्यूडनम ( पेट ओर छोटी आंत के बीच की जगह) में ही पचता है। इसी कारण अमाशय से शरीर के बाकी अंगों को व टिसयूज के लिए होने वाला पोषण में बाधा होती है। इससे हमारी पाचन क्रिया खराब होती है।

6. ग्रीन टी में दूध

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ग्रीन टी में फ्लेवोनॉयड्स जैसे तत्व होते हैं, जिन्हें कैटेचिन्स कहा जाता है। इससे दिल की बीमारियों, कैंसर और स्ट्रोक की आंशका को कम करने में मदद मिलती है, लेकिन अगर अगर दूध में ग्रीन टी मिलाकर पी जाए तो इससे दूध में पाए जाने वाले कैसीन प्रोटीन, कैटेचिन्स के असर में कमी कर देता है, इससे दूध के फायदे में कमी के अलावा ग्रीन टी के जो फायदे मिलने थे, वो भी नहीं मिलेंगे।

अतः पाठकों को ऊपर बताये गये कॉम्बिनेशन के साइड इफेक्ट्स के बारे में बताया गया है, आशा है कि पाठक इससे लाभ उठाएंगे।।

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झंडा महोत्सव श्री गुरु रामराय महाराज, देहरादून उत्तराखंड


हैलो दोस्तों आज मैं आपको इसी महीने देहरादून में हिंदू माह की पंचम तिथि ( होली के पांचवें दिन) श्री गुरु रामराय महाराज के झंडा चढ़ने के बारे में बता रहा हूं, इस मौके पर पूरे उत्तर भारत के राज्यों हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश आदि से श्रद्धालुओं (संगत) का सैलाब उमड़ता है, यहां तक कि देहरादून में पैर रखने की जगह नही होती। इसके साथ यहां पर मेला लगभग दस दिनों तक लगता है, जिसमें बाहर से दुकाने यहां पर लोग लगाने आते हैं। ये झंडा- रस्म के पीछे के इतिहास के बारे में जानते हैं।

देहरादून के नामकरण, स्थापित होने की कहानी भी इसी से जुड़ी है। सिख गुरुओं के सातवें गुरु श्री हर रॉय जी महाराज के सबसे बड़े पुत्र रामराय ने इसी स्थान पर झंडा चढ़ाया था। वर्ष 1676 में चैत्र कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि को श्री गुरु रामराय महाराज ने दून घाटी में डेरा डाला, तभी से दून घाटी का नाम डेरा दून यानि देहरादून पढ़ा।

इस तरह से झंडा उत्सव की शुरुआत हुई। इस झंडा- रस्म की जिम्मेदारी यहाँ के महंत जिनकी गददी व निवास श्री गुरु रामराय गुरुद्वारे में है, के द्वारा निभाई जाती है। वर्तमान में यहां के महंत देवेंद्र दास जो कि 25 जून 2000 से इस गददी पर विराजमान हैं।

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गुरु रामराय का मुगल बादशाह औरंगजेब से सम्बंध या यूँ कहें नजदीकी इनके पिता गुरु हर राय ने इन्हें हमेशा के लिए बेदखल कर दिया, जिस कारण श्री गुरु रामराय जी दून घाटी में आये। औरंगजेब ने उस समय टिहरी सम्राट राजा फतेह शाह को गुरु रामराय जी को 6 गांव देने को बोला था।, उन 6 गांवों में धामावाला, राजपुर, पंडितवाड़ी आदि था। धामावाला जगह पर ही आज श्री गुरु रामराय गुरुद्वारा है, बाद में इसके साथ में बाज़ार का नाम झंडा बाज़ार हो गया। कई लोगों में गलतफहमी है कि ये सिखों का गुरुद्वारा है, असल मे यह स्मारक है, ये बोलचाल में गुरुद्वारा बोला जाता है। यहाँ पर सिख प्रथा को न मानकर उदासीन या उदासी प्रथा को माना जाता है। यही कारण है यहां पर आपको उदासीन परम्परा का साहित्य मिलेगा। इसी कारण से हम गददी पर आसीन महंत प्रथा को देखें तो यहां पर सिख प्रथा के महंत नहीं होते। यहां गददी पर सिर्फ गड़वाली महंत ही गददी पर बैठते हैं, औऱ वे कठिन नियमों से बंधे हुए होने के कारण जिंदगी भर अविवाहित रहते हैं ।

श्री गुरु रामराय की चार रानियां थीं। जिनकी समाधि गुरुद्वारे में चारों कोनों में हैं। गुरुद्वारे में श्री गुरू रामराय जी का पलंग आज भी गुरु ग्रह में ज्यों का त्यों सुरक्षित लगा हुआ है। वहाँ पर पुजारी सुबह शाम आरती-पूजा करते हैं। पुजारी भी गढ़वाली हैं।

श्री गुरु रामराय जी की जीवनी के अनुसार वे अमर हैं, वे अक्सर अपने शरीर को छोड़कर अपने भक्तों के संकट दूर करने चले जाते थे, लेकिन जल्दी आ भी जाते थे।एक बार इसी तरह वे अपने शरीर को छोड़कर गए तो उन्हें वापस लौटने में समय लग गया, उनकी बड़ी रानी पंजाब कौर ने अपने सहायकों से श्री गुरु रामराय जी का दरवाजा खुलवाया ओर देखा कि उनका शरीर मृत अवस्था में पड़ा है, उन्होंने भृम वश उनके शरीर का दाह संस्कार करवा दिया। मान्यतानुसार वे जब वापस आये तो उन्हें उनका शरीर न मिल पाने के कारण वे वहीं पर घूमते रहते हैं, झंडा फहराने के समय वे अपने बाज के रूप में परिक्रमा करते हुए नजर आ जाते हैं। मान्यता- नुसार झंडा साहब में बहुत शक्ति है, उनके पास आकर लोग अपनी मन्नत मांगने आते हैं। तभी इतनी भीड़ वहां पर श्रद्धा से आती है। इनकी शक्ति समारोह मे देखने को सहज मिल जाती है।

Continue from Visit the capital of Uttrakhand Dehradun


How to reach Dehradun

Dehradun railway station , which is well connected to major cities northern India, primarily New Delhi . Airport of Dehradun situated in Jolly grant on Dehradun to Haridwar, Rishikesh road. Jolly grant Airport service Dehradun domestically with regular flights coming in from place like Delhi and Mumbai, to begin with regular Bus service also prevail to and from D Dun through an excellent roadways network.

Dehradun railway station connects D Dun to rest of India by railways, regular rail services operate to and from the city of D dun, the most famous among them being Doon express from Howrah, Mussoorie express, Jan shatabdi express, which operate at maximum speed of 125 km., and all over India rail service to D Dun regularly.

“Mussoorie” the Queen of hill stations

If you idea of the perfect holiday involves tranquil hill , untouched nature and a holiday experience that is unadulterated in the truest sense of the term, Missouri is the place you should be heading to. Mussoorie also known as Queen of hills, stands at an altitude of 7000 ft. above sea level, and has a cool, plesant climate throughout the year. The pristine, natural beauty of Muss- oorie makes it is very popular choice of holiday for honeymooners, it you want to enjoy the beautiful sight of the rolling green slopes juxtaposed with the place for you to be.

This beautiful hill station is the perfect retreat from the sweltering weather of the plains, and the fact that it was a very popular holiday destination during the British era can be seen from the multitude of British remnants engulfing the city.