रसगुले की पो बारह ….!


नमकीन : भाई सुबह – सुबह कहाँ जा रहे हो ? लो, ये तो सुन ही नहीं रहा …..। पता नहीं आज रसगुले को हो क्या गया…? (बड़बड़ाने लगी), तभी रिपोर्टर वहां से गुजरता हुआ,

क्या बड़बड़ा रही है, अकेले ही। कुछ हमें भी तो पता चले …. आखिर बात क्या हुई ?
नमकीन : कुछ भी तो नहीं …। लो, इसे तो रिपोर्ट मिल गयी …न्यूज़ बनाने के लिए। ( मन में लगी फिर बड़बड़ाने )।
रिपोर्टर था, कि मान ही नहीं रहा,
रिपोर्टर : रसगुले की आदत है तो स्वाद के अनुसार, मीठी, नमकीन बहन कुछ तो बात हुई होगी …
नमकीन : बात …बात क्या, जो रसगुल्ला हमेशा मेरे साथ रहता था, अठखेलियां करता था,आज सुबह मुझे मिल गया।
बात तक नहीं करी मेरे साथ, और तो और मेरे को देखकर अपने चलने का अंदाज ही बदल

लिया। ऐसे चल रहा था, जैसे कोई भानुमति का पिटारा उसके हाथ लग गया हो।
रिपोर्टर : हूँ ….. शायद हो सकता है, कोई बात हुई हो तुम्हारे और उसके बीच में।
नमकीन : बात …..? कल अच्छा – भला मेरे साथ बैठकर गया।
रिपोर्टर : चल बहन, चलते हैं उसके पास। घर में मिल जायेगा। हमें भी तो कुछ पता चले,

आखिर चल क्या रहा है,
उसके दिमाग में ? पहुंच गए रसगुले के घर में, जैसे ही बैल बजाई, रसगुले ने दरवाजा खोलकर रिपोर्टर से हाथ मिलाया, उसके बाद जैसे ही मझे देखा, झट से अपना मुंह फेर लिया। मैं जैसे ही वापस जाने को मुड़ी,
अरे, कहां चली ….. रिपोर्टर मेरा हाथ पकड़ते हुए
नमकीन : देखा नहीं ? कैसे रसगुले ने मुझे देखकर अपना मुंह फेर लिया, ऐसे भी कोई करता है, अपने घर आये मेहमान से
रिपोर्टर : अंदर बैठकर बात करते हैं रसगुले के साथ, यही बात तो करने आये हैं। भाई

रसगुल्ला, क्या हाल हैं ?
रसगुल्ला : हाल क्या होने….. बढ़िया हैं एकदम।
नमकीन : नमकीन रिपोर्टर के कान में फिर बड़बड़ाने लगी, सुना ? कैसे बात कर रहा है, इसकी वाणी में कैसा घमंड है, और देखो …… आज
रिपोर्टर : रसगुल्ला भाई, एक बात तो बता, तेरी नमकीन बहन के साथ क्या बात हो गयी, जो तू इससे बात भी नहीं
कर रहा है। कुछ हमें भी तो पता चले।
रसगुल्ला : तैस में आकर बोलने लगा, मैंने सोच लिया है। अब ज्यादा किसी से बात नहीं करनी, और अपने से छोटे लोगों से तो बिलकुल नहीं।
अच्छा मैं चली, लाल – पीली होकर खड़ी हो गयी, नमकीन, जाने के लिए।
रिपोर्टर : सुनो… रुक भी जाओ, मैं जो साथ में आया हूँ ….. साथ चलेंगे।
नमकीन : अब में एक पल भी नहीं रुकूंगी यहां। पता नहीं इसे एक रात में अचानक क्या घमंड आ गया ?
रसगुले को देखा, वो न्यूज़ पेपर को ऐसे पढ़ रहा था, जैसे उसकी कोई लॉटरी निकली हो।
नमकीन : कुछ तो बात है इस न्यूज़ पेपर में, जो ये निगोड़ी रसगुल्ला इतना इतरा रहा है
तभी ….. अजी सुनते हो …. चाय ले जाओ, पत्नी बोली
रसगुल्ला : न्यूज़ पेपर को टेबल पर रखकर किचन में पहुंचा।
रिपोर्टर : न्यूज़ पेपर में ऐसी क्या खबर है, पेपर उठाकर पढ़ने लगा, ऒ … ये बात है
नमकीन का भी माथा ठनका। मैं भी देखूं ऐसी क्या खबर है ? समझ गया
रिपोर्टर : तुझे पता है ….. आज इसी रसगुले की खबर जो आयी
नमकीन : इसकी खबर ? तभी इसकी अचानक चाल – ढाल बदल गयी
रसगुल्ला : लो…. चाय पीओ पहले, चाय के कप टेबल पर रखते हुए बोला।
रिपोर्टर : चाय तो ठीक है, पी लेंगे, लेकिन एक बात बता, तेरी अचानक नमकीन से क्या बात हो गयी। ये टेंशन में है,
तूने उससे बात नहीं करी।
नमकीन : ये क्यों बोलेगा …..ये तो पहले ही अपनी खबर पढ़कर इतरा रहा है। आ जायेगा अपने आप कुछ दिनों बाद लाइन पर
रसगुल्ला : इतराने की तो बात ही है, मेरा इतिहास ही इतना पुराना है। मेरे चाहवान तो सभी हैं ही, बल्कि अब तो मेरे को लेकर बंगाल और उड़ीसा दोनों अपना दावा ठोंक रहे हैं
बंगाल कहता है कि 1868 में नवीनचन्द्र दास ने मुझे बनाया, बाद में उनके बेटे ने मेरी विरासत को आगे बढ़ाया, यहीं नहीं बंगाल में 14 नवम्बर को रसगुल्ला डे भी मनाया जाता है।
उधर उड़ीसा ने मेरे को लेकर अपना दावा किया है कि, 12 वीं सदी से ही मुझे भगवान जगन्नाथ के मंदिर में भोग के रूप में चढ़ाया जाता था। उड़ीसा में 30 जुलाई को रसगुल्ला दिवस के रूप में मनाया जाता है।
नमकीन : देखा ….. कहती थी न मैं। कोई बात .. तो है, जो यह भाव खा रहा है
रसगुल्ला : भाव खाने वाली तो बात ही है। तेरे पास है ? ऐसी कोई बात ….
नमकीन : अरे जा, जा … बड़ा आया भाव खाने वाला। कल मेरे ही पास बैठा था। आज सुबह न्यूज़ पेपर में जरा अपनी न्यूज़ क्या देख ली, अपना एटीट्यूड ही बदल लिया। याद कर

तेरे को खा – खाकर लोगों को शुगर भी होने लगी है। ब्याह – शादी जैसे फंक्शन में लोग तेरे पास आने से कतराने लगे हैं। मेरे को देख ….. सभी लोग स्वाद लेकर चटकारे लेकर खाते हैं।
रसगुल्ला ; चटकारे ? उनको जब मिर्च लगती है तो, मैं ही उनके मुंह में मिठास घोलकर जीभ को शांत करती हूँ।
रिपोर्टर : अच्छा ठीक है। आपस में लड़ाई न करो। तुम दोनों की अपनी – अपनी अहमियत है। चलो आपस में गले मिलो। अचानक रिपोर्टर ने रसगुले को देखा वो नमकीन को देखकर मंद – मंद मुस्कुरा रहा था।

Advertisements
%d bloggers like this: