पंडित जी से चर्चा….. !


बहुत दिनों से दिल कर रहा था, पंडित जी से मिलने, व कुछ चर्चा करने की। कहीं मुलाकात भी नहीं हुई थी। सोचा पंडित जी से सुबह ही मिलकर आते हैं। जानते हैं, आजकल की कुछ नई खबरों के बारे में, उनके विचारों को सुने, कई दिन भी तो गए थे। सो सुबह जल्दी

उठकर, नाश्ता आदि निपटाकर उनके घर जाने के लिए।

पंडित जी के घर जैसे ही बैल बजाई, वही हमेशा की तरह, कौन … अंदर से आवाज लगाते

हुए उनके लड़के ने गेट खोला, नमस्ते अंकल जी
नमस्ते … पंडित जी हैं ? आ जाइये, पंडित जी ड्राइंगरूम में लेटे हैं
हूँ …. पंडित जी तो हमेशा पेपर पढ़ते हुए मिलते थे, आज … मन में सोचते हुए ड्राइंगरूम में जैसे ही प्रवेश किया।
प्रणाम पंडित जी ….
आ गये , बच्चू …. कैसा है ? पंडित जी हमेशा की तरह बिना मुझे देखते हुए बोले …..
बस ठीक हूँ , आप बताएं कैसे हैं, सब ठीक हैं ?
हूँ … क्या खबर लाये हो ? पंडित जी साथ ही उठकर बैठ गए, साथ ही पास रखे पेपर को उठाकर देखने लगे। खबरें हमने क्या लानी थी। बहुत दिनों से मुलाकात नहीं हुई थी, आपसे। सोचा आज जरूर मिलकर आना है …
कहां से शुरू करूं, इसी उधेड़बुन में से बाहर निकलते हुए मैंने पूछा …
पंडित जी चुनाव भी खत्म हो चुके हैं, लेकिन अपने सिद्धू ने अपना मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है, और कैप्टन ने फटाफट स्वीकार भी कर लिया।
तो इसमें कौन से बड़ी बात हो गयी, मैंने तुझे पिछली बार भी कहा था, कि कैप्टन घाघ नेता है। वो अपने सामने किसी को टिकने नहीं देगा।
उधर कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस के विधायक बागी हो गए, हालाँकि उनको मनाने की कुमारस्वामी एंड कंपनी ने काफी कोशिशे भी करी थी, आखिर में सरकार गिर ही गयी। संसद में कांग्रेस और जेडीएस ने हंगामा भी किया था, फिर …
फिर क्या ? पंडित जी अपनी आदत के अनुसार तपाक से बीच में टोकते हुए बोले,उन्होंने यही कहा न कि भाजपा ने हमारी सरकार गिरा दी। सुन बच्चू …! एक कहावत है, ” जिसकी लाठी उसकी भैंस “, अब भाजपा वालों को सिखाया तो कांग्रेस वालों ने ही न। देख बच्चू। इंदिरा जब पीएम थी, तो उसने भी तो यही किया था। दूसरी पार्टियों की सरकारें उस समय गिरा देती थी। कांग्रेस के पी वी नरसिंहाराव के पीएम के कार्यकाल में अयोध्या
में 1992 में बाबरी मस्जिद का ढांचा गिरा दिया गया था, उन्होंने भाजपा की तीन राज्यों में सरकारें भंग कर दी थीं। अब कोई कांग्रेस से पूछे कि अयोध्या तो यूपी में था, वहां की सरकार बाबरी ढांचे की जिम्मेदार थी, बाकी सरकारों का क्या कसूर था।
लेकिन पंडित जी अब तो कर्नाटक में भाजपा के येदुरप्पा ने विश्वासमत भी प्राप्त कर लिया है। और इसके अलावा
कई जगह कांग्रेस और एनसीपी के कई नेता अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा ज्वाइन कर रहे हैं ….
तो इसमें कौन सी बड़ी बात है ? राजनीति में “आया राम गया राम ” का खेल पुरानी बात है। कभी सुना है ? किसी को डूबते हुए जहाज की सैर करते हुए।
और तूने देखा नहीं भाजपा में रामबिलास पासवान को। केंद्र में जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार 1999 में आयी थी, तो यही पासवान उस सरकार में संचार मंत्री थे। उसके बाद युपीए सरकार के दो कार्यकाल में मंत्री पद से नवाजे गए थे। उसके बाद पिछली बार मोदी सरकार की, अब मोदी सरकार की दूसरी पारी में भी मंत्री पद लिए बैठे हैं। इन्हीं के बारे में लालू यादव ने पिछले चुनावों में कहा भी था, कि पासवान तो मौसम वैज्ञानिक हैं। उसे पहले ही पता चल जाता है, कौन सी पार्टी की सरकार केंद्र में आएगी। बस फिर क्या, वो झट पलटी मार लेता है, और मंत्री पद पा ही लेता हैं।
मैं मन ही मन में सोच रहा था, पंडित जी हैं, आखिर हाजिर जवाब।
अच्छा पंडित जी आजकल यूपी में उन्नाव केस को लेकर योगी सरकार की बड़ी किरकिरी हो रही है। अब उस घटना के इतने दिनों बाद भाजपा ने घटना के आरोपी कुलदीप सेंगर को पार्टी से निकाला है। यदि पार्टी उसे पहले ही निकाल देती ….
एक बात सुन बच्चू, …. यही कुलदीप पहले सपा, बसपा से होकर ही भाजपा में आया है। और सभी राजनीतिक पार्टियां यही तो खेल खेल रही हैं। कोई पार्टी दूध की धुली हुई थोड़े ही है।
पंडित जी योगी सरकार की सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव केस को लेकर बड़ी खिंचाई भी लगाई।
एक बात सुन बच्चू, जब कभी देश में किसी भी सरकारों द्वारा संकट की घड़ी आती है, तो सुप्रीम कोर्ट को बीच में आना तो पड़ेगा।
अच्छा पंडित जी एक ताजी खबर ये भी आ रही है, कि मोदी सरकार जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबलों को ज्यादा संख्या में भेज रही है। कहीं इसके पीछे धारा 35 A हटाने की तैयारी तो नहीं …?
पंडित जी अपने सिर के बालों में हमेशा की तरह उँगलियाँ फेरते हुए मंद – मंद मुस्कुराने लगे, साथ ही अपनी घड़ी की सुईयों को दखने लगे।
मैं पंडित जी को ऐसी मुद्रा में पहले भी कई बार देख चुका था। समझ गया, उनकी यही मुस्कान अपने आप में न कुछ बोलते हुए भी बहुत कुछ बोल जाती है। मैंने पंडित जी से विदा होने में देर लगानी ठीक नहीं समझी।

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