बॉलीवुड स्टार्स के अफेयर्स के चर्चे …


यूँ बॉलीवुड के एक्टर एक्ट्रेस के अफेयर्स, ब्रेकअप व शादी के चर्चे मीडिया में हमेशा से चर्चा का विषय रहें हैं, फेहरिस्त लम्बी है …
तीसरी सीरीज —

बात जब प्यार की हो, उसके चर्चे की हो, तो मीना कुमारी जैसी खूबसूरत अदाकारा के बिना

मीना कुमारी

अधूरी ही मानी जाएगी। वो हमेशा चर्चा का केंद्र बिंदु रही। उनका जीवन किसी पहेली से कम नहीं था। संघर्ष उनके जीवन का पर्याय बन गया था। मीना कुमारी के अनुसार त्रासदी उनके जन्म लेने के समय से ही शुरू हो चुकी थी। उनके जन्म के समय उनके पिता के
पास डॉक्टर को देने के लिए पैसे तक नहीं थे। उसके पिता उनको लगभग हॉस्पिटल ही छोड़ आये थे, लेकिन कुछ घंटों बाद उसे घर ले आये।
एक मुस्लिम परिवार में जन्मी मीना कुमारी बचपन में बहुत शरारती थी। संगीतकार नौशाद तब उनके पड़ोसी हुआ करते थे। वह भी मीना कुमारी की शरारतों के गवाह रहे थे। मीना कुमारी को बचपन से फिल्मों में एक्टिंग करने का शोक था। पिता कठोर स्वभाव के थे। घर में वह पिता द्वारा प्रताड़ित भी रही। पिता अक्सर उसके साथ मारपीट करते थे। बाहर
कम ही ज्यादा जाने देते थे, वो भी जब जरूरी हुआ। कह सकते हैं घरेलू हिंसा की वो शिकार बनी थी। एक बार दादा मुनि अशोक कुमार ने कमाल अमरोही से उनकी मुलाकात

करवाई। वो इनकी सुंदरता के कायल हो गए। उन दिनों प्रसिद्ध फिल्म निर्माता निर्देशक कमाल अमरोही अपनी फिल्म के लिए लड़की की तलाश कर रहे थे। कमाल अमरोही ने मीना कुमारी को अपनी फिल्म के लिए साइन किया। फिल्म फ्लौर पर जाने लगी, तभी मीना कुमारी को एक भयानक कार एक्सीडेंट के कारण हॉस्पिटल में एडमिट होना पड़ा। बात 21 मई, 1951 की थी। मीना कुमारी को चार महीने तक अस्पताल में रहना पड़ा और कमाल नियमित रूप से हॉस्पिटल उनसे मिलने जाते, और उनके लिए मार्गदर्शक बने रहे। मीना कुमारी भी घर में अपने पिता से आजाद होना चाहती थी। वह कमाल से शादी करने
करना चाहती थी, ताकि पिता से छुटकारा मिल सके। मीना की हॉस्पिटल से छुट्टी होने के तुरंत बाद, दोनों के बीच रात-भर के फोन आने लगे। अनारकली के लिए मीना को साइन करने वाले कमाल की शुरुआत होने वाली थी, लेकिन फिल्म के निर्माता को एक बड़ा आर्थिक समस्या के कारण फिल्म बंद हो गई। लेकिन इस बीच मीना कुमारी (जो तब केवल 18 वर्ष की थी) ने 14 फरवरी, 1952 को कमाल अमरोही (34) से शादी की, जो मीना की बहन महालिया की मौजूदगी में एक गुप्त निकाह समारोह में हुई थी। कि कमाल पहले से ही एक विवाहित थे। और उनके पहले विवाह से तीन बच्चे थे। लेकिन जिस बंदिश, पाबंदियों से छुटकारा पाने के लिए मीना ने कमाल से निकाह किया था, लेकिन बाद में ऐसा नहीं हुआ। मीना कुमारी के अनुसार कमाल इतना कठोर था, कि वह मीना को शाम 6:30 बजे तक घर आने के लिए कहता था, उसके ड्रेसिंग रूम में किसी को भी जाने की परमिशन नहीं थी, उसे केवल कार में यात्रा करनी थी. जो कमाल ने उसे दी थी। यानी कि वो अपनी मर्जी से कहीं आ जा नहीं सकती थी, न किसी से मिल सकती थी। कथित तौर पर घरेलू हिंसा यहां भी शामिल थी। लेकिन बाद में धीरे – धीरे मीना कुमारी को फ़िल्में मिलने लगी। साहिब बीवी और गुलाम, परिणीता, फुट पाथ जैसी कई दिग्गज फिल्मों के कारण उनकी अपार प्रतिभा और सुपरस्टारडम भी मिला, लेकिन इस से परे, एक मीना कुमारी थी, जो एक दुखद प्रेम कहानी में घिरी थी। एक अफवाह के अनुसार कमाल मीना कुमारी के साथ मार – पीट भी करते थे।

मीना कुमारी ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री श्रेणी में चार फिल्मफेयर पुरस्कार जीते। वह 1954 में बैजू बावरा के लिए उद्घाटन फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार की प्राप्तकर्ता थीं और परिणीता के लिए दूसरे फिल्मफेयर पुरस्कार (1955) में लगातार जीत हासिल की थी। कुमारी ने 10 वें फिल्मफेयर अवार्ड्स (1963) में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का नामांकन प्राप्त कर इतिहास रच दिया और साहिब बीबी और गुलाम में अपने प्रदर्शन के लिए जीत हासिल की। [16] 13 वें फिल्मफेयर अवार्ड्स (1966) में, कुमारी ने काजल के लिए अपना अंतिम सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता। मीना कुमारी की सबसे बड़ी पहचान 50 और 60 के दशक में मौजूद भारतीय महिलाओं के संघर्ष को चित्रित करने की क्षमता थी। मीना कुमारी के ऑनस्क्रीन व्यक्तित्व को भारतीय फिल्म बिरादरी, जैसे कि मोहम्मद जहूर खय्याम और जावेद अख्तर द्वारा पारंपरिक भारतीय नारी का एक आदर्श उदाहरण बताया गया है। कमालअमरोही के निर्देशन में पाकीज़ा में सुनहरे दिल वाली एक भोली लड़की “साहिबान” का उनका चित्रण एक ऐतिहासिक, यादगार फिल्म बन गई।
फ़िल्मी कैरियर में स्टारडम मिलने के बाद उनका कारोबार के सिलसिले में लोगों मिलने के लिए भी बहुत सारे नियम, कायदे लागू कर दिए गए। मीना कुमारी की निरंतर निगरानी ने मीना कुमारी को उदास कर दिया। और आखिरकार 1964 में मीना-कुमारी ने कमाल अमरोही को तलाक दे दिया। लेकिन खुद डिप्रेशन में चली गयी। शराब का सहारा लेने लगी। फिल्म फूल और पत्थर में धर्मेंद्र को इनके साथ लिया गया। घर्मेंद्र उन दिनों फिल्म इंडस्ट्री में नए आये थे। इनका धर्मेंद्र में प्यार हो गया। लेकिन कुछ दिनों के बाद धर्मेंद्र से भी अलगाव हो गया। यानिकि कोई मीना कुमारी को सही मायने में ऐसा हमदर्द नहीं मिला, जो इन्हें संभाल सके, इन्हें दिल से प्यार कर सके। जो भी आया उन्होंने इनका शारीरिक शोषण करके चला गया। इस तरह मीना कुमारी पूरी जिंदगी अकेली ही रही। और शराब में डूबी रही। और महज 38 साल उम्र में इस बेदर्द दुनिया को अलविदा कह गयी।
मीना कुमारी के लिए “उसके कई आयाम थे – उसने कविता पढ़ी, साहित्यिक मित्र थे, उच्च जीवन की आकांक्षा की और एक शराबी थी”।
यह उनके ब्यक्तित्व का प्रभाव ही था, कि दिलीप कुमार जैसे दिग्गज कलाकार (दुखद राजा) ने उनके सामने अपने शांत रहने को मुश्किल पाया”। सेट पर मीना कुमारी के साथ काम करते समय राज कुमार अक्सर अपने डायलॉग तक भूल जाते थे। मधुबाला भी
मीना कुमारी की प्रशंसक थीं, और उन्होंने कहा: “उनके पास सबसे अनोखी आवाज़ है, जो किसी अन्य नायिका के पास नहीं है।” सत्यजीत रे जैसे विख्यात निर्माता, निर्देशक ने मीना कुमारी को “निस्संदेह उच्चतम कैलिबर की अभिनेत्री” के रूप में वर्णित किया।
अमिताभ बच्चन ने कहा “कोई – भी नहीं, कोई भी नहीं, कभी भी मीना कुमारी ने जिस तरह

धर्मेंद्र मीना कुमारी

से संवाद बोले .. कोई नहीं .. आज तक कोई नहीं .. और शायद कभी नहीं होगा”। संगीत निर्देशक नौशाद ने कहा कि “हिंदी फिल्म उद्योग महान अभिनेत्रियों का निर्माण कर सकता है, लेकिन मीना कुमारी कभी नहीं होगी” …मीना कुमारी ने मर्लिन मुनरो के साथ काफी सहानुभूति व्यक्त की, यह तथ्य कि मर्लिन के पति आर्थर मिलर की मीना के पति कमाल अमरोही के साथ कुछ समान समानताएं थीं, ने पहचान को करीब बना दिया। ऐसा कहा जाता है कि जीवन भर मीना कुमारी का फिल्मों के साथ प्रेम-घृणा का रिश्ता रहा।
कमाल अमरोही से वह इस कदर तंग थी कि कमाल ने मीना कुमारी की साइन की हुई फिल्म पाकीजा जिसे मीणा नहीं करना चाहती थी। कमाल के मीना कुमारी को ये बोलने पर कि तुम मेरी ये फिल्म कम्पलीट कर दो, मैं तुम्हें आजाद कर दूंगा। इसके बाद मीना कुमारी ने जैसे – तैसे फिल्म को कम्पलीट किया। इसके पीछे उनकी ये भी भावना थी कि फिल्म के साथ कई लोगों की रोजी – रोटी जुड़ी है। हालाँकि पाकीजा की शूटिंग मीना कुमारी ने बीच में ही छोड़ दी थी।
इस तरह मीना कुमारी जीवन भर छटपटाती रही। अपने प्यार के लिए भी …. !

धर्मेंद्र :

बात जब अफेयर्स और चर्चे की चल रही है, तो इससे हीमैन धर्मेंद्र कैसे अछूते रह सकते हैं।
धर्मेंद्र ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर अपनी बचपन की मुहब्बत का भी राज़ खोला है। धर्मेंद्र की एक कविता से पता चलता है, कि उनको पहली बार प्यार बचपन में हुआ था, जब वो छठी कक्षा में पढ़ते थे। लड़की का नाम हमीदा था, जो उनके स्कूल टीचर की बेटी थी और

धर्मेंद्र हेमामालिनी

आठवीं में पढ़ती थी। जिस उम्र में धर्मेंद्र को हमीदा से प्यार हुआ था, उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि यह मोहब्बत है। बस एक फीलिंग होती थी, जो उन्हें भीतर तक गुदगुदा जाती थी। कुछ साल बाद धर्मेंद्र को फ़िल्मों में काम करने का शौक चढ़ा और वो गांव छोड़कर मुंबई आ गये। दिल भी तेरा हम भी तेरे से धर्मेंद्र ने हिंदी सिनेमा में अपनी पारी शुरू की और कुछ ही समय में साठ और सत्तर के दशक के प्रमुख कलाकारों में शुमार हो गये। हेमा मालिनी के ज़िंदगी में आने से पहले मीना कुमारी से धर्मेंद्र के अफेयर के क़िस्से आज भी मशहूर हैं। धर्मेंद्र ने कुछ मौक़ों पर ख़ुद स्वीकार भी किया कि वो जो कुछ हैं, मीना कुमारी की वजह से हैं। धर्मेंद्र जिस समय अपना करियर शुरू कर रहे थे, बेहद खूबसूरत मीना कुमारी मोस्ट सीनियरऔरअदाकारा बन चुकी थीं। कहा यह जाता था कि कमाल अमरोही से अलग होने के बाद मीना धर्मेंद्र के क़रीब आ गयी थीं। फिल्म फूल और पत्थर में नवोदित धर्मेंद्र मीना कुमारी के साथ हीरो की भूमिका में थे। दोनों में प्रगाढ़ प्रेम संबंध बन गए थे। लेकिन उस समय के जानने वाले बताते हैं कि इनके ये संबंध कुछ महीनों ही चल पाए।
इसके बादपहले से विवाहित धर्मेंद्र और ड्रीम गर्ल की उपाधि से नवाजी गयी हेमा मालिनी की लव स्टोरी हर कोई जानता है। धर्मेंद्र और हेमा मालिनी के बीच ऐसा प्यार हुआ कि नज़ीर बन गया। यानि ये एक दूसरे के पर्याय बन गए थे। लैला मजनू और शीरी फरहाद की तरह आम बोलचाल में धर्मेंद्र हेमा मालिनी की मिसालें दी जाती थी। हालाँकि हेमामालिनी के माता – पिता धर्मेंद्र को पसंद नहीं करते थे। वह इनकी जोड़ी को प्रोफेशनल से ज्यादा कुछ नहीं मानते थे। वह धर्मेंद्र को पहले से विवाहित और शराबी मानते थे। इसके अलावा जितेंद्र भी हेमा को चाहते थे, और वो हेमा के पेरेंट्स की भी पसंद थे।
संजीव कुमार भी हेमा को चाहते थे। लेकिन शायद ये प्यार एक तरफा था।
1970 से 2011 तक धर्मेंद्र और हेमा मालिनी ने 33 फ़िल्मों में साथ काम किया है, जिनमें शोले, जुगनू, चरस, प्रतिज्ञा, सीता और गीता जैसी हिट फ़िल्में शामिल हैं। दोनों की पहली

धर्मेंद्र प्रकाश कौर

रिलीज़ फ़िल्म तुम हसीन मैं जवां है, जो 24 जुलाई 1970 को रिलीज़ हुई थी। भप्पी सोनी निर्देशित फ़िल्म को सचिन भौमिक ने लिखा था। धर्मेंद्र ने हेमा मालिनी के निर्देशन में 2011 में आयी फ़िल्म टेल मी ओ ख़ुदा में काम किया था, जो बेटी ईशा देओल के करियर को रिवाइव करने के लिए बनायी थी। हेमा के अनुसार मेरे पेरेंट्स धरम को लेकर कभी जिद्दी नहीं रहे। सुना गया कि एक दिन जितेंद्र और हेमा शादी करने वाले थे, मडंप भी तैयार था। लेकिन जैसे कि प्यार अँधा होता है, उधर धर्मेंद्र को जैसे ही खबर मिली वो जितेंद्र की मंगेतर शोभा सिप्पी, जिससे जितेंद्र की सगाई हो रखी थी, उसे लेकर वहां पहुंच गए। बस फिर क्या था, शादी रुक गयी। इसके बाद 21अगस्त 1979 को धर्मेंद्र ने धर्म और नाम परिवर्तित करके हेमा से निकाह किया था, ताकि उन्हें अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर को तलाक़ ना देना पड़े। उनके निकाहनामा में लिखा था- दिलावर ख़ान केवल कृष्ण (44 साल) 1,11,000 रुपये मेहर के साथ आयशा बी आर चक्रवर्ती (29 साल) को दो गवाहों की मौजूदगी में अपनी पत्नी स्वीकार करते हैं। हालाँकि धरम और हेमा की शादी को लेकर धरम के बच्चे खुश नहीं थे। ओर न ही उनकी पूर्व पत्नी प्रकाश कौर ने कभी धरम को इसके लिए माफ़ किया।
इन दोनों के अफेयर, चर्चे और विवाह में एक बात जो सबसे अच्छी रही ये विवाह अटूट और सफल रहा।

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