बॉलीवुड स्टार्स के अफेयर्स के चर्चे …


पहली सीरीज …


यूँ बॉलीवुड के एक्टर एक्ट्रेस के अफेयर्स, ब्रेकअप व शादी के चर्चे मीडिया में हमेशा से चर्चा का विषय रहें हैं, फेहरिस्त लम्बी है, कुछ अफेयर्स ओर शादी के किस्सों को यहां जानते हैं।

राज कपूर :

“बरसात में तुमसे मिले हम हम से मिले तुम” ….. !

जी हाँ 1949 के दौर में ” बरसात ” फिल्म का गाना कौन भूल सकता है। ये गाना राज कपूर और नरगिस ने गाया था।
बात करते हैं, बॉलीवुड के सबसे बड़े शोमैन राज कपूर, जो कृष्णा कपूर जैसी पत्नी और 5 बच्चों के साथ एक शादीशुदा व्यक्ति होने के बावजूद, अपने समय की विभिन्न अभिनेत्रियों के

साथ उनके लिंक-अप से कोई बच नहीं पाया था। बला की सुंदर नरगिस पहले से ही सुपरस्टार थीं। और उन्होंने साथ में 8 सुपरहिट फिल्में दी। उसकी सुंदरता से चकित होकर, राज कपूर नरगिस को दिल दे बैठे। उसके बाद तो राज और नरगिस की जोड़ी की गूंज मीडिया में चर्चा का केंद्र बन गयी थी। लोग चटखारे लेकर दोनों की बातें करते, चटखारे लेकर किस्से सुनते।
राज कपूर ने आग (1948), बरसात (1949) और आवारा (1951) में नरगिस के साथ अभिनय किया। नरगिस राज कपूर की “इन-हाउस हीरोइन” थीं और आरके स्टूडियोज़ के प्रतीक में काफी अमर थीं। नरगिस और राज कपूर 16 साल तक पेशेवर और व्यक्तिगत रूप से लगातार साथी बने रहे। एक रिकॉर्ड के अनुसार, नरगिस राज के शादीशुदा होने के बावजूद, राज से शादी करने पर आमादा थीं, लेकिन यह कानूनी रूप से असंभव होने से राज शादी से मुकर गए। उसके बाद नरगिस ने राज कपूर से किनारा करना ही बेहतर समझा। चोरी चोरी (1956) आखिरी फिल्म थी, जो उन्होंने एक साथ की थी। नरगिस का राजकपूर के लिए प्यार ही था, कि फिल्म को सफल बनाने के लिए नरगिस ने उस जमाने में बिकिनी पहनी. रूस, चीन और अफ्रीकी देशों में भी फिल्म खूब चली।

इसके बाद जब नरगिस ने 1957 में महबूब खान की मदर इंडिया साइन की तो राजकपूर को बताया तक नहीं। मदर इंडिया की शूटिंग के दौरान सेट पर आग लग गई। सुनील दत्त इस फिल्म में नरगिस के बेटे की भूमिका निभा रहे थे।और सेट पर थे। उन्होंने अपनी जान पर खेलकर नरगिस को बचाया और दोनों में प्यार हो गया. मार्च, 1958 में दोनों की शादी हो गई। दोनों के तीन बच्चे हुए, संजय, प्रिया और नम्रता।
नरगिस के राज कपूर से अलग होने के बाद उनका नाम वैजयन्ती माला और जीनत अमान से भी जोड़ा गया। राज कपूर को नरगिस के साथ अपनी पहली मुलाकात जिंदगी भर याद

रही। इस असल किस्से को राजकपूर ने बॉबी फिल्म के एक सीन में हूबहू डिंपल कपाड़िया के ऊपर उतार दिया। दरअसल राज कपूर जब पहली बार नरगिस के घर गए थे, उस समय नरगिस घर में पकोड़े तल रही थी, उनके हाथ बेसन से सने थे, उन्होंने घर दरवाजा खोला, तो उनके मुंह पर बेसन लग गया था, उनकी वही भोली सूरत राज को भा गयी थी।
उसके बाद राजकपूर ज़ीनत अमान के ग्लैमर के ऐसे दीवाने हुए कि उन्होंने ज़ीनत को लेकर फिल्म ” सत्यम शिवम सुंदरम ” का निर्माण किया। इस फिल्म में राज ने जिस तरीके से ज़ीनत अमान के ग्लैमर को एक्सपोज़ किया ऐसा किसी निर्माता नहीं किया।
लेकिन राज उस दौर में जीवन के उत्तरार्ध में थे। कुछ समय के बाद अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गयी।

देव आनंद :
एक आकर्षक मुस्कान और एक ताजा चेहरे और चलने के ढीले – ढाले अंदाज वाले सदाबहार रोमांटिक हीरो देव आनंद को कौन भूल सकता है। उनके अफेयर के चर्चे भी

मीडिया में खूब सुर्ख़ियों में रहे। ये दौर 1945 का था। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि देव आनंद हमेशा महिलाओं से घिरे रहते थे। अपनी फिल्मों के लिए देव ने कई नए चेहरे अपनी फिल्मों में लांच किये। जैसे कि ज़ीनत अमान, तब्बू या टीना मुनीम जैसी चुलबुली लड़की।
अपने समय की खूबसूरत और हिट अभिनेत्री सुरैया के साथ हो या ज़ीनत अमान या कोई और।

देव आनंद रोमांस करने के मामले में कभी पीछे नहीं रहे। यहां पहले बात करते हैं सुरैया

देव आनंद और सुरैया

की। देव आनंद और सुरैया की प्रेम कहानी अपने समय की सबसे भावुक प्रेम गाथाओं में से एक थी, और एक दुर्भाग्यपूर्ण भी। देव आनंद और सुरैया शादी करना चाहते थे, और एक नया जीवन शुरू करना चाहते थे। इसमें कोई शक नहीं कि देव आनंद सुरैया लव स्टोरी जब दो धार्मिक कट्टरता के शिकार हो गई। सुरैय्या के अनुसार देव आनंद उनके साथ काम करने वाले पहले सुंदर और आकर्षक युवा एक्टर थे, जिनसे मुझे पहली नजर में ही प्यार हो गया। मैं तो पहले से फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित थी। मैं अच्छे मुकाम पर थी। फिल्म ” विद्या ” के सेट
देव मेरे सामने एक नया कलाकार था, और बेहद नर्वस था। खासकर रोमांटिक सीन में। हम धीरे – धीरे आपस में प्यार करने लगे। हमने साथ कई फिल्मों में काम किया। एक फिल्म शूटिंग के दौरान देव आनंद ने सुरैय्या को डूबने से बचा लिया। सुरैय्या ने देवआनंद को बोला, आज तो तुमने मुझे बचा लिया। इसके बाद देव ने सुरैय्या को बोला यदि आपका जीवन समाप्त हो जाता तो मेरा भी हो जाता। देव आनंद और सुरैय्या छुप – छुप कर सुरैय्या की छत पर मिलने लगे, घंटों एक साथ रहते। एक दिन देव आनंद और सुरैय्या के प्यार
और शादी की खबर सुरैय्या की नानी को लग गयी। नानी सख्त मिजाज की थी। बस फिर क्या था, सुरैय्या की कड़ी निगरानी की जाने लगी। नानी को हमारे प्यार करने पर इसीलिए भी एतराज था, कि देव हिन्दू हैं, जबकि मैं मुस्लिम। नानी रूढ़िवादी थी। इसके बाद देव ने सुर्रिया से कई बार मिलने का अनुरोध किया, लेकिन नानी की सख्ताई के आगे सुरैय्या देव के प्रति प्यार के मामले में ढीली पड़ गयी, उसे अपने कदम पीछे करने पड़े।
हालाँकि इससे पहले देव ने एक बार कहा था: “सुरैया की माँ हमेशा मेरी तरफ थीं,और हमें प्रोत्साहित करती थीं। लेकिन उनकी नानी मुझसे नफरत करती थीं।” वास्तव में, यह सुरैया की मां थी जिन्होंने हम दोनों के बीच आखिरी मुलाकात की व्यवस्था की थी। लेकिन देव आनंद थोड़ा आशंकित थे, और मीटिंग को एक षड्यंत्र होने का संदेह था, लेकिन वह फिर भी

देव और कल्पना


सुरैय्या से प्यार के कारण मिलने के लिए आगे बढ़ गए। उनके एक पुलिस अधिकारी मित्र तारा चंद ने उनकी जेब में पिस्तौल और कुछ मशालें साथ रखने का फैसला किया। उन्होंने किसी भी खतरे को भांपते हुए देव को अपनी ओर झांकने के लिए एक मशाल दी।
देव के अनुसार मैंने हमेशा सुरैया से कहा था कि केवल धर्म ही प्यार नहीं है। सामाजिक बाधाएं या परिवार आपके दिल को प्रभावित करते हैं। मैं तुम्हें बेइंतेहा प्यार करता हूँ। इस तरह एक भावनात्मक प्यार का अंत हो गया।
कुछ समय बाद देव आनंद अपने भावनात्मक बंधन से बाहर आ गए। एक दिन मोना सिंह ने

कल्पना कार्तिक को देव से उनकी अगली फिल्म “बाज़ी” जिसे देव के प्रोडक्शन हाउस नवकेतन द्वारा निर्मित पहली फिल्म थी, के लिए मिलाया। देव उन दिनों अपनी फिल्म के लिए लड़की की तलाश कर रहे थे। कल्पना कार्तिक की यह पहली मुंबई की यात्रा थी। कल्पना
एक सुंदर,चुलबुली, शरारती लड़की थी। इसके बाद देव और कल्पना ने कई हिट फ़िल्में दी। और आखिरकार “टैक्सी ड्राइवर” की शानदार सफलता के बाद, दोनों ने 1954 में एक गुप्त विवाह में शादी के बंधन में बंध गए। देव और कल्पना के एक लड़का और एक लड़की है।
1970 में, देव आनंद तब आने वाली फिल्म “हरे रामा, हरे कृष्णा” में अपनी बहन की भूमिका

निभाने के लिए एक लड़की की तलाश कर रहे थे। देव चाहते थे, कि लड़की दिखने में भारतीय हो, लेकिन पश्चिमी परवरिश के साथ, कोई ऐसी लड़की जो हर किस्म की ड्रैस पहनने से परहेज न करे। वह उस दौर में हिप्पियों की तरह रहन – सहन में ढलने वाली के रोल को शूट करने वाली हो। एक रात, देव ने अपने मित्र निर्देशक अमरजीत की एक पार्टी में भाग लिया। वहाँ देव को वह ज़ीनत अमान मिली जो “हरे राम, हरे कृष्णा” में उनकी बहन की भूमिका निभाने वाली थी, और जिसने तब मिस एशिया का खिताब जीता था। हरे राम, हरे कृष्णा एक बड़ी हिट फिल्म साबित हुई। जीनत अमान फिल्म में ” दम मारो दम ” की भूमिका में रातों-रात लाखों सिनेप्रेमियों के दिलों पर छ गयी। इसके बाद देव ने अपनी अगली फिल्म “हीरा पन्ना” में रोमांटिक लीड रोल में ज़ीनत को लिया। चूँकि देव ने ही ज़ीनत

को फिल्म इंडस्ट्री में इंट्रोड्यूस किया था। देव ज़ीनत के करीब आ गए। देव आनंद की शादी हुए १५ साल हो चुके थे, दो बच्चों के पिता बन चुके थे। फिर भी ज़ीनत को प्यार करने से अपने को रोक नहीं पा रह थे। हालांकि, ज़ीनत एक प्रोफेशनल आदत की थी। वह देव के प्यार में बंधने को तैयार नहीं थी। एक दिन देव ज़ीनत को शादी का प्रस्ताव देने के लिए घर से निकले, उन्हें ज़ीनत कहीं नहीं मिली, लेकिन तभी उन्हें किसी से मालूम चला कि ज़ीनत होटल ताज में है, फिर क्या था, देव वहीं पहुंच गए, जैसे ही उन्होंने होटल का दरवाजा खोला, ये क्या … ज़ीनत वहां राज कपूर के साथ बैठी थी। देव वहीं से उलटे पैर वापस लौट आये।
उसके बाद राज कपूर की अगली फिल्म का अनाउंस हुआ। ज़ीनत को राज कपूर नेअगली फिल्म “सत्यम शिवम सुंदरम” में लीड रोल के लिए साइन किया गया था। इस तरह ज़ीनत के राज के कैंप में जाने से देव नाराज होकर पीछे हटने को मजबूर हो गए।
इसके बाद देव ने अपनी नई फिल्म ” देश प्रदेश ” के लिए टीना मुनीम को इंट्रोड्यूस किया। फिल्म हिट हुई। लेकिन टीना और देव के बीच उम्र का बहुत गैप था। लिहाजा टीना मुनीम और देव ज्यादा नहीं नजदीक नहीं रहे।

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3 replies on “बॉलीवुड स्टार्स के अफेयर्स के चर्चे …”

  1. 90 परसेंट लोगों की प्रेम कहानी अधूरी रह जाती है उसके कई कारण हो सकते हैं
    चांद मिलता नहीं सबको संसार में
    हे दिया ही बहुत रोशनी लिए ..
    🙁🙂🙁🙁🙂🙁🙂🙂

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