कुछ लम्हे …


जाने से पहले मुड़कर न देखेंगे
गलियां …. फिर से, वही
क्यों अक्स, नफरत वहीं देखें


बेशुमार थी, मोहब्बत ….जिसमें
गुम – ए – परछाई, रहे … मशगूल
आँखें चार ….. गेसुओं में
शोले, अंगारे झुलसे से
हुए जिनमें … थे तार – तार
बता देती, कि नहीं तन्हा अब
गुजार लेते तन्हाई, मधुशाला
भूल जाते, गिले …. शिकवे
हम, जैसे भी, बेगार …..
पर शिकवा, छपाक न मारते …
पत्थर, पानी …. में ठहरे
जाने होगा शांत ….. कब और कैसे ?

Advertisements
%d bloggers like this: