कैल्शियम से शारीरिक मजबूती बढ़ाएं …..


यूँ तो कैल्शियम सभी के लिए जरूरी है। इससे हमारे शरीर में हड्डियों व दांतों का विकास होता है। और यह मजबूत होती हैं। लेकिन जब बात महिलाओं के बारे में हो, तो उनके लिए

कैल्शियम कितना जरूरी है, आइये जानते हैं।
अक्सर देखा गया है कि महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा ही लापरवाह हो जाती हैं, और इसका परिणाम शरीर में कैल्शियम की कमी जैसी समस्या।

प्रकृति के अनुसार महिलाओं के शरीर की बनावट पुरुषों के बजाय ज्यादा संवेदनशील होती है। जिसका कारण महिलाओं को कई प्राकृतिक प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। जैसेकि मासिक धर्म, गर्भधारण, शिशु को स्तनपान और मेनोपॉज आदि। ऐसे में महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले अधिक कैल्शियम की जरूरत होती है। डाक्टरों के अनुसार एक महिला को लगभग १००० मिली ग्राम प्रतिदिन कैल्शियम की आवश्यकता होती है।आमतौर
पर अनबैलेंस्ड डाइट और पर्याप्त खान – पान की कमी के कारण इसकी पूर्ति नहीं हो पाती। और इसका परिणाम शरीर में कैल्शियम की कमी और उससे उपजी बिमारियों का सामना करना पड़ता है।
आखिर कैल्शियम जरूरी क्यों है ?
शरीर में हड्डियों का निर्माण कैल्शियम, प्रोटीन और खनिज तत्वों से मिलकर होता है। शरीर

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के स्वस्थ और संतुलित विकास के लिए हर उम्र में कैल्शियम की जरूरत होती है। इसका अलावा शरीर में हड्डियों और दांतों की मजबूती और ब्लड सर्क्युलेशन यानी रक्त संचरण में भी कैल्शियम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शरीर में तंत्रिका तंत्र के संदेश को मस्तिष्क तक पहुंचाने के कार्य में भी कैल्शियम भूमिका होती है।


इसके अतिरिक्त शरीर में चोट, घाव आदि को जल्दी ठीक करने में सहायक होता है।
गर्भवती महिलाओं को हमेशा कैल्शियमयुक्त भोजन आदि खाने की सलाह दी जाती है। कैल्शियम की कमी माँ एवं
शिशु दोनों के लिए आवश्यक है। माँ के दूध में कैल्शियम की कमी से नवजात शिशु की हड्डियों के निर्माण में कमी आ जाती है। और तो और दूध का निर्माण पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पाता। इस कमी के कारण नवजात शिशु के दांत और हड्डियों में कमजोरी आने की आशंका बढ़ जाती है।
इसके अलावा कैल्शियम की कमी से और भी रोग होने लगते हैं। मांसपेशियों के कार्य के लिए कैल्शियम बहुत जरूरी है। इसकी कमी से मासिक धर्म में दर्द असहनीय रूप हे बढ़ जाता है।
इसकी कमी से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है।
हड्डियों में कमजोरी आने के कारण हल्की चोट से ही फ्रैक्चर है। इस रोग को

ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं।
दांत पीले और कमजोर हो जाते हैं। और समय से पहले टूटने लगते हैं।
पाचन क्रिया प्रभावित हो जाती है, जिसकी वजह से शरीर को सुचारु मात्रा में पोषण नहीं मिल पाता।
नाखून कमजोर होने लगते हैं, व नाखूनों पर सफेद निशान पड़ने लगते हैं।
कैल्शियम शरीर में ब्लड सर्कुलेशन में मदद करता है, इसकी कमी से धड़कन बढ़ना व बेचैनी होने लगती है।
कैल्शियम की पूर्ति के लिए क्या लिया जाये –
सब्जियों में पालक, मेथी, फूलगोभी, अरबी, टमाटर, ब्रोकली, कद्दू, गाजर, शलजम आदि में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है।
कैल्शियम का सबसे अच्छा सोर्स दूध को माना जाता है। इसलिए कहा भी जाता है कि नियमित रूप से दूध का सेवन करना चाहिए। एक गिलास दूध में करीब 300 ग्राम कैल्शियम होता है। अगर दूध स्किप हुआ तो समझ सकते हैं कि
शरीर में कितने कैल्शियम की कमी हो जाएगी। दांतों के टूटने या गिरने, हड्डियों के कमजोर होने का कारण कैल्शियम की कमी ही है।
दूध से बने उत्पाद जैसे कि पनीर और दही में भी खूब कैल्शियम पाया जाता है इसलिए नियमित रूप से इन्हें भी अपने खाने में शामिल करें। दही से ना सिर्फ कैल्शियम मिलता है बल्कि यह हमारे शरीर को इन्फेक्शन से भी बचाती है।
पनीर में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है।
चीज (cheese) भी कैल्शियम से भरपूर होती है, इसलिए इसे रोजाना खाएं, लेकिन ध्यान रहे इसकी मात्रा सीमित रखें वरना चर्बी बढ़ सकती है।
अंजीर को भी कैल्शियम का अच्छा सोर्स माना जाता है। इसके नियमित सेवन से हड्डियों से संबंधित बीमारियां तो दूर भागती ही हैं साथ ही यह हड्डियों का विकास भी करता है। दरअसल अंजीर में Phosphorus भी होता है और यही तत्व हड्डियों का विकास करता है।
शायद ही लोग जानते हों लेकिन तिल में काफी अच्छी मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है। कैल्शियम में प्रोटीन भी होता है।
गेहूं, बाजरा, मून, मोठ, सोयाबीन, राजमा और काला चना में इसकी मात्रा पायी जाती है।
बादाम कैल्शियम काअच्छा सोर्स है। बादाम सिर्फ दिमाग को ही तेज नहीं करता बल्कि हड्डियों और दांतों को भी मजबूत बनाता है और मांसपेशियों को भी तंदरुस्त रखता है।
कीवी, नारियल, आम, जायफल, अनानास और सीताफल में खूब कैल्शियम होता है।
इसके अतिरिक्त मुनक्का, तरबूज के बीच, पिस्ता और अखरोट कैल्शियम से भरपूर ड्राय फ्रूट हैं।
सोयाबीन को भला कैसे भूला जा सकता है। सोयाबीन में दूध के बराबर ही कैल्शियम होता है इसलिए इसे दूध के विकल्प के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है यानि जो लोग दूध नहीं पीते अगर वो रोजाना सोयाबीन का सेवन करें तो उनकी हड्डियां कमजोर नहीं होंगी।
फलों में पाइन एप्पल, कीवी, पपीता, ऑरेंज, लीची और चेरी में इसकी मात्रा पाई जाती है।
संतरा और आंवला भी calcium rich foods हैं। इनमें मौजूद तत्व ना सिर्फ हड्डियों को मजबूत बनाते हैं बल्कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।
यहां ध्यान रखने वाली बात है कि बाजार से कैल्शियम की गोलियां डॉक्टर की सलाह की बिना न लें, क्योंकि इसकी ज्यादा मात्रा से स्वास्थ्य को हानि पहुंच सकती है। हाँ प्राकृतिक रूप से खाद्य पदार्थ लेने से मिलने वाला कैल्शियम शरीर को नुकसान नहीं होता।

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