‘ ताम्रजल ‘ यानी ताम्बे के बर्तन में रखा जल …


हमारे शरीर में लगभग ६५ से ७५ % हिस्से में पानी होता है। इसीलिए कहा जाता है कि जल ही जीवन है। यानी जल को तांबे के बर्तन में रखकर पिया जाये, तो वह

पानी के गुणों को बढ़ा देता है। शरीर को हाइड्रेट करने के अलावा स्वास्थ्य के लिए अत्यंत फायदेमंद होता है … !

प्राचीन काल से ही हमारे धर्मग्रंथों में ताम्बे के पात्र यानी बर्तन के गुणों का जिक्र आता है। आर्युवेद के अनुसार इसमें कहा गया है, कि पानी यानी ताम्रजल पीने से हमारे शरीर के तीनों दोषों वात, पित्त और कफ को बैलेंस में रखता है। आर्युवेद में ताम्बे को औषधीय धातु माना गया है। और पुराने समय से ही ताम्बे के बर्तन में पानी रखने का चलन रहा है। यदि ताम्बे के बर्तन में रात को पानी रखकर सुबह उठकर निराहार पिया जाए तो इसका ज्यादा लाभ मिलता है। इसमें कम से कम आठ घंटे पानी रखने बाद ही पानी पीने का फायदा है।
आइये जानते हैं, तांबे के बर्तन के लाभ :
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि रोजाना यदि दो लीटर तांबे के बर्तन में रखा गया पानी पिया जाए तो हमारे शरीर में २ मि. ग्रा. तक तांबा पहुंचता है, जोकि हमारे शरीर के लिए बहुत लाभकारी होता है।
अनुसंधानकर्ताओं के शोध के अनुसार तांबे के बर्तन में कई घंटों तक रखा गया पानी तांबे का एक हिस्सा अवशोषित कर लेता है।
ताम्रजल हमारे दिमाग को उत्तेजित करता है। दिमाग इम्पल्स संचरण पर काम करता है। इम्पल्स साइनैप्स से होकर एक न्यूरॉन से होकर दूसरे न्यूरॉन में जाते हैं। ये न्यूरॉन मायलिन के कवर से ढंके होते हैं, जो इम्पल्स प्रवाह में मदद करते

हैं। तांबा फास्फोलिपिड के निर्माण में सहायक होता है, जो मायलिन बनाता है। इसीलिए तांबे के सेवन से दिमाग ज्यादा अच्छी तरह से काम करता है। यह मस्तिष्क को उत्तेजित करता है, जिससे भूलने वाली समस्यायों से बचाता है।
बैक्टीरिया : तांबे में ओलिगो डायनैमिक गुण होते हैं, जिसके कारण यह बैक्टीरिया, खासतौर पर ई – कोलाई और एस ओरिस को नष्ट कर देता है। ये दोनों जीवाणु आमतौर पर पर्यावरण में पाए जाते हैं। ये डायरिया, पेचिश,
पीलिया जैसी पानी से होने वाली बिमारियों मुख्य कारक हैं। तांबे का पानी पीने से इनसे निजात मिलती है।
आर्थोराइट्स (Gout) : ये जानकर आपको आश्चर्य होगा तांबे में सूजनरोधी गुण होते हैं। यह गठिया वात और
रयूमेटाइड आर्थोराइट्स से होने वाले जोड़ों के दर्द और सूजन में भी आराम देता है। तांबा हड्डियों और इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। इसी कारण से मुख्यतः हड्डी के मरीजों के लिए तो और भी लाभकारी है।
पाचनतंत्र : आजकल गलत आहार – विहार जैसे फास्टफूड, पिज्जा, बर्गर आदि चीजों के खाने से गैस, एसिडिटी। खट्टी डकार, बदहजमी जैसे रोग आम हैं। तांबा इन रोगों के लिए बहुत लाभकारी है। यह पेरीस्टाल्सिस बढ़ाता है। जिससे भोजन आहार नाल में आसानी से आगे बढ़ता है। तांबा भोजन के हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने और पेट की सूजन को दूर करने में मदद करता है। यह पेट के अल्सर, अपच एवं इन्फेक्शन को भी नष्ट करने में मदद करता है। यह पेट साफ करने के अलावा लिवर और किडनी की कार्यप्रणाली को दुरुस्त करता है। शरीर के टॉक्सिन यानि ब्यर्थ पदार्थों को बाहर निकलने एवं पोषक पदार्थों के अवशोषण सहायक होता है। तांबे के असली नकली की पहचान : आप बड़ी आसानी से चुंबक की सहायता से असली तांबे की पहचान के सकते हैं। ताम्बे के बर्तन में यदि चुंबक को लगाया जाये, यदि यह चिपक जाये तो तांबा मिलावटी है। यदि यह नहीं चिपका तो समझें तांबा असली है। इसके अलावा असली तांबे का रंग गुलाबी, नारंगी होता है। इसके ऊपर निम्बू को रगड़ा जाये और साफ किये तो असली तांबा एक दम चमक जायेगा। ताम्बे के बर्तन को यदि नए स्क्रबर से साफ किया जाये तो यह एकदम चमक जाता है। इसके अलावा नीम्बू से भी साफ कर सकते हैं।

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