अभिनेता संजीव कुमार के जन्म दिन पर विशेष ….


बॉलीवुड के बहुमुखी अभिनय प्रतिभा के धनी अभिनेता संजीव कुमार का जन्म ९ जुलाई १९३८  एक गुजराती परिवार में सूरत गुजरात में हुआ था। वैसे संजीव कुमार का मूल नाम  हरिहर जेठालाल जरीवाला था। इसलिए फिल्म इंडस्ट्री में

इनको हरिभाई भी कहते थे। उनका परिवार बाद में मुंबई आ गया।  इन्हें एक्टिंग

का शौक बचपन से ही होने के कारण एक बकायदा एक्टिंग स्कूल में ट्रेनिंग भी ली। फ़िल्म निर्माता, निर्देशक सावन कुमार टाक द्वारा स्क्रीन नाम “संजीव कुमार” दिया गया था। सावन ने उन्हें एक नाटक में देखा और उनके साथ “नौनिहाल” का निर्माण किया। प्रकाश मेहरा की आश्रित फिल्म “इन्सान के औलाद” में अभिनय किया।

उन्होंने मुंबई में इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन में एक थिएटर अभिनेता के रूप में अपने अभिनय करियर की शुरुआत की और फिर भारतीय राष्ट्रीय रंगमंच  में काम किया।

संजीव कुमार ने १९६५ में फिल्म निशान में एक नायक के रूप में शुरुआत की,

जिसे अस्सी ईरानी द्वारा निर्देशित किया गया था। फिल्म में नाजिमा, प्रेम चोपड़ा

और हेलेन जैसे कलाकार थे।उनकी फिल्म में किरदार चाहे किसी भी उम्र का हो, वे उसे चुनौती के रूप में स्वीकार करने में परहेज नहीं करते थे, संजीव कुमार ने कभी भी अपने आप को किसी एक सीमा में नहीं बांधा। फिल्म में उनके किरदार में नेचुरल फ़ीलिंग  नजर आती थी। एक चरित्र अभिनेता के किरदार को ये अपने अभिनय से जीवंत बना देते थे।  सत्यजीत रे जैसे महान फिल्म डायरेक्टर की शतरंज के खिलाडी में, संजीव कुमार ने मिर्ज़ा सज्जाद अली की भूमिका निभाई।

उन्होंने मराठी, पंजाबी, तमिल, तेलुगु, सिंधी और अपनी मातृभाषा गुजराती सहित कई विभिन्न भाषाओं में क्षेत्रीय भी फिल्में की।

वे जीवनपर्यन्त अविवाहित रहे। वैसे उनका नाम हेमामालिनी, सुलक्षणा पंडित जैसी अभिनेत्रियों से जुड़ा अवश्य था।

हम हिंदुस्तानी में एक छोटी सी  भूमिका के साथ, संजीव कुमार बॉलीवुड के सबसे प्रभावशाली अभिनेताओं में से एक बन गए। संजीव कुमार ने अपने समय के

सभी बड़े फिल्म निर्माताओं, एक्टर्स व  एक्ट्रेस के साथ काम किया। और हर तरह के किरदार  में अपने अभिनय की छाप छोड़कर उसे जीवंत बना दिया। चाहे बी आर चोपड़ा की पति पत्नि और वो में हास्य और कॉमेडी से भरपूर किरदार हो, या कोशिश में गूंगे और बहरे का किरदार या सीता और गीता, मनचली आदि में

रोमांटिक हीरो की भूमिका हो, या नया दिन नई रात में एक दो नहीं पुरे नो अलग – अलग रोल हो, इन सभी फिल्मों में संजीव कुमार के अभिनय को भरपूर प्रशंसा मिली।

संजीव कुमार द्वारा जीते गए पुरस्कारों की सूची इस प्रकार है :

उन्होंने १९७१ में दस्तक और १९७३ में कोशिश के लिए पुरस्कार जीता।

सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार: उन्होंने  १९७६  में अर्जुन और १९७७  में फिल्म अर्जुन पंडित के लिए पुरस्कार जीता।

बीएफजेए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता: उन्होंने १९७४ में अपनी फिल्म कोशिश के लिए पुरस्कार जीता नवल सितारे पुरस्कार।

शानू वरुण ट्रॉफी १९६९ में १९७१ में सिनेगोर्स काउंसिल (दिल्ली) फिल्म अवार्ड्स।

संजीव कुमार को शोले, त्रिशूल, आप की कसम  आदि कई फिल्मों में उनकी यादगार प्रतिष्ठित भूमिकाओं के लिए जाना जाता था।

गुलज़ार और संजीव कुमार महान दोस्त थे, संजीव अपनी सारी चिंताओं को उनके साथ साझा करते थे, और गुलज़ार ने उन्हें बाद के डायबिटिक नेफ्रोपैथी के बाद किडनी प्रत्यारोपण के लिए मना लिया। संजीव कुमार की तस्वीर का इस्तेमाल इक्के पे इक्का में मौसमी चटर्जी के पति के रूप में किया गया था।

प्रकाश मेहरा की आश्रित फिल्म “इन्सान के औलाद” में अभिनय किया। संजीव के निधन के बाद फिल्म ठप हो गई थी। उनकी जगह लेने के लिए मनोज कुमार को साइन किया गया था। फिल्म में संजीव कुमार, सायरा बानो, कुणाल गोस्वामी, अनुराधा पटेल ने अभिनय किया।

संजीव कुमार जन्म से ही  हृदय – रोग  के साथ पैदा हुए थे।  अपने पहले दिल के दौरे के बाद, उन्होंने अमेरिका में एक बाईपास सर्जरी भी करवाई। लेकिन इसके बावजूद  ६ नवंबर १९८५  को, ४७  साल की छोटी उम्र में उन्हें फिर बड़ा जानलेवा दौरा पड़ने से वे दुनिया को अलविदा कर गए।

इसमें कोई शक नहीं कि फिल्म इंडस्ट्री को उनके जाने की बहुत क्षति हुई। उनकी कोई भरपाई नहीं कर सकता। 

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