बीच बाजार में घमंडी बल्ले की बॉल से बहस …..


अरे, ये क्या तुहारा तो चोली दामन का साथ है, आज तुम दोनों को क्या हो गया ? जो बीच बाजार में इस तरह आपस में बहस कर रहे हो, मैंने बल्ले और बॉल की

बहस को रोकने की नाकाम कोशिश करते हुए कही। लेकिन इनके तो कान में जूं भी नहीं रेंग रही थी।
आखिर मैंने ही बॉल की तरफ मुखातिब होते हुए पूछा..
बॉल : मुझसे क्या पूछते हो, इस घमंडी बल्ले से पूछो, बड़ा इतराते हुए चल रहा था, जैसे कोई किला फतह कर लिया हो।
बल्ला : अरे जा ….जा
बॉल : देखो, देखो, कैसे बात कर रहा है, जब से इंदौर नगर निगम के अफसर को इसने क्या पीट दिया, तब से उसके बाद आज मिला, और तो और मुझे पूरी तरह इग्नोर करके और अकड़ कर चलने लगा …
बल्ला : इसमें घमंड वाली तो बात है ही, पता है ? मुझे विधायक ने अपने हाथ से पकड़ कर उस अफसर को मेरे से उसकी ऐसी धुलाई कराई,वो भी सरे आम पुलिस वालों के सामने, कि पिटने वाला अफसर आईसीयू में भर्ती है।
बॉल : तो इसमें कौन सी ऐसी बड़ी बात हो गई, रोज तो क्रिकेट के मैदान में पूरी ओडियन के सामने मैं ही तुम्हारी ऐसी धुलाई करती हूँ, कि तुम्हें नानी याद दिला देती हूँ, कई बार तो बॉलर मुझसे तुम्हारे हाथ — पैरों में ऐसी चोट लगवाता है,
कि तुझे पकड़ने वाला बैट्समैन लंगड़ाते हुए पवेलियन में वापस जाने को मजबूर हो जाता है।
बल्ला : बॉल को घूरता हुआ बोला… अरे जा, जा, बड़ी आयी, मुझे चोट मारने वाली। याद है ? कैसी तेरी धुलाई करता हूँ, जब मेरा दांव चलता है, और तो और कैसे पूरी ओडियन ख़ुशी से झूम जाती है, जब तुझे पवेलियन या बॉउंड्री से बाहर तगड़ी शॉट लगाकर फेंकता हूँ …मैं तो बचपन से बना ही धुनाई करने के लिए। मम्मी को जब घर में कपड़ों की धुनाई करने के लिए, थापी नहीं मिलती थी, तो मुझे ही उठा लेती थी। मुझे तो तभी भान हो गया था, कि मैं भी कुछ हूँ, मेरी भी अहमियत है, और आज तो मैंने ये भी साबित कर दिया कि हड्डियां भी मैं तोड़ सकता हूँ।
मैंने बीच में टोकते हुए : अरे, अरे ऐसी बात नहीं करते। शायद तुम ये तो नहीं सोच रहे, कि मैदान में कुछ माहौल बदलेगा ?
बल्ला : माहौल ? बिलकुल। देखो पहले तो बॉल मुझे चकमा देते हुए पीटने के लिए आती थी। लेकिन अब मैं बड़े हुए होंसले से उसकी चालों में न आकर उसकी ऐसी धुनाई करूंगा, कि वो याद करेगी। और एक बार और, पहले तो बॉल से मैं डरता था, अब बॉल फेंकने वाले बॉलर्स भी मेरे से डरेंगे।
अच्छा ये तो बताओ..अब आगे क्या प्लान है ?
अभी तो वर्ल्ड कप पर ही ध्यान दे रहा हूँ। हाँ आगे देखूंगा।
आगे मतलब ? यानी मैं समझा नहीं …
बल्ला : इसमें समझने वाली कोई बात नहीं, अब तो विधायक ने भी मुझे अपना लिया है। आगे देखेंगे, किसी राज्य में चुनाव हुए, तो वहां जरूरत पड़ सकती है हमारी।
बॉल : देखा ? कितनी अकड़ आ गई इसमें।
बल्ला : अकड़ वाली तो बात है, पहले तो हमें सिर्फ खिलौना समझते थे, अब तो हम हथियार जो बन गए।
अच्छा अब आखिरी बात बताओ, कि पहली बार लड़ाई में भाग लिया। पहली चीज माइंड में क्या आई ?
बल्ला : यही कि आज तक रिकॉर्ड बहुत तोड़े, अब हड्डियां तोड़ने का समय है।
बॉल : ओ … अब जाकर बल्ले में अकड़ का मतलब समझ आया।

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