पंडित जी से चर्चा


कई दिन हो गए, पंडित जी से मुलाकात हुए को। पहले चुनावों में यदा कदा पंडित जी से चुनावों की हलचल, नेताओं के बयानों, रणनीति आदि के बहाने मुलाकात करने पहुंच जाते थे। जब से चुनावों के बाद केंद्र में एनडीए की सरकार बनी है।

तब से पंडित जी से कोई खास मुलाकात नहीं हुई। सो आज रविवार का दिन था, पंडित जी घर में आराम से मिल जाएंगे। वो अक्सर रविवार को कम ही बाहर निकलते हैं।
मैंने नहा-धोकर घर में ब्रेकफास्ट किया और पंडित जी के घर का रुख किया। बैल बजाई तो अंदर से उनका नौकर आया।

नमस्ते अंकल जी…. मुझे देखते ही वो बोला। आ जाइये, पंडित जी ड्राइंग रूम में अभी बैठे हैं पेपर पड़ने।

ओ .. पंडित जी पेपर के पन्ने ऐसे पलट रहे थे, जैसे कि उनको किसी खास अपने मतलब की न्यूज़ न मिल रही हो। प्रणाम पंडित जी, उनके घुटने को हाथ लगते हुए मैं बोला।
पंडित जी अपने पेपर के पन्ने पलटते हुए बिना मेरी तरफ देखे बोले, आ गए बच्चू, कहो, क्या हाल हैं … क्या समाचार लाये हो ?
हाल तो ठीक हैं पंडित जी … बाकि समाचार तो आपके ही पास होते हैं। हम तो बस यूँ ही आ जाते हैं, आपसे गुफ्तगू करने। कुछ हमारी भी नॉलेज बढ़ जाती है, आप से बात कर के ।
अच्छा पंडित जी पीएम मोदी ने एनडीए की मीटिंग में एक और बात कही है, कि सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास। विश्वास यानी कि उनका इशारा मुस्लिम वर्ग के गरीब, वंचित लोगों पर था। उधर ओवैसी उनके बयान को लेकर मोदी की बुराई करने में लगे हैं ….
एक बात सुन बच्चू ओवैसी की तो दुकान बंद हो रही है, अब ऐसे में वो मोदी के खिलाफ बयानबाजी नहीं करेगा तो क्या करेगा। और भाजपा को आगे आने वाले २०२४ के चुनाव की तैयारी भी तो करनी है।
मैं भी अब कुछ कुछ समझ रहा था, पंडित जी के पास बैठकर नॉलेज तो मिलती ही है।
अच्छा पंडित जी कुछ नई खबर बताओ…कांग्रेस का आजकल अध्यक्ष कौन है। सारे कांग्रेस जन इसको लेकर असमंजस में पड़े हैं … राहुल गाँधी हमेशा की तरह बिना बताये विदेश भी हो आएं हैं, और पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक बयान दिया है कि पार्टी के अध्यक्ष राहुल थे, हैं और रहेंगे। ये तो साफ तौर पर
उनकी चाटुकारिता है।
अबे बच्चू मैंने पिछली बार भी जब तू आया था तो एक बात बोली थी, कि राहुल ने इस्तीफा किसको दिया था,
अपने ही घर में तो दिया था। कांग्रेस उनकी घर की तो है। रही बात उनके न मानने की बात …तो अभी उनका मन नहीं है कुछ काम करने का। हाँ जब मन होगा तो देख लेंगे। अध्यक्ष पद कौन सा भागा जा रहा है। और दूसरी बात जो तूने अभी कही है, चाटुकारिता की तो ये पिछले ७० सालों से यही तो कर रहे हैं, आखिर इन्हें भी तो अपना घर, परिवार चलाना है।

अच्छा पंडित जी … तभी कांग्रेस ने लोकसभा में अधीर रंजन चौधरी को संसदीय दल का नेता चुना है …
लेकिन बिहारी शॉटगन दूसरों को खामोश कराते – कराते पटना साहिब से हारकर खुद खामोश हो गए हैं, और यही नहीं दूसरों से ताली ठोकने को कहते – कहते सिद्धू खुद पर थाली ठुकवा रहे हैं। उन्होंने कैप्टन द्धारा उनका विभाग बदलने पर विभाग का चार्ज अभी तक नहीं संभाला।
अपने बालों में उंगलियां फेरते हुए पंडित जी तपाक से बोले, इसमें कौन सी बड़ी बात हो गयी, उनका बिजली विभाग कैप्टन ने खुद जो संभाल लिया है। देख बच्चू तुझ से पिछली बार मैंने ये भी कहा था कि, कैप्टन एक घाघ नेता है। वो अपने सामने किसी को ज्यादा मुंह उठाने नहीं देगा। सो हो गया न।
मैं भी समझ गया अपने पंडित जी क्या किसी से कम हैं, हम ऐसे ही थोड़े आ जाते हैं।
अच्छा पंडित जी उधर आंध्र प्रदेश में चन्द्रबाबू नायडू के चार सांसद बीजेपी में शामिल हो गए हैं …
तो इसमें कौन सी बड़ी बात हो गयी, तपाक से पंडित जी बोले, आखिर उन्होंने भी तो अपना घर परिवार चलाना है।
अच्छा पंडित जी बंगाल में ममता दीदी पी एम मोदी यानी भाजपा के ऊपर लाल पीली हो रही है, अब तो चुनावों के बाद भी सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग करना नहीं छोड़ा है। वो बंगाल पुलिस से बीजेपी के कार्यकर्ताओं को मरवा रही है .. उन्होंने
तो लोकतंत्र की एक तरह से धज्जियां ही उड़ा दी है ..
सुन बच्चू वो समझती है बीजेपी ने वहां पर १८ सीटें जीतकर उनकी जमीन खिसकानी शुरू कर दी है। अब ऐसे में उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाना आसान होगा न। इससे उनके कार्यकर्ताओं में दहशत पैदा होने से और लोग डरेंगे। लेकिन एक बात सुन बच्चू ‘ विनाश काले विपरीत बुद्धि ‘, अब ममता दीदी के जाने का समय आने वाला है …
लेकिन पंडित जी बीजेपी केंद्र में एक शक्तिशाली सरकार बना कर बैठी है, वो चाहे तो धारा ३५६ का इस्तेमाल करके ममता सरकार को राज्य में लॉ एंड आर्डर को कंट्रोल न कर पाने के कारण बर्खास्त कर सकती है…
सुन बच्चू बीजेपी ये अच्छी तरह जानती है कि कुछ समय बाद बंगाल में एसेम्बली के चुनाव हैं, और ममता दीदी अपने प्रति सिम्पैथी का लाभ न उठा सके। भाजपा किसी भी तरह ममता दीदी को चांस नहीं देना चाहती। दोनों शह मात के खेल में रमे हैं ….ये सब सत्ता की राजनीति का खेल है।
अच्छा एक बात तो बताओ पंडित जी बुआ मायावती ने बबुआ अखिलेश से नाता तोड़ लिया है। अब उन्होंने एलान कर दिया है कि वो
आगे से अकेले ही चुनाव लड़ेगी। और तो और अब बुआ बबुआ के ऊपर तरह – तरह के आरोप लगा रही है कि अखिलेश ने मुस्लिम
उम्मीदवारों को ज्यादा टिकट नहीं दिया ….वगैरा वगैरा।
सुन बच्चू इनका गठजोड़ कौन सा नैतिकता के आधार पर था, ये तो वैसे भी जल्दबाजी में अवसरवादी गठबंधन था। जब इनको अवसर नहीं मिला सत्ता में आने का, तो टूट गया। याद है ? पिछले लोकसभा चुनावों में ऐसे ही अखिलेश ने राहुल गाँधी से चुनावी गठजोड़ किया था, ? चुनाव हारते ही दोनों ने अलग होकर अपनी – अपनी राह पकड़ ली।
एक बात सुन बच्चू राजनीति में कोई परमानेंट दोस्त, दुश्मन नहीं होता।
पंडित जी ने ये बोलते ही अपनी घड़ी की और रुख किया …
मैंने भी पंडित जी से विदाई लेने में देर न लगाते हुए कहा, अच्छा पंडित जी फिर मिलेंगे, और वापस आ गया।

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