प्रोटीन्स सप्लीमेंट्स हमारी स्वस्थ बॉडी के लिए कितना जरूरी …


आजकल ये आमचलन हो गया है, जब भी युवा जिम में पसीना बहाता है, तो उसे प्रोटीन पाउडर खाने की सलाह दी जाती है। लेकिन यह समझने की बात है कि क्या प्रोटीन का इस तरह सेवन करना उचित है ? और इसके क्या फायदे और नुकसान भविष्य में होने वाले हैं। आइये इसकी जानकारी लेते है। अपने शरीर को सुडोल देखने और बनाने की प्रबल इच्छा युवाओं में काफी पहले से ही रही है।

इसके लिए वो जिम जाकर अपने डेली रूटीन में सख्ताई से वर्क आउट और हेल्दी डाइट लेने का नियमपूर्वक पालन भी करते हैं।
सामान्यतः सभी जिमिंग करने वाले वाले युवा भारी शारीरिक एक्सरसाइज के साथ प्रोटीन के ऑप्शन यानी प्रोटीन के सप्लीमेंट्स के सेवन को उचित मानते हैं। लेकिन …
प्रोटीन सप्लीमेंट्स : ये ऑप्शन पूरक आहार होते हैं। ये शरीर के अतिरिक्त वजन को कम करने में सहायक और मांसपेशियों की मजबूती को बढ़ाने वाले माने जाते हैं। प्रोटीन के इन ऑप्शन को तैयार करने के लिए विभिन्न स्त्रोंतों से प्रोटीन लिया जाता है, जैसेकि पौधे सोयाबीन, मटर, चावल, आलू , अंडे और दूध आदि । इसके बाद इसके ऑप्शन में शकर, आर्टिफिशियल फ्लेवर, विटामिन्स और खनिज तत्व मिलाये जाते हैं। ये प्रोटीन सप्लीमेंट पाउडर, शेक और कैप्सूल के रूप में होते हैं।
यहां ध्यान दें :
आमतौर पर सप्लीमेंट्स में दो प्रकार के प्रोटीन मौजूद होते हैं। वे ( whey), और केसिन (casein) । इन्हें दूध से निकाला जाता है। ये अमीनो एसिड के अच्छे

स्त्रोत हैं। वैसे अधिकतर जिम जाने वाले युवा ‘ वे ‘ प्रोटीन का सेवन करते हैं। यह एक तेजी से पचने वाला प्रोटीन है। लेकिन वहीं ‘ केसिन ‘ को इसकी तुलना में पचने में काफी समय लगता है। यहां ये जानना जरूरी है कि ‘ वे ‘ प्रोटीन में ग्लोब्यूलर प्रोटीन मौजूद होता है। जिससे शरीर को बजाय कम फायदे के नुकसान ज्यादा होता है।
ऑप्शन के साइड इफैक्ट :
प्रोटीन सप्लीमेंट्स का यदि लगातार सेवन किया जाता है, तो इससे शरीर को काफी नुकसान पहुंचता है। प्रोटीन पाउडर के सेवन से शरीर में इन्सुलिन के स्तर के बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है। क्योंकि ये ब्यवसायिक रूप से तैयार की जाती है।
लिहाजा इसमें क्या – क्या मौजूद हैं, यह भी जानना जरूरी है। कुछ प्रोटीन पाउडर में अत्यधिक विषाक्त धातु जैसे कि सीसा, कैडमियम, आर्सेनिक और पारा आदमी होती हैं। जिस कारण सिरदर्द, जल्दी थकान होना, कब्ज और मांशपेशियों व जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है। ‘ वे ‘ प्रोटीन में कुछ हार्मोन्स और बायोएक्टिव पेप्टाइड्स होते हैं, जिससे मुहांसों की आशंका बढ़ जाती है।
कुछ ‘वे ‘ प्रोटीन सप्लीमेंट्स में शकर के रूप में अतिरिक्त कार्बोहइड्रेट मौजूद होते हैं। जो फैट घटाने के बजाय बढ़ाते हैं। इसके अतिरिक्त सेवन से ह्रदय संबंधी खतरा भी जुड़ा हुआ है। और तो और पेट संबंधी विकार भी पैदा हो सकते हैं।
प्रोटीन पाउडरों के सेवन से समय के साथ ओरिस्टोपोरोसिस (हड्डियों में कमजोरी) और किडनी संबंधी परेशानी खड़ी हो सकती हैं।
इन सप्लीमेंट्स का प्रयोग करने वाले लोग इनके सेवन के अन्य बिंदुओं की तरफ ध्यान नहीं देते। जैसे कि पानी की सही मात्रा, विटामिन, खनिज तत्व और फाइबर का सही मात्रा में सेवन भी शारीरिक स्वास्थ्य कको बनाये रखने में महत्वपूर्ण है।
दूसरों के कहने में न आएं :
अक्सर देखा गया है कि युवा अपने घर वालों के बजाय दूसरों की सलाह पर प्रोटीन पाउडर का सेवन शुरू कर देते हैं, लेकिन यह बिलकुल भी सुरक्षित और प्रभावी नहीं है। तथ्य यही है कि प्रोटीन पाउडर में सभी आवश्यक पोषक तत्व नहीं होते। जो हमारे भोजन को पूरा करने के लिए जरूरी है। इसीलिए इसका सेवन करने भी पड़े तो सीमित मात्रा में ही करें। और यदि शुरू कर ही
रहे हैं तो पोषण विशेषज्ञ (डाइटीशियन) की सलाह लेना न भूलें।
क्या लें ?
प्राकृतिक प्रोटीन लें। जैसे कि अंडा ( यदि हो सके तो देशी अंडा ), दूध और मौसमी फ्रूट्स आदि लें। प्राकृतिक प्रोटीन के लिए डेयरी प्रोडक्ट, पीनट बटर, बादाम, कद्दू के बीज और ग्रीक योगर्ट प्रोटीन्स से भरपूर होते हैं। इन्हें लेने से कोई भी नुकसान होने के बजाय आप एक सुन्दर, सुडोल शरीर को प्राप्त करेंगे। इसमें कोई शक नहीं है।

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