पंडित जी से चर्चा ….


कई दिनों से पंडित जी से मिलने का मन कर रहा था, केंद्र में एनडीए की सरकार ने शपथ भी ले ली है। सो मैं सुबह – सुबह ही पंडित जी से मिलने उनके घर जाने के लिए निकल गया, कहीं पंडित जी निकल न जाएँ। पंडित जी के घर जाकर मैंने बेल बजाई, इतने में ही उनका नौकर बाहर आया ..

पंडित जी हैं .. ? हाँ जी हैं, अंदर आ जाइये। थैंक्स गॉड …धीरे से गुनगुनाते हुए मैं बोल उठा।
कुछ कहा आपने .? नौकर ने पलट कर पूछा,
नहीं तो, बस यूँ ही मुंह से निकल गया। पंडित जी ड्राइंग रूम में न्यूज़ पेपर में हमेशा की तरह ऐसे लीन थे, जैसे कुछ जरूरी चीज ढूंढ रहे हों।
प्रणाम ..पंडित जी, उनके घुटने को झुक कर छूते हुए मैं बोला
आ गए बच्चू, बिना मुंह उठाये हमेशा की तरह पंडित जी बोले।
मैं उनके पास रखी कुर्सी पर बैठ गया।
और बताओ, सब कुशल हे ..क्या समाचार लाये हो…?
समाचार हमने क्या लाना था, वो तो सब आपको ही मालूम है, हम तो बस यूँ ही कई दिनों से आपसे मिलने
को मन कर रहा था, सोचा आज आपसे चर्चा हो जाये .. और आ गए।
अच्छा जी पंडित जी एनडीए का तो आपको पता ही है, अबकी बार वो प्रचंड बहुमत से जीतकर फिर से सत्ता में आने में कामयाब हो गई। और उधर कांग्रेस में सब ठीक नहीं चल रहा है। राहुल ने अपनी पार्टी की अध्यक्षता से इस्तीफा दे दिया है। अब सभी पार्टी के लोग उन्हें अपना इस्तीफा वापस लेने के लिए मना रहे हैं।
सुन बच्चू, इस्तीफा उन्होंने कौन सा कहीं बाहर दे दिया है, अपने घर में ही तो दिया है… ये पार्टी उनकी अपने घर की बपौती ही तो है। जब चाहेंगे मान जायेंगे। हाँ रही बात सब उन्हें मनाने में लग इसीलिए गए हैं कि आप इस्तीफा वापस ले लो।
सुन बच्चू ये तो कोंग्रेसियों की मजबूरी है, एक इसी परिवार के नाम पर ही तो कांग्रेस जीवित है, नहीं तो कब की खत्म हो जाती।
पंडित जी मैं कुछ समझा नहीं… बीच में पंडित जी को रोकते हुए मैं बोला
इसमें न समझने वाली क्या बात है, कांग्रेस में सारे ही पीएम पद के दावेदार जो हैं, कोई किसी से कम नहीं है, सारे अपनी – अपनी ताल नहीं ठोंक देंगे .. ? तो समझो कांग्रेस पार्टी खत्म।
लेकिन पंडित जी एक बात राहुल ने और कही है अपनी पार्टी की मीटिंग में, कि उन पर उनकी पार्टी के ही कुछ लोगों ने दबाव डालकर अपने परिवार यानी कि अपने बच्चों के लिए टिकट ले लिए। और चुनावों में उन्हीं के लिए प्रचार, रैलियां करते रहे। और पार्टी का खाता भी नहीं खुला। ये शायद राहुल ने राजस्थान के अशोक गहलोत और कमलनाथ के बारे में बोलै है। अशोक गहलोत ने तो अपने बेटे वैभव के समर्थन में ९३ रैलियां तक कर डाली, इसके बावजूद उनके लड़के को हार का मुंह देखना पड़ा। राहुल खुद अमेठी से हार गए।
अबे सुन बच्चू राहुल ने उनको अपनों के लिए टिकट मांगने पर उन्हें देना ही था, जो ब्यक्ति खुद परिवार की पार्टी का मुखिया हो वो दूसरे को कैसे परिवारवाद का हवाला देकर टिकट देने से मना कर देता। हाँ रही अब उनको बोलने की बात, पार्टी की हार के बाद हार का ठीकरा किसी पर तो फोड़ना ही था।
लेकिन पंडित जी अब राहुल ने ये भी एलान कर दिया है, कि किसी भी न्यूज़ चैनल पर कांग्रेस का कोई बंदा डिबेट में हिस्सा लेने नहीं जायेगा …
हिस्सा न लेने के अलावा कांग्रेस के चारा भी क्या था, उन्हें अच्छी तरह पता है कि न्यूज़ चैनल वालों के पास उनकी हार के बारे में जो भी सवाल पूछे जायेंगे उनके पास बगलें झाँकने के असावा कुछ नहीं बन पायेगा। ऐसे में अपनी इज्जत
उतरवाने से तो अच्छा है की वहां न ही जाओ।
पंडित जी चंद्रबाबू नायडू चुनावों के रिजल्ट से पहले इवीएम को निशाना लगाते हुए सबको इकठ्ठा करके चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट जाते रहे, और वापस अपने प्रदेश चले गए…
अबे बच्चू वापस जाने के अलावा उनके सामने चारा भी क्या बचा था, उधर उनके आंध्र में उनकी खुद की जमीन जगनरेड्डी ने जो खींच ली।
अच्छा पंडित जी उधर वेस्ट बंगाल में भाजपा ने १८ सीटें जीतकर ममता दीदी की नींद हराम कर दी है। लगता है वो बोखला गई
है, अब वो जहां से भी गुजरती है, वहां के लोग ‘ जय श्री राम ‘ के नारे लगाने लगते हैं, दीदी अपनी गाड़ी से आग बबूला होकर
गुस्से में पुलिस वालों से उनको जेल तक में डलवा रही है, ये तो सरासर गलत है।
सुन बच्चू अब कहावत है, खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचे, ऐसे में अब दीदी करे तो क्या करे।
अच्छा पंडित जी इधर बिहार के सुशासन बाबू नितीश कुमार शपथ ग्रहण से ठीक पहले एनडीए में अपनी पार्टी को मन मुताबिक प्रतिनिधित्व न मिलने से नाराज हो गए हैं ..
नाराज तो होना ही था बच्चू, जब भाजपा अपने दम पर ३०३ सीटें जीतकर सत्ता में आ गई, तो वो अपने हिसाब से तो मंत्रियों के
कोटे अलॉट करेंगे। ऐसे में नितीश कुमार को समय की नजाकत समझ लेनी चहिये। ये बोलते ही पडित जी ने अपनी घड़ी की और नजर दौड़ाई। ऐसे में मैंने भी निकलने में भलाई समझते हुए पंडित जी से विदा ली।

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