टैलेंट को समझकर बच्चे को दें प्रोत्साहन…


ज्यादातर माता-पिता अपने बच्चों के टैलेंट को जाने-परखे बिना उन पर दूसरों का अनुकरण करने यानी भेड़चाल चलने का दबाव बनाते हैं। यदि पैरेंट्स डॉ, लॉयर, इंजीनियर, या अभिनेता इत्यादि हैं, तो अपने बच्चे को अपने पेशे से जोड़ना पसंद करते हैं, या उस पर प्रेशर बनाकर इसे थोपने का प्रयास करते हैं। ये
सरासर गलत है।

जी हाँ इससे बचना बहुत जरूरी है जानें क्यों-
दोपहर बाद करीब चार बजे का समय रहा होगा। मेरे साथ-साथ सभी सहयोगी अपने काम में तल्लीन थे। तभी दरवाजा खुला और मुस्कराते हुए प्रवीण जी ने कमरे में प्रवेश किया। उनके हाथ में मिठाई का डिब्बा था। मुस्कराते हुए ही उन्होंने सभी को सुनाते हुए मुझ से कहा, सर चमत्कार हो गया। जिस बच्चे को मेरे साथ-साथ हर कोई नकारा बता और समझ रहा था, उसने हाईस्कूल की परीक्षा 75 फीसदी अंकों से पास कर ली है। मुझे अभी भी विश्वास तो नहीं हो रहा है, पर यह सोलह आने सच है। इसीलिए मैं आप सभी का मुंह मीठा कराने आया हूं। इसके बाद उन्होंने वहां उपस्थित सभी लोगों को अपने बड़े बेटे की कारस्तानी और कहानी बतानी शुरू की। कैसे कुछ महीने पहले तक वह कितनी शैतानी करता था, और यहां तक कि स्कूल वाले भी उससे बुरी तरह परेशान थे। बच्चों को स्कूल में अच्छा प्रदर्शन करने पर स्कॉलरशिप के रूप में प्रोत्साहन मिलता है, लेकिन मेरे बेटे के लिए स्कूल वालों ने यहां तक कह दिया था कि इसे घर ले जाइए और इसे ले जाने के लिए हमसे पैसे ले जाइए। वह समय हमारे लिए बेहद अपमानजनक था।
प्रवीण जी ने बताया कि उस घटना से हम बहुत आहत थे। हमें कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था। यहां तक कि मेरी पत्नी बीमार रहने लगी थीं। उसी दौरान उन्होंने मुझ से अपनी समस्या बताकर मिलने और बेटे को मिलाने की इच्छा प्रकट की। एक दिन शाम को वे उसे लेकर मेरे पास आ गए। मैंने उनके बेटे के

सामने ही प्रवीण जी से उसकी अच्छाइयों और खराबियों के बारे में बताने को कहा। उन्होंने उसकी स्कूल से लेकर घर और आस-पड़ोस तक से आने वाली शैतानियों की शिकायतों के बारे में बताया। फिर मैंने उन्हीं से उसकी अच्छाइयां या उसकी काबिलियत के बारे में भी बताने को कहा। उन्होंने बताया कि यह स्कूल में ड्रम बहुत अच्छा बजाता है। जुगाड़ टेक्नोलॉजी से कुछ न कुछ बनाता रहता है, पर ज्यादातर नुकसान पहुंचाने वाली चीजें। इसके बाद मैंने उनके सामने ही बेटे से बात करनी शुरू की। उसने कहा कि मुझे घर में कोई कुछ समझता ही नहीं। यहां तक कि छोटा भाई भी। सब उसी की तरफदारी करते रहते हैं। सभी मुझे ही बोलते-डांटते रहते हैं।
मैंने प्रवीण को समझाया कि आप इसकी जिस विंध्वासात्मक शैतानियों के बारे में बात कर रहे हैं, उसे आप सकारात्मक मोड़ देने का प्रयास करें। इसकी अच्छाइयों को समझें, सराहें और इसे उसी दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। तब मैंने उनके बेटे को भी प्रेम से समझाया कि देखो, माता-पिता और भाई सभी को तुम से लगाव है। तुमको भी जरूर होगा। तुम अपने सोचने का तरीका बदल दो। अगर छोटा भाई तुम्हें परेशान करता है, तो तुम अपना बड़प्पन दिखाओ। शांत रहो। अगर अपनी पहचान बनाना और सबकी तारीफ चाहते हो, तो अपने टैलेंट को अच्छे और अपनी रुचि के कामों में लगाओ। इसके बाद वे दोनों चले गए, लेकिन प्रवीण जी के बेटे के मन में मेरी बातें घर कर गई थीं। कुछ दिन बाद ही प्रवीण जी ने बताया था कि आपने ऐसा क्या कर दिया। बेटे में तो काफी परिवर्तन दिखने लगा है, और वह अब पढ़ने में भी रुचि लेने लगा है।
न कोसें, न दुत्कारें :
दरअसल, ऐसी स्थिति तमाम माता-पिता की होती है। वे अपने बच्चों को चाहते तो हैं, लेकिन उनके द्वारा अपनी बातें अनसुनी करने या परीक्षाओं में अच्छा परिणाम न देने पर उन्हें लगता है, कि दूसरों की तुलना में उनका बच्चा बजाय आगे बढ़ने के पीछे ही रह रहा है। हालांकि वे ऐसा दूसरों से तुलना करते हुए बताते हैं। यहां ध्यान देने वाली बात है, कि जरूरी नहीं आप सफल अभिनेता, डॉक्टर, इं जीनियर, स्पोर्ट्समैन या कोई भी हो, तो ये जरूरी नहीं कि आपका बच्चा भी आपके पेशे में सफलता प्राप्त करेगा।
शैतानियों को दें सकारात्मक मोड़ :
अगर आपको भी लगता है कि आपका बच्चा बहुत शैतान है। उसका पढ़ने में मन नहीं लगता। तो जरा ठहरें। अगर आपने अपने बच्चे को सही दिशा में आगे बढ़ते हुए देखना और खुश होना चाहते हैं, तो सबसे पहले उसके अंदर छिपे टैलेंट को
समझना होगा। ये एक सच्ची कहानी है। हमारे समाज में ऐसे कई लोग मिल जायेंगे, जो अपने पेशे में ऊंचाइयां छू रहे होते हैं। और वो अपने बच्चे को अपने पेशे में लाने का भरसक प्रयत्न भी करते हैं, लेकिन बच्चा उस पेशे में सफल नहीं हो पाता। अतः ऐसे में पैरेंट्स को चहिये कि वे अपने बच्चे के टेलेंट को समझें, यानी उसकी रूचि किसमें हैं, ये समझने का प्रयास करते हुए बच्चे को उसी में
आगे बढ़ने को प्रेरित करते हुए उसको साधन मुहैया कराएं। उसके बाद आप देखेंगे आपका बच्चा उसमें न केवल सफल होगा बल्कि बुलंदी भी छुएगा।

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