बॉलीवुड के स्टार्स द्धारा निभाई गई, यादगार फादर की भूमिकाएं…


दूसरी सीरीज….

५ .. अभिनय चाहे हास्य द्वारा दर्शकों के दिलों में गुदगुदी से, या कैसी भी चरित्र भूमिका हो, उत्पल दत्त

के अभिनय की छाप दर्शकों के दिलों पर हमेशा पड़ती थी।  उत्पल दत्त  की मूवी गोलमाल सन 1979 में उनकी  भूमिका न होती, तो पूरी कहानी ही बैठ जाती। मूवी में भवानी शंकर का शानदार किरदार जैसे इन्होने निभाया था, वैसा शायद ही कोई दूसरा निभा पाता। उत्पल दत्त इसमें अपनी बेटी बिंदिया गोस्वामी के लिए ऐसे  लड़के की  तलाश में लगे रहते थे, जिसके विचार उनके खुद के अनुरूप हो। 

६ .. अब बात करते हैं बॉलीवुड के  ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार की मूवी शक्ति,  सन 1982, में उनके सामने बॉलीवुड के बड़े सितारे अमिताभ बच्चन उनके बेटे की भूमिका में थे। दिलीप कुमार ने इसमें एक ईमानदार पुलिस वाले की भमिका

की भमिका को अपने प्रभावशाली अभिनय से सजीव कर दिया था। जबकि उनके बेटे की भूमिका में अमिताभ से उनकी विचारों को  लेकर आपस में नफरत थी। दोनों ने नफरत को अपने  जानदार अभिनय द्वारा अभियक्ति से प्रस्तुत किया।  दिलीप कुमार ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फिल्मफेयर  पुरस्कार जीता जबकि अमिताभ बच्चन को भी इसी पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया।

७.. सन १९८२ में मूवी दर्द का रिश्ता जिसमें सुनील दत्त ने  संवेदनशीलता  का चित्रण अपने खूबसूरत अभिनय द्वारा किया था। उनकी भूमिका को देखकर एकबारगी तो यही लगता है ये उनके अलावा कोई नहीं कर सकता था।

उन्होंने यह मूवी  अपनी दिवंगत पत्नी नरगिस की याद में बनाई थी, जिनकी कैंसर से मृत्यु हो गई थी। डॉ। रवि वर्मा (सुनील दत्त) न्यूयॉर्क में कार्यरत एक प्रसिद्ध सर्जन हैं। उनकी पत्नी अनुराधा (स्मिता पाटिल) ल्यूकेमिया पर एक शोधकर्ता हैं। डाक्टर रवि  का सपना अपने देश  भारत लौटने के लिए अपने कौशल का उपयोग कर वहां रोगियों की मदद करना है। अनुराधा अपने शोध कार्य के लिए प्रतिबद्ध, उसके साथ नहीं जा सकती। उन्हें तलाक मिल जाता है।

भारत में घर वापस रवि ने फिर से शादी की लेकिन उनकी पत्नी एक बेटी खुशबू को जन्म देते हुए गुजर जाती है। जब खुशबू बारह वर्ष की थी, तब वह बीमार पड़ गई। रक्त परीक्षण से पता चलता है कि उसे ल्यूकेमिया है। रवि को पता

चला कि न्यूयॉर्क का एक अस्पताल बोन मैरो ट्रांसप्लांट करता है। न्यूयॉर्क पहुंचने पर, रवि को पता चलता है कि इस उपन्यास प्रक्रिया का संचालन करने वाला डॉक्टर कोई और नहीं बल्कि उसकी पूर्व पत्नी अनुराधा है। प्रत्यारोपण सफल है और खुशबू बच जाती है। मूवी  का मूल विषय सुनील दत्त का एक पिता के रूप में उनकी बेटी के प्रति प्यार है, यह इतनी मजबूत भावनात्मक  ऊर्जा का प्रदर्शन करता है कि यह दर्शकों को अधिक मानवीय बनने के लिए मजबूर करता है

८.. अब बात करते हैं बॉलीवुड के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना की सन  १९८३ में आई मूवी ‘ अवतार ‘  की। अवतार यानी राजेश खन्ना  ने मूवी में एक  कार

मैकेनिक के  कैरेक्टर की भूमिका निभाई, जिसका  दिल और आत्मा एक कम बजट का जीवन  जीने का विकल्प चुनता है लेकिन वह अपने दो  बेटों पर अपनी क्षमता  से अधिक खर्च  करता है। व उन्हें उच्च शिक्षा देकर पैरों पर खड़ा

करता है।  उनका बड़ा बेटा, रमेश, अपने ही घर से अवतार को धोखा देता है और उन्हें  बेदखल करता है, जबकि छोटा लड़का चंदन अलग रहने का फैसला करता है।  उसे लगता है कि उसके माता-पिता का स्टेटस उसके लेवल का  नहीं है। अवतार की मुश्किल बढ़ती जा रही है, और  पैसों की कमी से जूझ रहा था।  अवतार एक दुर्घटना में अपनी एक बाजु खो देता है,  और  जीवन भर के लिए वो एक हाथ से  काम करने को मजबूर हो जाता है। एक दिन  राजेश खन्ना ने अपनी वर्क शॉप में एक यंत्र का अविष्कार किया। जिसके बाद धीरे धीरे अमीर  बन जाता है। और मूवी में वहां से कई नाटकीय मोड़ आते हैं।

अवतार के रूप में राजेश खन्ना ने अपने शानदार अभिनय से  दर्शकों का दिल जीत  लिया था। अवतार मूवी उस समय की सुपर हिट साबित हुई।

उनकी पत्नी के रोल में शबाना  आज़मी का अभिनय भी जानदार था।

सन  १९७५ में आई अपने समय की बम्पर मूवी शोले, उस दौर में शायद ही कोई ऐसा शख्स होगा जिसने शोले नहीं देखी होगी। अपने जानदार अभिनय के

लिए मशहूर  संजीव कुमार ने एक रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर ठाकुर बलदेव सिंह की भूमिका निभाई, जिसका लड़का डाकू गब्बर सिंह यानि अमजद खान के हाथों मारा जाता है, और वह अपनी विधवा बहू जया भादुड़ी के साथ रहता है। संजीव कुमार अपने लड़के की मौत का बदला लेने के लिए गुस्से की आग

में हर समय उबलता रहता है। इस मूवी में हालाँकि ठाकुर संजीव कुमार के दोनों हाथ भी अमजद खान द्वारा काट दिएजाने से शाल ओढे रहता है।  और ठाकुर संजीव कुमार ने अपने शानदार अभिनय से अपनी भूमिका को जीवंत कर  दिया। 

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