क्या सेफ है ‘आरओ’ (RO) फ़िल्टर का पानी … ?


आमतौर पर सभी घरों में ‘आरओ ‘ वाले फ़िल्टर का पानी पीने  का चलन हे, या बढ़ता जा रहा है। क्या आप जानते हैं, कम  टीडीएस वाला पानी पीना आपकी सेहत के लिए कितना नुकसान दायक हो सकता है..?

आइये जानते हैं… 

आमतौर पर आप  घरों में वाटर प्यूरीफॉयर लगवा लेते हैं, और ६, ७ महींने बाद सर्विस भी करवा लेते हैं, और यह समझ लेते हैं, कि  हम अब सेफ पानी पी रहे हैं।  और ऐसे में कोई जानकार आपसे कह दे की आप लोग सेहत के लिए बिलकुल असुरक्षित पानी पी रहे हैं। एक बार तो आप उसकी  बात पर यकीन ही नहीं करेंगे, और उसका विरोध भी करेंगे। और आपका विरोध करना लाजिमी भी है। लेकिन ये कटु सत्य है आपका ‘आरओ’ का पानी जिसे आप अपने स्वास्थ्य के लिए

सुरक्षित मानते हैं, वो इसके उलट हो। क्योंकि वो आपके पानी को जरूरी मिनरल्स से वंचित कर रहा हो, जो आपके स्वास्थ्य के लिए जरूरी हो।

हमारे शरीर के लिए आवश्यक सभी मिनरल्स जैसे  कैल्शियम क्लोराइड आयरन,मैग्निशीयम और सल्फेट आदि पीने के पानी में होते हैं। इनकी एक निश्चित मात्रा हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी है। यानि कि एक बैलेंस्ड मिनरल्स वाला पानी। एक अच्छा आरओ प्यूरीफायर  का काम आपके यहां हो रही पानी की सप्लाई की हार्डनेस को खत्म या कम करके, और टीडीएस के लेवल को बैलेंस में रखकर ऐसा पानी देना होता है, जिसमें उपरोक्त सभी मिनरल्स अपनी सही मात्रा में मौजूद हों। पानी में टीडीएस जितना कम होगा, वह   स्वाद में उतना मीठा और स्वाद लगता है। आरओ प्यूरीफायर की

सर्विस कंरने वाले टेक्नीशियन अक्सर टीडीएस के लेवल को कम करके रखतें  हैं, ताकि  पानी पीने में स्वाद और मीठा लगे। और इन सब से अनजान  पानी पीने वाला यह समझ बैठता है, कि ये हमारे स्वास्थ्य की लिए सुरक्षित है। और कोई

शिकायत की जरूरत महसूस नहीं करते। लेकिन जब टीडीएस यानी टोटल  पानी में घुले हुए कुल मिनरल्स ‘ टोटल डिसालवड साल्वेंट्स- कुल घुलित ठोस ‘ का लेवल ज्यादा ही कम हो जाता है, तो आरओ प्यूरीफायर पानी में से जरूरी

मिनरल्स को भी फ़िल्टर करने लगता है।        

ऐसे में जरूरत है अपने घर में लगे ‘ आरओ ‘ वाटर प्यूरीफायर से सप्लाई होने वाले पानी के  टीडीएस लेवल पर नजर रखने की। सबसे पहले  जरूरी है, प्रत्येक ६-७ महीने में सर्विस करने वाले टेक्नीशियन से सर्विस करवाते समय वाटर प्यूरीफायर के पानी का  टीडीएस लेवल चेक करवाएं। याद रहे हर टेक्नीश्यन के पास टीडीएस लेवल चेक करने का डिवाइस होता है, और

यदि न हो तो उसे लाने  के लिए कहें। पानी का टीडीएस  मिनिमम  ८० और मैक्सिमम १५० तक होना चहिये। आजकल नई टेक्निक के आर ओ वाटर प्यूरीफायर में ही टीडीएस कंट्रोलर लगे होते हैं। जिनसे आप खुद आसानी से टीडीएस के लेवल को कण्ट्रोल कर सकते हैं। और यदि आपके पास पुराना आरओ सिस्टम है तो उसमें भी अलग से डिवाइस अपने टेकिनीशयन से

लगवाकर पानी के टीडीएस लेवल को कंट्रोल कर सकते हैं। इस डिवाइस की कीमत भी ज्यादा नहीं है। इसके अलावा यदि आपके शहर, या आसपास  में कोई सरकारी या प्राइवेट लैब हो तो वहां पर अपने पानी का सेम्पल ले जाकर टेस्ट करवा लेना चहिये। इससे आपके  पानी में टीडीएस लेवल के अलावा दूसरे मिनरल्स जैसे कि कैल्शियम, मैगनीज, मैग्नीशियम, कॉपर, ज़िंक, फ्लोराइड और आयरन की मात्रा के  अलावा कुछ हानिकर तत्वों लैड, आर्सेनिक आदि का भी पता लगा सकते हैं। 

   विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट  के अनुसार यदि लम्बे समय तक आप कम टीदीएस वाला पानी पीने  से दांतों, जोड़ों, हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द , तकलीफ, कमजोरी शुरू हो जाती है। इसके साइड इफ़ेक्ट में बच्चों की ग्रोथ, हाइट पर असर होता है। इसके अतिरिक्त यदि ज्यादा टीडीएस वाला पानी है तो भी शरीर के लिए  घातक है। यानि कि उसमें फ्लोराइड ज्यादा होने से हड्डियों और दांतों में खराबी होगी। इसके दूसरे इफ़ेक्ट हार्ट, तंत्रिका तंत्र, पेट, और किडनी संबंधित बीमारी की संभावना बढ़ जाती है। 

आइये अब जानते हैं आपके पीने के पानी में मिनरल्स की सही मात्रा क्या हो –

टीडीएस  –          ८० – १५०

मैग्नीशियम –     २५

कैल्शियम  –       ५०

 आयरन  –         १.०  

पीएच वैल्यू –      ७. ५

फ्लोराइड –        ०. ५

क्लोराइड –        ५०

 सल्फेट –          २५         

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