सिक्किम … अपनी शीतलता, व सौंदर्यता के लिए मशहूर….


दूसरी सीरीज …

४.  नाथुला दर्रा : यह १४,२०० फ़ीट की ऊंचाई पर भारत- चीन सीमा  पर  स्थित है। यह सिक्किम को तिब्बत स्वशासी क्षेत्र से जोड़ता है। यहां का सफर अपने

आप में आनंद देने वाला अनुभव  है। धुंध से ढकी पहाड़ियां, टेड़े- मेढे घुमावदार रास्ते और पहाड़ों से झरते झरने आँखों को सुकून देते हैं। ये अपने आप में अदभुत है। लेकिन इस जगह पर जाने के लिए परमिट लेना जरूरी है।

‘ बाबा हरभजन मंदिर ‘

बाबा मंदिर, एक सैनिक देता है पहरा  बहुत सुना था कि सिक्किम में एक सैनिक का मंदिर है जो आज भी सरहदों पर पहरा देते हैं। बाबा मंदिर से मशहूर यह मंदिर छांगू लेक के भी ऊपर है। यह भारतीय सेना के जवान हरभजन सिंह का मंदिर है।

लोग कहते हैं कि बाबा हरभजन सिंह आज भी अपनी ड्यूटी करते हैं। इतना ही नहीं आज भी चीन के साथ जब बैठक होती है तो उनकी कुर्सी खाली रखी जाती है, उनके सामने खाने-पीने का सामान परोसा जाता है और यह माना जाता है कि वे वहां बैठे हैं।

भारतीय सेना :

सिक्किम में कभी भी, कितनी भी ऊंचाई पर आप जाएं आपको आपके साथ-साथ कोई मिलेगा तो वह है भारतीय सेना। सेना के जवान इतने कठिन मौसम में हमारी सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। सुदूर चौकी पर बैठे अपने साथियों को बेस कैंप से सुविधाएं मुहैया करा रहे हैं। 15000 फीट की ऊंचाई पर थांगू में सेना के कैंप के बाहर हमारे लिए एक स्लोगन लिखा है कि ‘जब आप वापस जाएं तो सबको बताएं कि उनके कल के लिए हम अपना आज कुर्बान कर रहे हैं।’ वास्तव में उस स्लोगन का एक-एक शब्द सही है। जहां कोई बस्ती नहीं वहां सेना बसती है। उनके टैंक बर्फ से लदे हैं। घोड़े भी खड़े हैं जो वहां सामान ले जाएंगे जहां

गाड़ी नहीं जा सकती। गुरुडोंगमर पर हम सांस नहीं ले पाए लेकिन उसके ऊपर चीन की सीमा पर सेना के जवान तैनात है औरसरहदों की सुरक्षा कर रहे हैं तभी तो हम निश्चिंत होकर यहां सांस ले रहे हैं।

‘ डो द्रूल कार्टन ‘

५.  डो द्रुल कॉर्टन : सन १९४५ में तिब्बती बौद्ध कनिंगमा आर्डर के प्रमुख ने इसे बनाया था। यह सिक्किम के सबसे खूबसूरत स्तूपों में से एक है। यहां पर बौद्ध धर्म के १०८ प्रार्थना चके लगे हैं। इसमें कई मॉडल सेट्स हैं। अवशेषों का एक सेट और कुछ धार्मिक सामग्रियाँ भी दर्शनीय है।

६.  पोलिंग : ६८००  ऊंचाई पर स्थित यह जगह तेजी से लोकप्रिय पर्यटन स्थल बनता जा रहा है। इसी जगह से दुनिया की तीसरी सबसे ऊँची माउंट कंचनजंघा का सबसे करीब से देखा जा सकता है। पोलिंग बेहद खूबसूरत है। यहां घूमने लायक जगह है सांगा चोहिलिंग मोनास्ट्री, पेमायंगस्ते और खेचियोपालरी लेक।

७.  रुमटेक मोनास्ट्री :यहां  खूबसूरत फूल सीजन में ही खिलते हैं, और आसमान सुंदर, साफ और नीला देखने को मिलता है। वह शहर जहां बसती है संस्कृति।  यह भव्य मठ सिक्किम के जाने माने पर्यटन स्थल में से एक है। इसी जगह पर

तिब्बतियों के धर्म गुरु  १६ वे ग्यालवा कर्मापा का घर है। यहां मठ में अनोखी कलाकारी दिखती है। गोल्डन स्तूप इस मठ का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

८.  सिक्किम रिसर्च इंस्टिट्यूट ऑफ़ तिब्ब्तिलोजी : यह राष्ट्रीय  स्तर पर तिब्बती अध्ययन पर अनुसंधान केंद्र के तोर पर जाना जाता है। यह संस्थान दुर्लभ पांडुलिपियों, बौद्ध धर्म से जुडी पुस्तकों और संकेतों के ब्यापक संग्रह के तौर पर प्रशिद्ध है। यह भवन तिब्बती वास्तु कला का एक बेहतरीन उदाहरण है। जो ओक और सनौबर के छोटे- छोटे जंगल से घिरा हुआ है। इस संस्थान में कला से जुडी धार्मिक कलाकृतियां और रेशम की एम्ब्रॉयडरी की अद्भुत पेंटिंग्स भी लगी हैं। 

‘ नाथुला ‘

 सिक्किम का आखिरी गांव लाचुंग  यमथांग घाटी का प्रवेश द्वार है लाचुंग।

लाचुंग  सिक्किम का छोटा सा कस्बा है. लेकिन यहां रूक कर पर्यटक नॉर्थ सिक्किम की यमथांग  घाटी और जीरो प्वाइंट जाते हैं।  इन कस्बों में रूकने के लिए सामान्य से होटल मिलते हैं जिनमें सुविधाओं के नाम पर रहने, सोने और खाने का इंतजाम होता है।  पहाड़ों का 115 किमी का सफर।

खूबसूरत घाटी, फूल और बहती नदी यमथांग घाटी लाल और गुलाबी रोडोडेंड्रोंस फूलों के लिए मशहूर है।  साफ पहाड़ी नदी लाचुंग चू की कलकल, यहां पर्यटक

बड़ी चट्टान पर लेट  कर धूप की सिंकाई और चारों तरफ बर्फ के पहाड़ों को निहारते हुए मिल जायेंगे।  जैसे कि हर लम्हा सहेजने का समय हो।  लेकिन  ऑक्सीजन की कमी हे, जिस वजह से यहॉं हर शख्स नहीं पहुंच पता।  इससे 20 किमी

आगे चीन की सीमा के पास जीरो प्वाइंट है।

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