संस्कार


कहते हैं कोई भी दरख्त तभी तक फलता-फूलता है जब तक वो  जमीन से जुड़ा हो, वहीं से अपनी खुराक और पहचान  मिलती है, लेकिन वो यदि अपनी जमीन को ही  भूल जाए, तो उसका विनाश निश्चित है। समय के साथ बदलाव जरूरी है।  लेकिन वो तभी  तक फलदायी होंगे जब तक जमीन से जुड़े होंगे।  आज की युवा पीढ़ी जिस तरह से आधुनिकता की पीछे दौड़ रही है, वो साथ ही अपने

संस्कार भी भूलती जा रही है।  याद रहे हम जैसा बीज बोयेंगे, वैसा ही हमें फल भी मिलेगा।

शब्द

ऐसे ही हमें शब्द की महत्वता को भी  समझना जरूरी हे। एक शब्द ही हैं जिन्हे हम अपनी भावना को ब्यक्त करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। याद रहे,  शब्दों का चयन ही हमें सामने वाले के ऊपर हमारे  ब्यक्तित्व की छाप छोड़ता है। किसी ने सही कहा है …

शब्द से ख़ुशी

शब्द से गम

शब्द से पीड़ा

शब्द ही मरहम।

धन्यवाद






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