नेताओं की फिसलती जुबान …


नेताओं की फिसलती जुबान …

आज सुबह पंडित जी के पास जाकर मिलने  को दिल किया, कुछ चुनावों की हलचल के बारे में सुनते हैं, आज क्या हैं उनके विचार, ये जानने की कोशिश में मैं सुबह- सुबह उनके घर पहुंच गया, कहीं निकल ना जाएँ।  जैसे ही बेल बजाई,  उनका बेटा  गेट पर आया।  मैंने पंडित जी के बारे  में पूछा तो कहने लगा, अंदर आ जाइए पंडित जी पेपर पढ़ रहे हैं, थैंक्स गॉड, मेरे मुंह से अनायास निकल पड़ा। कुछ कहा आपने लड़के ने पलटकर मुझसे पूछा। मैंने संभलकर

कहा  नहीं ऐसी कोई बात नहीं। पंडित जी पेपर में ऐसे खोये थे जैसे उसमें कोई वस्तु ढूंढ रहे हों। प्रणाम,  पंडित जी उनके घुटने को हाथ लगाते  हुए मैंने कहा।  पंडित जी ने हमेशा की तरह बिना मुझे देखे, और बच्चू क्या हालचाल  हैं, ठीक हूँ पंडित जी आपकी दुआ है।

हूँ … पंडित जी ने पेपर  टेबल पर रखा, और  मेरी और मुखातिब होते हुए बोले, क्या खबर लाये हो, खबर क्या लानी थी, सारी खबरें तो आपके ही पास होती हैं, हम तो बस  यूँ ही आपसे मिलने आ जाते हैं।

आज मन किया आपसे मिलने को, आ गए … !

मैंने पल भर के  लिए पंडित जी को देखा, और  लम्बी साँस ली, और सहज होने की कोशिश में …

अपनी बात शुरू करते हुए,  एक बात याद आई पंडित जी, सुप्रीम कोर्ट ने मोदी जी की बायोपिक मूवी को  रिलीज करने वाली याचिका ये बोलते हुए ख़ारिज कर दी कि चुनाव आयोग के फैसले को हम नहीं मोड़ेंगे, यानि कि  अब मोदी जी की  मूवी रिलीज नहीं होगी।  ऐसे में अब बीजेपी वालों के तो मंसूबों पर तो पानी फिर गया।  इसमें पानी फिरने जैसी क्या बात है, पंडित जी ने अपनी उँगलियाँ सिर के

बालों में फेरते हुए कहा। देख बच्चू एक बात ध्यान से सुन मोदी के बारे में सारे देशवासी पहले से अच्छी तरह  जानते हैं,  जिसने  एक बार मन बना लिया कि  मैंने  फलानी पार्टी को अपना वोट देना है, तो उसे कोई नहीं रोक सकता है।   हाँ वो  तो है, पंडित जी की  बात से सहमति जताते मैंने बोला। अच्छा पंडित जी पिछले दिनों प्रियंका  गाँधी ने वाराणसी से मोदी की खिलाफ चुनाव में खड़े होने को बोला था, अब  उन्होंने वहां से खुद ना  खड़े होकर अपनी पार्टी के अजय राय को मोदी के खिलाफ चुनाव में उतार दिया है। कुछ समझ नहीं  आया।   अबे बच्चू इसमें समझने वाली क्या बात है ,  तूने लगता है  वाराणसी में

मोदी का रोड शो नहीं  देखा, हाँ हाँ वो तो देखा था, उसमें बड़ी भीड़ थी, लेकिन पंडित जी  कांग्रेस वाले तो बोल रहे हैं की बीजेपी  वालो ने प्रायोजित भीड़ इकठ्ठी करी  थी। बच्चू तू ये बता फिर क्यों नहीं प्रियंका मोदी के खिलाफ मैदान   में उतरी।  मैं  समझा नहीं पंडित जी, हूँ …. देखते हुए पंडित जी बोले उसको पार्टी ने यूपी में और जगह  घूमने, प्रचार करने का जिम्मा दिया हुआ  है। लेकिन पंडित जी वाराणसी भी तो यूपी में है।  तो फिर .. ? पंडित जी मेरी और मुखातिब होकर बोले, सुन बच्चू यहाँ पर उन्हें सब पता है मोदी ने यहां क्या- क्या काम   करवाए हैं। वाराणसी में हिन्दुओं की आस्था केंद्र गंगा नदी के पानी, घाट, चौड़ी सड़कें  या बिजली की समस्या, साफ सफाई, बुनकरों इसके अलावा देश में हाल ही में हुई ताजी एयर स्ट्राइक जैसी घटना ये सभी लोग जानते  हैं, और जब हवा  मोदी  की तरफ हो, ऐसे में कांग्रेस ने रिस्क जरूर लेना था .. ?

हाँ, पंडित जी समझ गया, इसका मतलब  अजय राय को कांग्रेस वालों ने खड़ा करके  बलि का बकरा बना दिया। जबकि  पिछली बार उसकी जमानत भी जब्त हो गयी थी।  मैंने देखा पंडित जी मेरी तरफ देखकर मंद मंद मुस्कुरा रहे थे।    उनका ऐसी स्थिति में यही अंदाज होता  है, जब उन्होंने कुछ ना बोलना हो।

अच्छा पंडित जी ये बिहारी शॉटगन शत्रुघ्न सिन्हा  पटना में जिन्ना की तारीफ कर गए। अबे बच्चू अभी उन्होंने घर बदला है,,  जुबान भी तो फिसलेगी। मैं अपनी आदतवश बीच में बोलता हुआ., हाँ … याद आया उन्होंने ये बोला कि गलती से मेरी जुबान फिसल गई।  जुबान फिसलने वाली बात तो उन्होंने बाद में कही, वो भी जब बीजेपी और मीडिया वालों ने उनकी आलोचना करनी शरू कर दी, और उनकी पार्टी ने भी उनसे जवाब मांग लिया,  पंडित जी  बोले।

अच्छा  पंडित जी बीजेपी ने पंजाब में गुरदासपुर से सन्नी देओल को चुनाव में उतार दिया है, तो फिर ..?

पंडित जी ने मेरी तरफ देखते हुए तपाक से बोले, उनके तेवर को देखते हुए मैंने सहमते हुए….. कैप्टन साहबं  ने सन्नी के  बारे में बोल दिया उसका यहां कुछ नहीं बनना, वो वापस मुंबई भाग जायेगा। भाग जायेगा ..?

 पंडित जी  ने पूछा, तूने बच्चू सिद्धू का  ताजा बयान नहीं सुना, जिसमें सिद्धू ने सन्नी  के बारे में  कैप्टन के  उलट सीधा बोल  दिया  है, कि उसका असर और  भी सीटों  पड़ेगा। लेकिन पंडित जी कहीं बाद में सिद्धू भी ना बोल दे, मेरी गलती से जुबान फिसल गयी थी। अबे बच्चू एक बात सुन ये चुनावी समर हे अब ऐसे में नेताओं की जुबान तो फिसलेगी ही, हमारी थोड़े ही फिसलेगी। बाकी कई बार मुँह से सही बात  निकल ही  जाती है।

अच्छा पंडित जी आज की ही खबर है सज्जन कुमार जिन्होंने अकाली सरकार के खिलाफ नशे को लेकर एक गीत लिखा था, और उनका गीत मुंबई के प्रसिद्ध गायक आलमगीर खान ने गाया था, आज उसी अकाली पार्टी में शामिल हो गए हैं।

तो इसमें कौन सी बड़ी बात है बच्चू,ये भी तो  हो सकता है वो गीत उन्होंने शायद नशे की हालत में लिख दिया हो। और रही बात उनके अकाली पार्टी में जाने की, देख बच्चू .. चुनावी समर में इधर – उधर पलटियां तो लगती रहती हैं, वक्त के साथ जमीर भी बदल जाते हैं। सोचने लगा, हैं तो पंडित जी घाघ ही, अपनी हाजिरजवाबी से सामने वाले की एक बार तो बोलती बंद करवा ही देते हैं।

इतने में पंडित जी के मोबाइल की रिंग बजी, हाँ, हाँ आ जाओ, मैंने भी समय को भांपते हुए पंडित जी विदा लेने में भलाई समझी, और फिर से मिलने के वादे के साथ विदाई ली।

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