ज्योतिष चर्चा , प्रारंभिक ज्ञान


ज्योतिष चर्चा , ( वर्माचार्य ) पंचांग (ज्योतिष ज्ञान) 

हैलो  भाइयों व् बहनों, कैसे हैं आप …

आपने  अक्सर पंचांग के बारे में सुना होगा, आज में आपको ज्योतिष से संबंधित ‘ पंचांग ‘ के बारे में मुख्य बातें बताता हूँ, पंचांग जैसा कि नाम से ही उदृत है।   पंचांग यानि पांच विषय :  तिथि, वार, नक्षत्र, योग एवं करण। इन पांचों के आपस में एकत्र होने से शुभाशुभ फल प्राप्त होते हैं समय के शुभाशुभ जानकारी के द्वारा महूर्त  निकला जाता है। और महूर्त दो प्रकार के होते हैं।

१.. सामान्य महूर्त।

२… विशिष्ट मुहूर्त।

१.. सामान्य महूर्त :- इस महूर्त में चौघड़िया, अभिजीत आदि का विचार किया जाता है।

२.. विशिष्ट महूर्त :- इस महूर्त में जातक की राशिनुसार, नक्षत्रानुसार, तिथि, वार आदि का विचार किया जाता है। इसके द्वारा महूर्त में वाहन की खरीदारी, नौकरी का चार्ज लेना व देना और नवीन वस्त्रों की खरीदारी आदि।

तिथि — चन्द्रमा की एक कला को तिथि कहते हैं। जो कि सूर्य व चन्द्रमा के अंतर  से बनती है।  जब भचक्र (Zodiac) में सूर्य और चन्द्रमा की आपसी कोणीय दुरी o डिग्री  ( जीरो ) अंश पर होती है, तो प्रथम तिथि का आरम्भ होता है। और जब सूर्य, चन्द्रमा के परिभ्र्रमण के अंतराल आपस में १२ डिग्री (अंश) के कोणीय अंतर् में आते हैं तो प्रथम तिथि का अंत होता है, और दितीय तिथि का आरम्भ होता है। इस प्रकार o -१२ अंश तक प्रथम तिथि, १२-२४ अंश तक दितीय तिथि, २४-३६ अंश तक तृतीय तिथि, इसी प्रकार जब १०८ से १८० अंश

तक अंतर् होता है तो पूर्णिमा यानि पूर्णमासी होती है। इसी प्रकार पूर्णिमा के बाद १८० -१९२ अंश तक फिर प्रथम तिथि और क्रमशः जब ३४८ से ३६० अंश के अंतराल तक अमावस्या होती है। इस प्रकार एक माह में ३० तिथियां होती हैं। इस प्रकार तिथियों की गणना शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानि प्रथम तिथि से आरम्भ

होती है।  अमावस्या के बाद की प्रतिपदा से लेकर पूर्णिमा तक की तिथियां शुक्ल पक्ष की तथा  पूर्णिमा के बाद की प्रतिपदा से आरम्भ करके अमावस्या तक की तिथियां कृष्ण पक्ष की होती हैं।

इस प्रकार एक  माह में दो पक्ष होते हैं, शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष।

बाकी फिर बाद में….  

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