कविता


एक अकेला पार्थ खड़ा है

भारतवर्ष बचाने  को

सभी विपक्षी साथ खड़े हैं

केवल उसे हराने को

भ्रष्ट दुःशासन सरूपनखा ने

मायाजाल बिछाया है

भृष्टाचारी जितने कुनबे

सबने हाथ मिलाया है

समय भयंकर होने वाला

आज दिखाई  देता है

राष्ट्र धर्म का क्रंदन

चहुँ  और दिखाई देता है

फेंक रहे हैं सारे  पांसे

जनता को भरमाने को

चीन और नापाक चाहते

भारत में अंधकार बढ़े

हो कमजोर भारत की सत्ता

अपना फिर अधिकार बढ़े

आतंकवादी संगठनों का

दुर्योधन को साथ मिला

सारे  जयचंद साथ में बैठे

केवल उसे मिटाने  को

भोर का सूरज निकल चुका  है

अंधकार घबराया है

कान्हा ने अपनी लीला में

सबको आज फंसाया है

कौरव की सेना हारेगी

जनता साथ निभाएगी

अर्जुन की सेना बनकर के

नैया पार  लगाएगी

ये महाभारत फिर होगा

हाहाकार मचाने को

सभी विपक्षी साथ खड़े हैं

सिर्फ, मोदी को हराने को। 

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