शख्सियत …. ‘ जे मंजुला,’ महिला वैज्ञानिक


जे मंजुला डीआरडीओ में  देश की पहली महिला डायरेक्टर जनरल।

वह डीआरडीओ क्लस्टर की पहली महिला महानिदेशक हैं।उनके कई कार्य पहले से ही भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों के विभिन्न हथियारों में शामिल हैं।

आज देश की तीनों सेनाएं इनके बनाये जैमर और कंट्रोलर सॉफ्टवेयर को सफलतापूर्वक उपयोग कर रही है। जे मंजुला को इस उपलब्धि के लिए २०११ में  डीआरडीओ में साइंटिस्ट  द ईयर सम्मान से नवाजा गया। इनका  जन्म १९६२ में  नेल्लोर जिला आंध्र प्रदेश की प्रमुख रेड्डी जाति में हुआ। तथा

उस दौर में लड़कियों की शिक्षा पर ज्यादा तवज्जो नहीं देते थे। इनके पिता एक हाई स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर थे।, और वह  पढ़ाई की अहमियत को भली – भांति समझते थे। उन्होंने जे मंजुला की  पढ़ने  में रूचि होने के कारण उन्हें प्रेरित किया। जे  मंजुला की रूचि गणित पड़ने में शरू से ही थी। उन्होने गणित की पढ़ाई अपनी कोशिशों के दम  पर करी,  क्योंकि उनके माता – पिता उनको गणित नहीं पढ़ा सकते थे।

जे मंजुला ने इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार स्ट्रीम के साथ उस्मानिया विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की डिग्री ली।

सन १९८७ में डीआरडीओ में उन्हें पहली महिला महानिदेशक बनाया गया। लेकिन इससे पहले वे इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन वॉरफेअर के लिए भी काम कियका, जिसमें करीब 26 साल तक वे डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च लैब,

हैदराबाद में ही काम  करती रही। जैमर के अलावा इनके द्वारा तैयार किये कई अन्य उपकरण देश की तीनो सेनाएं थलसेना, नौसेना व वायुसेना आदि में सफलता से उपयोग में आ रहे हैं। डीआरडीओ की महानिदेशक बनने

से पहले वे डिफेंस एविओनिक्स रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट डीएआरई  में अपनी सेवाएं दे रही थी। 

आज  देश  को  जे मंजुला   के ऊपर गर्व  है।

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