धोखा न खा जाएँ अपने ड्रीम होम की कीमत को लेकर। ..


यूँ तो अपना खुद का घर खरीदने का  सपना लगभग सभी का होता है, और यदि सही उम्र में अपना घर खरीद लिया जाये, तो ये एक तरह से मन को सकुन देने वाली बात हो जाती है। सारे जीवन की जमापूंजी लग जाती है। कोई अपना प्लाट लेकर खुद अपने हिसाब से आर्किटेक्ट से अपनी पसंद का नक़्शा बनवाकर

और पास कराकर, अपनी गाइडेंस में अपने मैटेरियल  से बनवाना पसंद करते हैं, लेकिन कई बार समय की कमी होने की वजह से बिल्डर द्वारा बनवाया फ्लैट, या इंडिपेंडंट मकान खरीदते हैं। ज्यादातर लोग घर का सपना बैंक से लोन लेकर पूरा करते हैं।

1. जब कोई शख्स पहली बार घर देखने बिल्डर के पास पहुंचता है, तो

बिल्डर ग्राहक को घर के नक्शे के साथ ही दूसरा  पेपर और पकड़ा देता है, जिसमें उस प्रॉपर्टी की डिटेल्स होती है। इसमें सोसाइटी की पार्किंग, मेंटनेंस, रजिस्ट्री चार्जेज, टैक्स, क्लब हाउस और पूल आदि के खर्चे शामिल होते हैं। इसके अतिरिक्त कई बार मनमर्जी के खर्चे भी ग्राहक से वसूल लिए जाते हैं। ऐसे में ग्राहक को सतर्कता बरतनी बहुत जरूरी है।

जिस जमीन पर घर या सोसाइटी बनी है,  उसके असली मालिक की जानकारी जुटाएं, और उससे उस जमीन

2.  इसके लिए ग्राहक को चहिये कि…

की पूरी तसल्ली कर लें। यानि कि जो भी बिल्डर उक्त प्रॉपटी को बेच रहा है, उसके पास उस प्रॉपर्टी को बेचने,

स्थानांतरण करने का  मालिकाना हक हे ? उस हल्के के पटवारी से उस जमीन की वेरिफिकेशन जरूर कराएं, कहीं उस जमीन का कोर्ट में केस या बैंक में बकाया लोन या कुछ भी जो शायद आपको न पता हो आदि की पूरी जानकारी मिल जाएगी। अपने साथ किसी सीनियर वकील को ले जाकर उसकी टाइटल वेरिफिकेशन कराएं।

3.  बिल्डर से जानकारी लिखित में लें …

जब भी आप उस प्रॉपर्टी से संबंधित डील करते हैं, तो जो आपके और बिल्डर के बीच  एग्रीमेंट लिखा जाये, उसे ध्यान पूर्वक पड़ें कि उसमें बिल्डर ने कौन  सी शर्तें व् नियम शामिल की हैं। ग्राहक यानि खरीदार को क्या

इसकी डेट आप लिखित में लें। राइट दिए गए हैं। प्रॉपर्टी का कॉर्पेट एरिया कितना है  इसके अलावा बिल्डर आपको उक्त प्रॉपर्टी कब तक सौंपेगा,जब भी ग्राहक बिल्डर के पास फ्लैट देखने के लिए जाता है  तो बिल्डर उसको सैंपल फ्लैट दिखाता है। ताकि ग्राहक समझ सके की प्रोजेक्ट कम्पलीट होने पर उसका फ्लैट कैसा होगा। सैम्पल फ्लैट फुली फर्निश्ड होने से ग्राहक को तुरंत पसंद आ जाता है। लेकिन यहां ये बात समझनी बेहद जरूरी की ये सिर्फ सैम्पल  फ्लैट है । जबकि आमतौर पर तैयार किए जा रहे बिल्डर फ्लोर अथवा फ्लैट दिखाए गए फ्लैट से काफी अलग होते हैं। इसीलिए ग्राहक को चहिये की वो सैम्पल न देखकर डील करे अपितु वास्तविक रूप से ग्राहकों के लिए तैयार हो चुके या बन रहे फ्लैट ही देखें, इसमें ग्राहक धोखा खाने से भी बच जायेगा। इसके अलावा आपके घर, फ्लैट में इंटिरियर यानि इसकी डेकोरेशन के लिए दीवारों पर प्रिंट डिज़ाइन, सीलिंग, मॉड्यूलर किचन जिसमें ब्रांडेड चिमनी आदि, डैकोरेटिव लाइट्स, बल्ब जैसी आकर्षित

जरूरी चीजों के बारे में जानना जरूरी हे।  अमूमन ग्राहक इस भ्र्म में रहते हैं, जैसा सैम्पल फ्लैट बिल्डर द्वारा दिखाया

गया था  वैसा ही घर, फ्लैट तैयार कराकर दिया जायेगा। वास्तव में होता इसके उलट है। इसीलिए जब भी भविष्य में आप कोई सैम्पल  घर, फ्लैट देखें, तो बिल्डर से साफ साफ ये क्लियर कर लें कि हम जो अपने घर, फ्लैट का मूल्य चुका  रहे हैं उसमें ये डेकोरेशन वाली सभी चीजें शामिल हैं या नहीं। ताकि भविष्य में किसी भी गलतफहमी से बचे

रह सकें। ये सभी काम बिल्डर से लिखित में लेना न भूलें। याद रहे घर, फ्लैट जिन्दगी में एक ही बार ली जाती हैं।

इसके अतिरिक्त पेपर पर लिखे हर तरह के चार्ज को ध्यानपूर्वक पढ़ें, और समझ न आने पर उसकी पूरी जानकारी

लें। कहीं जो चार्ज वो आपसे वसूलने जा रहे हैं, वे जायज हैं भी या नहीं। कोई ऐसी सुविधा का चार्ज जो वास्तव में है

ही नहीं, जैसे कि उस सोसाइटी में क्लब हाउस, पूल या जो भी आपकी जानकारी में है, और आपके फ्लैट की कीमत में शामिल हो सकती हैं। इसको लेकर आप बिल्डर से बात करें, यदि आप उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हैं तो घर, फ्लैट की डील करने से पहले विचार जरूरी है।

4.  आप कोई भी घर, फ्लैट  देखने जा रहे तो आजकल बिल्डर प्रॉपर्टी की जानकारी ऑनलाइन पर उपलब्ध होती हैं। याद

रहे  ऑनलाइन और वास्तविकता में अंतर् हो सकता है।  ऑनलाइन दी गई प्रॉपर्टी की डिटेल्स और वास्वविक डिटेल्स में तुलना करें।   

5.  धैर्य बरतनी जरूरी

कभी भी एक ही प्रॉपर्टी को देखकर फैसला न लें। अपने विकल्प खुले रखें। कई ग्राहकों को कोई प्रॉपर्टी देखने के बाद एकदम पसंद आ जाती है, और वो उत्सुकतावश  जल्दबाजी में डील कर  बैठते हैं। ऐसे में कई बार देखा गया है कि ग्राहकों  को उक्त  प्रॉपर्टी के बारे में बाद में माइनस पॉइंट नजर आते हैं, ऐसे में उनके  पास पछतावे के अलावा कोई चारा नहीं होता। इसीलिए कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले सूझबूझ और धैर्य से काम लें। कोई भी फैसला लेने से पहले परिवार में बात करें, उनसे सलाह करें, और ऊपर बताई गयी  सलाहों के अनुसार वेरिफिकेशनस आदि ध्यानपूर्वक करें, तो ही कोई फैसला लें, ताकि बाद में आपको कोई पश्तावा न हो।        

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