टूटती ख़ामोशी


ख़ामोशी,   तोड़ते  होठों  ने

बेटा …थोड़ा,  पानी पीला देते

सूख रहा…. .है    गला,

अभी,  आया  बाबूजी……,

लैपटॉप   पर  घुमाते  ऊँगली

मोबाइल कान  पर सुनते बोला ..

बीतते समय कुछ बाद, फिर से

बेटा …सुन  रहे  हो… ?

पकड़ा  देते  मेरी  स्टिक .. ही,  बेटा

सोचते,  खुद  ही….. पी  लूँगा,

लड़खड़ाते  किसी तरह  किचन ….में 

ओह.. ! निपटा,  थोड़ा ही  काम  तो

  रह  गया अभी,  जो

निपटाते  ही आया  जल्दी ….

देर   में निपटा काम बाद

ऊँगली लैपटॉप … पर से थाम

आया….बाबूजी,   पास जैसे ,  ही

क्या  चहिये, अब  बताओ 

हाथ ठंडा, बाबू जी,  का पकड़ा

खुला मुंह .. सूखा जो पानी को

था,  बंद  गला, सूखा, प्यासा …

हो,  गया .. खामोश  वो

दर्द, जो  कराहता  हुआ

पल, था … जो निकल  गया ….

पिलाने को  … पानी 

रह  गया, लैपटॉप,  मोबाइल

ऊँगली वहीं घूमने, फिर से ।   

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