ऑर्गेनिक खेती, वो भी लीक से हटकर…


ऑर्गेनिक खेती,  वो भी लीक से हटकर एक और देश में खेती को लेकर जहां किसानों  का लगाव कम होता जा रहा है, किसान आत्महत्या जैसे

आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो रहें हैं, और न जाने ऐसे ही कई किसान मौत के मुंह में जा चुके हैं, चाहे इन घटनाओं के पीछे  जमीन पर पानी की कमी, मौसम की मार, या उनकी फसल का लागत के हिसाब से उचित कीमत न मिलना।  जिस कारण से किसान की हालत बद  से बदतर होती जा रही है।

और इसे ठीक विपरीत एक ऐसी शख्सियत अपनी सोच, मेहनत के दम  पर उभर कर खेती के काम में आशा की किरण बनकर सामने आई  है, जिसने पुनः इस तरफ सोचने को मजबूर कर दिया, वो भी अपनी खुद की जमीन न होने के बावजूद।

जी हाँ हम बात कर रहें हैं गीतांजलि राजामणि  की, १४ जून १९८१ में हैदराबाद में जन्मी गीतांजलि राजमणि

के पिता का एक सड़क दुर्घटना  में देहांत हो गया था । माँ  ने इनकी और बड़े भाई की परवरिश की। गीतांजलि  

राजामणि ने २००१ में उस्मानिया कॉलेज फॉर वुमेन से बी एस सी उपरांत सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ पांडिचेरी से

एम् बी ए की। १२ साल इन्होने क्लिनिकल  रिसर्च कंपनियों में काम किया। अपना काम करने की  सोच में 

२०१४ में इन्होने टी सी एस कंपनी से जॉब छोड़ छोड़ दी।  इसके बाद इन्होने अपना काम करने का निर्णय लिया।

प्लांटिंग गार्डनिंग का बचपन का शौक था……

फार्मीजन  का आईडिया –

गीतांजलि के कहे अनुसार हम बाजार में उपलब्ध जो भी सब्जी खरीदते  हैं, उनमें कीटनाशक होने से हमारे शरीर केलिए  घातक होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए दो साल पहले फार्मीजन शरू करने  का आईडिया आया। इन्होने

घर के पास ही  मौजूद एक किसान से जमीन किराये पर ली, और इसमें इस कार्य में इन्होने  दो दोस्तों शमिकचक्रवर्ती व् सुधाकरन बालसुब्रयम को साथ मिलाया।

मेरे  इस कार्य में कुछ और लोग भी मेरे साथ जुड़े। इसके बाद मैंने पाया कि एक परिवार की जरूरत योग्य सब्जियों की

पूर्ति ६०० वर्ग फुट में हो सकती है। शमिक  और सुधाकरन आई टी से हैं, सो उनकी मदद से हमने एक एप बनाया।

किसानों और ग्राहकों को मनाना चुनौती था, इसके बाद एक अनुभवी किसान नारायण रेड्डी मिले, जिनका खेत उर्वरक

कीटनाशकों के प्रयोग से खराब हो रहा था। वे हमारे इस काम में शामिल हो गए। मैंने ग्राहकों को समझाया कि आप बाजार से जो गोभी लेते हैं वो ब्लीच से सफेद की  होती है। यह आपके स्वाथ्य के लिए नहीं है, आप जैविक सब्जियां

खाएं, जिनमें कीट लगे हों। यदि जैविक गोभी इन कीटों के लिए सेफ हैं, तो ये आपके लिए भी सेफ हैं, और आप इसेखा सकते हैं। इसके बाद वे धीरे धीरे राजी होने लगे। 

इसके बाद जून २०१७ में अपनी कंपनी का घटन किया,और अपना पहला खेत लांच कर  दिया।

फार्मीजन किसानों से उन्ही की जमीन पर ६००, ६०० वर्ग फुट के आकर  में उनके  साथ बराबरी की साझेदारी में अपने

 मार्ग दर्शन में सब्जियां की खेती करवाती है, तथा उनको जैविक खेती की तकनीकी  सलाह के साथ

रोपे बीज भी उपलब्ध करता है। ६०० वर्ग फुट से मिलने वाला २५०० रुपये मासिक किराया फार्मीजन और किसान आधा आधा बांटते  हैं।तथा मोबाइल एप के जरिये ग्राहकों की पसंद की सब्जियां करवा कर फ़ार्मीजन के वाहन से उनके घर तक पहुंचा देती है। 

जिहोने खेती में अलग ही गैर पारंपरिक या यूँ कहें लीक से –

हटकर एक अलग ही तरीका आजमाया है, और तो और इन्होने इस खेती में अन्य किसानों को अपने साथ इस काम में मिलाकर साथ ही उनकी भी आमदनी में अच्छा खासा मुनाफा दिलाने के साथ ही एक स्वस्थ ऑर्गेनिक सब्जियों को उगाने की तकनीक समझायी। इससे ये किसान और किसानों के लिए आगे आने वाले समय में मददगार साबित होंगे।

गीतांजलि ने २०१४ में टी सी एस की जॉब छोड़कर अपना काम करने का फैसला किया।  २०१७ में दो दोस्तों के साथ

मिलकर स्टार्टअप कंपनी फरमीजन शुरू की। और दो साल में ही इनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर ८.४० करोड़ पहुंच गया।        

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