डायबिटीज, जानलेवा रोग हो सकता है यदि …..


डायबिटीज, जानलेवा रोग हो सकता है यदि …..
डायबिटीज के रोग के पीछे मुख्य कारण हमारे शरीर में पेंक्रियाज ग्रंथि के कार्य करने में बिगाड़ आने
से होता है। इन्सुलिन हमारे शरीर के लिए बहुत उपयोगी होता है, जिसे शरीर में शर्करा के लेवल को नियत्रण

में रखता है। आज के समय में डायबिटीज होना एक आम सी बात हो गई है। पेन्क्रियाज ग्रंथि में विभिन्न
प्रकार के हार्मोन्स निकलते हे, इन्हीं में से एक है इन्सुलिन और ग्लूकॉन। इन्सुलिन हमारे शरीर के बहुत
उपयोगी है, इसी जरिये हमारे शरीर में रक्त, हमारी कोशिकाओं को शर्करा मिलती है। या यूँ भी कह सकते हैं,
इन्सुलिन हमारे शरीर को सभी भागों में शर्करा या शुगर पंहुँचाती है। अतः इन्सुलिन के कम निमार्ण से या
बिलकुल ही न बनने से रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है ।
डायबिटीज जानलेवा रोग साबित हो सकता है, क्योंकि यह सपने साथ कई और रोगों को भी निमंत्रण दे सकता है।
जिसमें से एक है डायबिटिक पेरिफैरल न्यूरोपैथी –
डायबिटिक पेरिफैरल न्यूरोपैथिक नसों से संबंधित रोग है। यह डायबिटीज के मरीजों में सामान्य रूप से
पाया से जाता है। रक्त में शर्करा की मात्रा अधिक होने की वजह से नसों को नुकसान होने लगता है।
सामान्यतया इसका प्रभाव पैरों और पंजों पर अधिक पड़ता है, इसके अलावा यह पुरे शरीर की नसों को नुकसान पहुंचा सकता है। रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रण, और एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर
इससे बचा जा सकता है।
कहीं ये लक्षण तो नहीं —
डायबटीज के लक्षण इसके प्रकार और क्षतिग्रस्त नस पर निर्भर करतें हैं। पाचन तंत्र में बिगाड़, मूत्र त्याग करने में परेशानी होने, पैर या पंजों का सुन्न हो जाना, पैरों में कोई गंभीर समस्या, संक्रमण। रक्त-वाहिकाओं
और दिल में किसी प्रकार की परेशानी होना, दर्द महसूस करने की क्षमता कम हो जाना, झुनझुनी या जलन
होना, हड्डी व् जोड़ों का दर्द होना, ऐंठन, वजन कम होना इसके अलावा कई रोगियों में स्पर्श की संवेदना भी बढ़ी देखी गई है।
न्यूरोपैथिक के प्रकार –
यह मुख्य रूप से चार प्रकार की होती है। रोगी को एक समय में एक या एक से अधिक प्रकार की डायबिटिक
न्यूरोपैथिक हो सकती है।
१ .. पेरिफैरल न्यूरोपैथिक – सामान्य तौर पर यह यह सबसे ज्यादा पाया जाता है। इसका असर पंजों और
पैरों पर पहले पड़ता है, और इसके बाद हाथ और कंधों पर पड़ता है।
२… प्रॉक्सीमल न्यूरोपैथिक – इसे डायबिटिक एम्योट्रॉफी भी कहते हैं। जिसमे ‘ म्यो ‘ शब्द का अर्थ है मांसपेशी।
इसमें मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं। नितम्ब और पैरों की ऊपरी मांसपेशियों पर असर पड़ता है।
३…. ऑटोमैटिक न्यूरोपैथिक – शरीर में कई कार्य ऐसे होते हैं, जिसके बारे में सोचने की जरूरत ही नहीं होती।
जैसेकि दिल का धड़कना, सांस लेने की प्रक्रिया या भोजन का पचना। यह साडी प्रक्रिया स्वचालित तंत्रिका-तंत्र
से क्रियान्वित होते हैं। इस तंत्र की न्यूरोपैथिक अधिक खतरनाक होती है, क्यों इसका शरीर के अधिकतर भागों
पर असर पड़ता है।
४…. . फोकल न्यूरोपैथिक – उपरोक्त सभी प्रकार डायबिटिक न्यूरोपैथिक पॉलीन्यूरोपैथी के प्रकार हैं। इसमें ‘ पोली ‘
शब्द का अर्थ कि एक से अधिक नसों को प्रभावित करता है। वहीं फोकल न्यूरोपैथी किसी विशिष्ट तंत्रिका को प्रभावित
करता है। इसे मोनोन्यूरोपैथी भी कहा जाता है। और यह अचानक होती है, और इसका असर दिमाग की आँखों को जाने
वाली नस पर पड़ता है, इसके अलावा यह धड़ और पैरों की नसों को भी प्रभावित कर सकती है।
कारण और निवारण –
डायबिटीज होने के वैसे कई कारण हैं, इसका एक कारण अनुवांशिक भी है। घर में किसी सदस्य माता, पिता, भाई बहन
में किसी को होने से इसकी आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा जंकफ़ूड खाना, मोटापा, फिजिकल वर्क में कमी, घूम्रपान,
बहुत अधिक मीठा खाना, खाने के तुरंत बाद लेट जाना, पानी कम पीना या बाहर खाना नियमिततौर पर खाना।
डायबटीज के रोगियों को चहिये की वे सुबह शाम आधा घंटा सैर करें।
घर में मेथीदाना तवे पर भूनकर और ठंडा होने पर दरदरा ग्राइंड करके जार में रख लें। और सुबह निराहार ५ ग्राम टी स्पून
में लेकर लेकर गुगुने पानी से लें, इसके बाद सैर पर चले जाएँ।
मीठा न लें। और नियमित शुगर लेवल की जाँच करते रहें।
करेले का रस, नीम की पत्तियों का रस सुबह निराहार लें।
जामुन काला नमक लगाकर खाएं, इससे सुगर कंट्रोल में आती है।
सुबह नाश्ते से पहले ग्रीन टी लें। रेशेयुक्त शब्जी लौकी, तौरी, पपीता, मोटा बिना छना चोकरयुक्त आटे की रोटी खाएं।
सुबह निराहार अलसी का चूर्ण गुनगुने पानी से लें।

खीरा, टमाटर और करेले का मिक्स जूस लें।
इनमे सभी चीज़ें रसोई से जुडी हैं। इनमे कोई भी अपनी सुविधानुसार ले सकते हैं। खीरा, टमाटर और करेले का मिक्स जूस लें ।

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