कहीं आप स्मोकिंग की लत से परेशान तो नहीँ …….? या छोड़ना चाहते हैं


क्या और कौन से उपाय कारगर होंगे, जानते हैं-

अनुमान के आधार पर  भारत में ४९ % पुरुष, और २२ % महिलाएं तम्बाकू का प्रयोग करते हें….

कई कारणों से लोग स्मोकिंग या तम्बाकू का सेवन करना शरू कर देते हैं, टीनेज वाले तो अक्सर पहले सोसाइटी में एक दूसरे को देख कर, या शौक शौक में शरू करते हैं, कई लोग गुस्से में  या तनाव कम करने में। परन्तु आप आईडिया नहीं लगा सकते कि आप जिस सहजता से तम्बाकू का सेवन कर  रहे हैं, उसका परिणाम कहीं खतरनाकहोगा। तम्बाकू, आप बीड़ी, सिगरेट, गुटखा  या खैनी, जिस भी रूप में इसे लिए जाये, इसके गंभीर दुस्चपरिणाम निश्चित है। तम्बाकू का  नशा  कोई एक समस्या न होकर कई समस्याओं की जड़ भी है। यह  मानसिक और शारीरिक रूप से नुकसान करता ही है, साथ ही मौत को भी जल्दी  बुलाता है।

तम्बाकू का शरीर पर दुष्प्रभाव :

तम्बाकू का सेवन करने वाले के तंत्रिकाओं और मानसिक चेतना पर बुरा प्रभाव पड़ता है। मुख्यता इसमें पाए जाना

वाला निकोटिन मूड में फेरबदल करने वाला तत्व है।  यही नहीं निकोटिन दिमाग में कुछ ही सेकंड में पहुंचकर थोड़ी

ही देर में अधिक सक्रिय महसूस करने लगता है, इससे और अधिक निकोटिन लेना शुरू कर देते  हैं। इसी से निकोटिन

की आदत पद जाती है। इसके बिना वो असहय महसूस करने लगता है, जिस कारण इसका सेवन करने वाले लोगों

को तम्बाकू छोड़ने के तरीके कठिन लगते हैं। यह स्थिति डिपेंडेंसी कहलाती है।  निकोटिन की आदत सोचने समझने

की शक्ति को या यूँ कहें संज्ञानात्मक चेतना को कम करती है। सायक्लोजिकल डिपेंडेंसी में चिंतित, बेचैन, उदास,

और असहज महसूस करते हैं। हाँ यदि ऐसा है तो एडिक्शन के शिकार हो चुके हैं।

श्वसन संबंधी समस्याएं :

जब धुंए में साँस लेने पर फेफड़ों को नुकसान वाले पदार्थ शरीर में पहुंचने लगते हैं, तो यह विभिन्न तरह की समस्याओं

और संक्रमणों जैसे क्रोमिक ब्रांकाइटिस फेफड़ों की सूजन, फेफड़े में क्रोनिक  ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और फेफड़ों

का कैंसर आदि भयंकर रोग पैदा करते हैं। तम्बाकू उत्पादित पदार्थों से निकलने वाला धुआं फेफड़ों में नुकसान पहुंचाकर

साँस की परेशानी का कारण बनता है।  इसके अतिरिक्त जिन बच्चों के पैरेंट्स स्मोकिंग करते हैं उनमे खाँसने, घरघराहट,

अस्थमा, निमोनिया और ब्रोन्काइटिस की आशंका अधिक रहती है।

दिल के रोगों को निमंत्रण :

धूम्रपान पुरे ह्रदय प्रणाली को नुकसान पहुंचता है। तम्बाकू शरीर में रक्त वाहिकाओं के सिकुड़ने और चोक होने का कारण बनता है। इससे रक्त का प्रवाह बाधित होता है। रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने के साथ निकोटिन आर्टरी धमनी के

रोग का कारण बनता है। धूम्रपान से रक्त वाहिका की दीवारें सिक़ुड़तीं हैं, और रक्तचाप और व्रक्त के थकान को भी बढ़ाता हे,

जिससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति दिल की बाईपास सर्जरी, दिल का दौरा या पैरालिसिस को आमंत्रण  देता

है। धूम्रपान का एक्सपोजर भी धूम्रपान करने वाले की तरह जोखिम भरा होता है। सेकेंडरी स्मोकिंग या पेसिव स्मोकिंग

सबसे खतरनाक है।

तम्बाकू संबंधी बहम और भ्रांतियां :

तम्बाकू की लत के बारे में ऐसी बहुत सी आम धारणाएं मौजूद है जो फिर से इसका इस्तेमाल करने को उकसाती हैं।

1- मैं तम्बाकू का सेवन तो करता हूँ लेकिन साथ में पौष्टिक आहार भी लेता हूँ। इससे मुझे कैंसर नहीं होगा।

2- मैं तो कभी कभार ही इसका सेवन करता हूँ, कैंसर तो उनको होता है जो इसका रेगुलर सेवन करते हैं।

तम्बाकू छोड़ने के बाद में बीमार और सुस्त महसूस करता हूँ।

3- मेरे बाप-दादा भी तो लेते रहे हैं या ले रहे हैं, जब उनको कुछ नहीं हुआ तो मुझे भी कुछ नहीं होगा।  

रिपोर्ट चौंकाने वाली :

ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे ऑफ़ इंडिया के अनुसार घरों में सबसे ज्यादा ५३ % युवा दूसरों  द्धारा छोडे गए गए धुंए

के शिकार होते हैं। जिसे हम सेकेंडरी या पेसिव स्मोकिंग कहते हैं। शोधकर्ताओं को ये भी पता चला हे कि बच्चों की

मौजूदगी में स्मोकिंग होती है, उस बच्चों में  इंफैक्शन, अस्थमा, निमोनिया, छाती में घरघराहट, त्वचा संबंधी रोग

पाए जाते हैं। साथ ही बार- बार खांसी, गले में खराश, टोन्सिलिटिस अदि रोगों से ये बचे ग्रस्त रहते  हैं।

ये बच्चे दूसरों की तुलना में कमजोर और ज्यादा बीमार होते हैं।

उनके वजन में कमी पाई जाती है। उनका शारीरिक, मानसिक विकास भी प्रभावित होता हे।

यदि किसी गर्भवती महिला के पास स्मोकिंग की जाती है तो कोख में पल रहे बच्चे को भी कई प्रकार की समस्याएं

हो सकती हैं।

जन्म के समय बच्चे का वजन कम होना।

समय से पहले बच्चे का जन्म।

कुछ मामलों में शिशु की मृत्यु भी हो जाती हे।  

कैसे पाएं छुटकारा तम्बाकू की लत से :

यूँ तो तम्बाकू की लत से छुटकारा पाने के कई तरीके हो सकते हैं,

सबसे पहले जो लोग तम्बाकू का सेवन करते हों, उनसे दूर रहें। और अपने पास कभी तम्बाकू न रखें।

जब भी तम्बाकू की लत लगे, अपने पास छोटी इलायची, मिश्री,खजूर, बादाम के टुकड़े रखें। और इन्हें मुंह में रखें।

जब इसकी लत लगे एक गिलास ठंडा पानी पिएं। जरूरत पड़ने पर अपने नजदीक नशा मुक्ति केंद्र से सम्पर्क करें।

जहां सात से इक्कीस दिन के कोर्स की दवाएं लें। मनोवैज्ञानिक परामर्श लें। योग, ध्यान आदि की मदद से नशे से

मुक्ति पाई जा सकती है। अपने को ब्यस्त रखें।

परिवार के लिए C A G E फेमिली थेरेपी :

C : Care and Cutdown : परिवार सहित देख भाल करें, साथ  ही उन्हें प्रेरित करें जिससे तम्बाकू छोड़ने में मदद

      मिल सके।

A : Alert and Avoid annoyances : ये ध्यान रखें कि कोई तम्बाकू या उससे बना पदार्थ घर में उसकी पहुंच में

     न  पाए।

G : Great and Guard : धूम्रपान करने वाले शख्स को ये अहसास कराएं की घट में ये और लोगों के लिए घातक है।

E : Eye opening and  Alternatives : जब भी कभी स्मोकिंग की इच्छा हो सौंफ, बादाम, इलायची  दे सकते  हैं।

     रिप्लेसमेंट  थेरपी में मददगार आहार :

दूध धूम्रपान की इच्छा को कंट्रोल करता है। जो दूध पसंद नहीं करते वो लोग अन्य डेयरी प्रोडक्ट पनीर, दही ले सकते हैं।

स्नैक्स : आलू चिप्स, नमकीन, अखरोट ले सकते हैं।

सब्जियां : गाजर, खीरे, बेंगन जैसी सब्जियां ले सकते हैं। विटामिन सी युक्त फल निम्बू, संतरा, मौसंबी ले सकते हैं।                

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