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आखिर क्यों होती है, यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस की समस्या। ..?

प्रायः ४० साल के बाद महिलओं में खांसने या हंसने के दौरान अचानक यूरिन लीक हो जाना मेडिकल समस्या है, इसे यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस के नाम से जाना जाता है अथवा इसे अनइन्टेंशनल यूरिनरी लीकेज भी कहा जाता है। ये अक्सर ४० वर्ष के बाद की उन महिलाओं में होता है, जिनकी यूरिन को कंट्रोल करने वाली मांसपेशिओं में किसी वजह से कमजोरी उत्पन्न हो जाती है। के

जिसकी वजह से खाँसने या हँसने, या हँसने जैसी क्रियाओं के दौरान ब्लैडर पर अचानक दबाव पढ़ने की वजह से यूरिन लीकेज होता है, इसी प्रेशर के कारण पेल्विक फ्लोर मसल अचानक रिलैक्स हो सकती है, ऐसे में स्ट्रेस इंकॉन्टीनेंस का लक्षण ब्लैडर पर दबाव पड़ने के दौरान अचानक से यूरिन लीक होने के रूप में सामने आता है।
इसके पीछे का एक कारण मोटापा भी हो सकता है। यूरिनरी स्ट्रेस इन्काटिनेंस ज्यादातर ४० वर्ष अथवा इससे ज्यादा आयुवर्ग की महिलाओं में होता है। यानि उम्र बढ़ने के साथ ये समस्या बढ़ती जाती है। कई बार पीड़ित महिलाएं अल्कोहल, स्मोकिंग की आदी होती हैं, अथवा मोटापा भी वजह होता है। या उनकी ऐसी कोई सर्जरी हुई हो जिसका इफैक्ट पेल्विक फ्लोर मसल पर हुआ हो, तो भी इसकी आशंका बढ़ जाती है। ये स्थिति कई बार पीड़ित महिलाओं के लिए शर्मिंदगी का कारण भी बन जाती है। ऐसे में बढ़ती उम्र की इस आम समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय की यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना महत्वपूर्ण होगा। यूरोलॉजिस्ट जाँच के बाद ही इस समस्या का उपयुक्त इलाज तय कर सकते हैँ। इसके कुछ नेचुरल (प्राकृतिक) उपाय शामिल हैं, जैसे की पेल्विक मसल की एक्सरसाइज जिसे फिजिशयन के दिशा निर्देश में सीख सकते हैं। इसके अलावा दूसरा इलाज जैसे कि वैजाइनल कोन्स, इलेक्ट्रिकल स्टिम्युलेशन
और बायो फ़ीडबैक्स के साथ साथ मसल को strong करने वाली, मेडिसिन आदि दी जाती है। कई बार इससे पीड़ित सीरियस मामलों में मसल को strong
करने के लिए सर्जरी भी की जाती है। इसके अलावा इस प्रकार की समस्याओं को ठीक करने के लिए कुछ लाइफ स्टाइल संबंधी बदलाव भी किये जा सकते हैं। ऐसे में रेगुलर एक्सरसाइज, स्मोकिंग से बचाव और अल्कोहल की मात्रा को धीरे धीरे कम करते जाना और मोटापे पर कंट्रोल करना।
कई महिलाओं में मेनोपॉज के बाद ये समस्या पहले से ज्यादा बढ़ जाती है, जिससे पीड़ित महिलाओं को समाज में शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है, उनका कंट्रोल
सिस्टम वीक हो जाता हे। प्रायः मेनोपॉज के बाद यूरिन लीकेज की समस्या बढ़ गयी हो तो नियमित जाँच के बाद यदि इन्फेक्शन है तो ट्रीटमेंट से लीकेज
की समस्या ठीक होने सहायता मिल जाती है। यूरोलॉजिस्ट ब्लैडर और पेल्विक फ्लोर की भी जाँच क्र सकता है। इसके अलावा ब्लैडर अल्ट्रासॉउन्ड का दर्द
रहित इमेजिंग होता है। इससे आकलन करने में मदद मिलती है, की ब्लैडर को कैसे खाली किया जा सकता है। इसके अलावा सिस्टोस्कोपी का भी टैस्ट
करवाने से, जो की ब्लैडर की अंदरूनी जनकज के लिए होता है।
यूरिन लीकेज की समस्या से पीड़ित को इस समस्या के कारण रैशेज, स्किन Infection, घाव, फोड़े, फुंसियां, यूरिन से इन्फेक्शन होता है।
पेल्विक मसल्स की एक्सरसाइज जैसे कि जम्पिंग जैक,वाल स्क्वेट, ब्रिज और डैड बग क्रंच।
इसके अलावा पानी कितना पी रहे हैं, इसका भी ध्यान दें, तेज मसालेदार भोजन से बचें, कैफीन की मात्रा का लेवल कम करें। यदि एसिडिटी है तो उससे
बचने का उपाय करें और कॉर्बोनेटेड ड्रिंक्स से बचें।
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