सिटी ब्यूटीफुल यानि चंडीगढ़ में ये नहीं देखा तो क्या देखा…..!


हैलो दोस्तों , कैसे है आप,
चलें आज मैं आपको अपने देश के वैल प्लान्ड ,एक तरह से विकसित इस सुँदर शहर के बारे में बताता हूँ,जिसे सिटी ब्यूटीफुल के नाम से भी जाना जाता है, यदि चंडीगढ़ पहले आप कभी न आयें हो तो अबकी बार जब भी घूमने का मूड बने तो अपनी फ़ैमिली, मित्रों के साथ जरूर घूमने आएं !

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आजादी के समय भारत पाकिस्तान के बंटवारे के बाद पंजाब का कुछ हिस्सा पाकिस्तान में चला गया, यहां तक कि पंजाब की राजधानी लाहौर भी पाकिस्तान में चली गयी, इसके बाद पंजाब की राजधानी की जरूरत पड़ी ! भारतीय पंजाब का हिस्सा पूर्वी पंजाब और पाकिस्तान के पंजाब का हिस्सा पश्च्मि पंजाब कहलाया गया.!देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं जवाहरलाल नेहरू ने पंजाब की राजधानी बनाने के लिए खूबसूरत शहर की कल्पना की, इसके के उपरांत वर्ष १९५० में पंजाब की राजधानी बनाने के लिए इसकी जिम्मेदारी फ़्रांस के मशहूर आर्किटेक्ट “ली कार्बूजिए” को सौंपी गयी, ली कार…ने एक योजनाबद्द राजधानी के लिए एक ऐसा शहर जिसमे आधुनिक सुविधाओं से लैस वेल प्लांड शहर की रूप रेखा तैयार की, और उसको साकार रूप दिया, वर्ष १९५२ में चंड़ीगढ़ की नीँव रखी गयी.! शहर का प्लान करते हुए इस बात का ध्यान रखा गया, यहां पर लेटेस्ट तरीके की सुख सुविधाओं के अलावा प्राचीन भारतीय संस्कृति की प्रसिद्ध परम्पराएं भी साफ तौर पर नजर आएं ! इसीलिए इस शहर का नाम माँ चंडी देवी के नाम पर रखा गया, चंडीगढ़ मतलब चंडी का किला, माँ चंडी देवी मंदिर चंडीगढ़ कालका रोड पर स्थित है।

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यहां श्रद्धालुओं की भीड़ नवरात्रि के दिनों में खास होती है।
ली कार्बू….ने इस शहर के लिए एक खूबसूरत लोगो का डिज़ाइन “ओपन हाथ”, जो कार्बू… की थीम का ही एक हिस्सा है, मतलब शांति और पुर्नस्थापना का प्रतीक है।
ली कार्बूजे… ने ओपन हैंड मोन्यूमेंट चंडीगढ़ के राजधानी काम्प्लेक्स सेक्टर १ में स्थापित किया।
चंडीगढ़ में ५६ सेक्टर हैं , लेकिन ली कार्बूजे…जो १३ अंक को अशुभ मानते थे, इसीलिए उन्होंने चंडीगढ़ में सेक्टर १२ के बाद सेक्टर १४ की स्थापना की ।
वर्ष १९६६ में हरियाणा राज्य के अस्तित्व में आने के बाद चंडीगढ़ को यू टी, केंद्रशासित राज्य का दर्जा दिया गया, इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण, ये पंजाब के अलावा हरियाणा राज्य से सटा होने के कारण इसको हरियाणा , पंजाब दोनों की राजधानी बना दिया गया, इसके अलावा चंडीगढ़ का रेलवे स्टेशन भी दो शहरों का कंबाइंड स्टेशन है, इसका एक प्लेटफॉर्म हरियाणा में पंचकूला से ओर दूसरा चंडीगढ़ की तरफ है।
चंडीगढ़ हिमालय की शिवालिक पर्वतमाला की तराई में देश के उत्तर पश्चिम में स्थित भारत के ७ (सेवन) केंद्र शासित प्रदेशों में से एक हे ! इस शहर का एरिया लगभग ४५ वर्ग मील हे, इसकी हाइट समुंद्र तल से १०५४ फ़ीट हे !
संविधान की धारा २३९ के अनुसार यहां नियुक्त किये गए प्रशासक के चंडीगढ़ में आमतौर पर सभी धर्मों के लोग रहते हैं, तथा बोलचाल की भाषा पंजाबी, हिंदी और इंग्लिश है । चंडीगढ़ अपनी खुली साफ क्वालिटी की सड़कों के लिए देश में जाना जाता है ।

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ये ली कार्बूजिए की दूरदर्शी सोच का नतीजा हे, उन्होंने शहर को बारिश के पानी से, शहर तक न पहुंचे, इसके लिए बांध बनाया, उस बांध पर ४० फ़ीट का रास्ता
पैदल चलने के लिए बनाया, इसके चारोँ तरफ हरियाली के लिए पेड़ लगाए गए, इसको ही सुखना लेक कहते हैं, यहां पूरे वर्ष झील पानी से भरी रहती हे, पूरे वर्ष सुखना लेक पर पर्यटकों की भीड़ उमड़ी रहती है, प्रशासन द्वारा चंडीगढ़ की सुन्दता के लिए जगह जगह सफाई, खूबसरत पार्कों, सुंदर मौसमी फूलों के नजारे यहां वर्ष भर देखने को मिल जायेंगे, पूरा चंडीगढ़ हरियाली, सफाई के लिए माना जाता है ! इसके अलावा चंडीगढ़ के पास ही छतबीड़ जू में आप सफारी में घूम सकते हैं । इसके अलावा यहां पी जी आई के साथ ही मुल्लांपुर में सरकार ने न्यू चंडीगढ़ को बनाने के लिए जगह एक्वायर की है,यहां ओमेक्स जैसी बढ़े रेजिडेंशियल काम्प्लेक्स बन रहे हैं ।
चंडीगढ़ की संस्कृति मॉडर्न है। आम बोलचाल में हिंदी, इंग्लिश ही ज्यादा चलन में है, पर्यटन के हिसाब से यहां सुखना लेक इसके साथ लगते रॉक गार्डन,गार्डन के साथ ही पंजाब, हरियाणा हाई कोर्ट है ! इसके अलावा रोज गार्डन, सरकारी संघ्रालय ,जापानी गार्डन, म्यूजिकल फाउंटेन, बटरफ्लाई, आर्ट गैलरी और बॉटनिक गार्डन, इसके अलावा ३५० एकड़ में बना राजीव गाँधी चंडीगढ़ टेक्नोलॉजी पार्क,साथ पंचकूला में हिल स्टेशन मोरनी हिल उसके पास गुरु गोविन्द सिंह जी का हिस्टोरिकल नाडा साहिब गुरुद्वारा आदि घूमने लायक है !
यूँ चंडीगढ़ टूरिज्म द्वारा सेक्टर १७ से स्पेशल ओपन बस टूरिस्टों के लिए रेगुलर जाती हे, इससे आप सुखना लेक, रोक गार्डन घूमने जा सकते हैं ।
चंडीगढ़ से शिमला १२० कि मि की दूरी पर है !
शिमला जाने के लिए आपके पास कई ऑप्शन हैं, आप by air हलोकॉप्टर, सड़क या ट्रेन किसी से भी जा सकते हैं, ये आपके बजट और समय पर डिपेन्ड
करता हे । आप हेलीकॉप्टर से २५ से ३० मिनट में शिमला पहुंच सकते हैं, यहां से शिमला के लिए हर तरह की बस सर्विस, चाहे वॉल्वो बस हो,या रोडवेज बस, रेगुलर सर्विस हे यदि आपके पास समय और फुल एन्जॉय करने का मूड है तो आप वाया सुंदर छोटे हिल स्टेशन कसौली सड़क मार्ग से कैब लेकर जा सकते हैं, यहां सुंदर छोटी मार्किट है, ठहरने के लिए पर्याप्त होटल हैं, ये कैन्टोमेंट एरिया है, यहां से भी शिमला जाने लिए आपके सामने दो ऑप्शन हैं, यदि टॉय ट्रेन से जाना चाहें तो पास ही कैब से धर्मपुर रेलवे स्टेशन महज १५ कि मि की दूरी पर है, यहां से यहां से टॉय ट्रेन से जा सकते हैं, या बस, कैब से जा सकते हैं ! इसके अलावा चंडीगढ़ से ट्रेन, बस या कैब द्वारा पहले कालका जाकर, कालका से टॉय ट्रेन से शिमला जाने के ऑप्शन हैं , कालका शिमला रेल सेक्शन वर्ल्ड हैरीटेज में २४ जुलाई २००८ में आया था, इससे भी सफर का आनंद ले सकते हैं , इसके रास्ते में १०२ टनल आती हैं, जिसमे रास्ते में बड़ोग की टनल सबसे बड़ी हे , इसकी ( length) लम्बाई ११४३ mt. हे, यदि आप पहली बार शिमला जा रहे हैं तो मैं आपको टॉय ट्रेन से जाने को बोलूंगा,जो अंग्रेजों द्वारा ९ नव १९०३ को शुरू की गयी ।
ये हसीन हरियाली वादियों से घूमती हुई जाती हुई,और खूबसूरत नजारे देखने का अलग ही अनुभव हे । ऐसा लगता हे जैसे स्वर्ग में आ गए ।
धर्मशाला। …
धर्मशाला चंडीगढ़ से २५० कि मि की दूरी पर हे ,यहां से जाने के लिए आपके पास दो ऑप्शन हैं , एक by Air या सड़क मार्ग से जा सकते हैं , चंडीगढ़ से वॉल्वो, प्राइवेट ए सी (AC) और रोडवेज की रेगुलर बसें मिल जाती हैं !
चंडीगढ़ कैसे पहुंचें…….!

वैसे तो चंडीगढ़ में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है, यहाँ इंटरनेशनल फ्लाइट्स के अलावा डोमेस्टिक (घरेलू) फ्लाइट्स दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, भोपाल से सीधे घरेलू फ्लाइट्स हैं।

दिल्ली एयरपोर्ट से चंडीगढ़ के लिए वॉल्वो, व प्राइवेट बसों की रेगुलर सर्विस है।

ट्रेन्स ….चंडीगढ़ में चेन्नई , लखनऊ , मुंबई, हावड़ा, दिल्ली से जन शताब्दी एक्सप्रेस, देहरादून आदि से मुख्य ट्रेन्स आती हैं।
इसके अलावा देश के अलग अलग शहरों से रोडवेज की बसें रेगुलर आती हैं।

यहाँ आप एक बार आएंगे, बार बार आने को दिल करेगा।

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